Shesh Bharat: 'टुकड़े-टुकड़े' के आरोपों से घिरी अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, ABVP ने लगाए गंभीर आरोप, क्या है पूरा विवाद?

बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में ABVP ने 'देशविरोधी' गतिविधियों का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया. यूनिवर्सिटी गेट तोड़े गए और सुरक्षाकर्मियों से मारपीट हुई. प्रशासन ने आरोपों को गलत बताया है. दानवीर प्रेमजी की संस्था पर लगे इन आरोपों ने राज्य में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बहस छेड़ दी है.

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रूपक प्रियदर्शी

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Azim Premji University Controversy: मशहूर उद्योगपति अजीम प्रेमजी की यूनिवर्सिटी एक बड़े विवाद में आ गई है. बेंगलुरु के सरजापुर स्थित कैंपस में ABVP के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन और तोड़फोड़ की. आरोप है कि यूनिवर्सिटी के भीतर 'देशविरोधी' और 'सेना विरोधी' कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. पुलिस ने इस मामले में 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है.

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अजीम प्रेमजी की राजनीति को किसी एक खाने में फिट करना मुश्किल है. वे उन चंद बिजनेस टाइकून में से हैं जिन्होंने कभी भी खुलकर किसी पॉलिटिकल पार्टी या विचारधारा का का पक्ष नहीं लिया. कांग्रेस या बीजेपी-देश की सरकारों के साथ अजीम प्रेमजी के रिश्ते सम्मान वाले प्रोफेशनल रहे. मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 2011 में पद्म विभूषण सम्मान दिया गया.  बीजेपी के साथ प्रेमजी के रिश्ते हमेशा से संतुलित रहे हैं. उन्होंने पीएम मोदी के 'स्वच्छ भारत' और 'डिजिटल इंडिया' जैसे विजन की तारीफ की, तो वहीं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर काम भी किया. 

विवादों के चक्रव्यूह में फंसे

नेहरू के दौर से मोदी युग तक...स्वभाव से या च्वाइस से-अपॉलिटिकल प्रेमजी ज्यादा नहीं बोलते. लेकिन आज उनके कैंपस से उठे नारों की गूंज ने उन्हें विवादों के चक्रव्यूह में फंसा दिया. 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद 2015-16 के आसपास देश में असहिष्णुता (Intolerance) पर बहस छिड़ी, तब अजीम प्रेमजी ने दबी जुबान में चिंता जताई थी कि देश में लोगों को अपनी राय रखने से डरना नहीं चाहिए. वही एक बयान ट्रिगर बना जहां से उनको लिबरल, वामपंथी की कैटेगरी में डाला जाने लगा. कर्नाटक की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में जो हुआ कहीं वो 10 साल पुराना बदला तो नहीं? कहीं इसका कनेक्शन यूनिवर्सिटी के सिलेबस से तो नहीं? 

24 फरवरी को विवाद

तारीख 24 फरवरी 2026! बेंगलुरु का शांत रहने वाला सरजापुर इलाका अचानक जंग का मैदान बन गया. अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के गेट तोड़े गए, सुरक्षाकर्मियों को पीटा गया और दीवारों पर कालिख पोत दी गई.  ABVP का सीधा आरोप कि यूनिवर्सिटी के अंदर टुकड़े-टुकड़े गैंग पनप रहा है और सेना का अपमान किया जा रहा है. ऐसे दावे दिल्ली के जेएनयू के लिए कहे जाते रहे हैं. ABVP का मानना है कि प्रेमजी के पैसों से चलने वाला यह संस्थान 'वामपंथी विचारधारा' का नया अड्डा बन गया है. 

क्या है ABVP पर आरोप

ABVP का आरोप है कि अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी कैंपस में स्पार्क नाम के स्टूडेंट ग्रुप ने देशविरोधी कार्यक्रम किया और भारतीय सेना का अपमान किया. ABVP ने आरोप लगाया कि स्पार्क ग्रुप कश्मीरी अलगाववाद के प्रति सहानुभूति रखता है. पुलिस ने 25 कार्यकर्ताओं पर FIR की है, लेकिन चिंगारी अभी बुझी नहीं है. ABVP ने जिस कार्यक्रम के आयोजन का दावा किया उस पर अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने ऑफिशियली रिलीज जारी करके कहा कि इसे किसी कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी गई थी. ऐसा कोई कार्यक्रम हुआ भी नहीं.  प्रेमजी यूनिवर्सिटी में जो हुआ उसे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राज्य की 'IT हब' वाली इमेज और लॉ एंड ऑर्डर के लिए खतरनाक संकेत की तरह से रही है. कर्नाटक सरकार जांच कर रही है कि क्या कैंपस के अंदर सचमुच कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित हुआ जो 'विवादास्पद' था. 

संपत्ति का 67% हिस्सा किया दान

अजीम प्रेमजी ये कहानी उस शख्स की है, जो अरबों के साम्राज्य का हिस्सा दान करते दानवीर कहलाए. हालात ऐसे बदले कि आज वही अजीम प्रेमजी और उनकी यूनिवर्सिटी कट्टरपंथी विरोध की आग में झुलस रही है. आखिर क्यों ABVP के निशाने पर आए आईटी दिग्गज अजीम प्रेमजी? क्या ये सिर्फ एक कार्यक्रम का विरोध है या इसके पीछे छिपी है कोई गहरी राजनीतिक रंजिश?   वो दानवीर जिन्होंने अपनी संपत्ति का 67% हिस्सा, यानी करीब 21 बिलियन डॉलर, समाज सेवा के लिए दान कर दिया. आज वही प्रेमजी राइट विंग संगठनों के रडार पर आ गए. अजीम प्रेमजी को आप किसी एक पार्टी का नहीं माना जाता है. व्यापार में पूंजीवादी यानी Capitalist, स्वभाव में से Gandhian  और संस्कारों से Secular माने जाते हैं. ABVP जैसे राइट विंग संगठनों के कान में जब ये भनक लगती है कि उनकी यूनिवर्सिटी में आजादी के नारे लगते हैं, तो अजीम प्रेमजी एंटी-मोदी कैंप में खड़े कर दिए जाते हैं. दावा है कि अजीम की यूनिवर्सिटी में टुकड़े-टुकड़े गैंग की विचारधारा को खाद-पानी दिया जा रहा है.

अजीम प्रेमजी की कहानी

अजीम प्रेमजी ने जब विप्रो बनाया तब आत्मनिर्भर भारत या लोकल से ग्लोबल जैसे नारे सरकारी नहीं हुआ करते थे. अजीम प्रेमजी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है- कैसे एक 21 साल का लड़का जिसे साबुन और तेल का कारोबार विरासत में मिला था, उसने उसे दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक बना दिया. अजीम प्रेमजी का जन्म 1945 में एक संपन्न व्यापारिक परिवार में हुआ था. उनके पिता मोहम्मद हाशिम प्रेमजी 'वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स' (Wipro) के मालिक थे, जो 'सनफ्लावर' वनस्पति तेल और कपड़े धोने का साबुन बनाती थी. 1947 में विभाजन के समय, मुहम्मद अली जिन्ना ने हाशिम प्रेमजी को पाकिस्तान आने और वहां का वित्त मंत्री बनने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने जिन्ना को ना कहकर भारत में रहने का फैसला किया. 

1966 में जब अजीम प्रेमजी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (USA) में पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया. 21 साल की उम्र में वे भारत लौटे. अजीम प्रेमजी ने महसूस किया कि भविष्य केवल साबुन और तेल में नहीं है. आईटी सेक्टर का भविष्य और खाली जगह को ताड़कर विप्रो बनाया. कंप्यूटर हार्डवेयर और बाद में IT Services में निवेश किया. विप्रो ने अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियों के लिए कोडिंग और बैक-एंड काम करना शुरू किया. आज विप्रो दुनिया की शीर्ष आईटी कंपनियों में शुमार है, जिसका कारोबार 50 से अधिक देशों में फैला है.

अजीम प्रेमजी दानवीर क्यों कहे जाते हैं?

2019 में प्रेमजी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए विप्रो के अपने 67% शेयर (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये) सामाजिक कार्यों के लिए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दान कर दिए. फाउंडेशन स्कूल एजुकेशन के लिए काम करता है. भारत के 6 लाख गाँवों तक शिक्षा की पहुँच बनाना है. उनके दान किए पैसे आज भी स्कूल एजुकेशन पर खर्च होते हैं.  

80 साल की उम्र में अजीम प्रेमजी विप्रो के डेली काम नहीं देखते. 2019 में कार्यकारी पदों से हटने के बाद, वे अब विप्रो के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक और संस्थापक अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं. रिटायरमेंट के बाद अजीम प्रेमजी ने खुद को "कॉर्पोरेट टाइकून" से पूरी तरह "सोशल रिफॉर्मर" में बदल लिया है. उनकी पत्नी यास्मीन प्रेमजी लाइमलाइट से दूर, लिखती-पढ़ती हैं और फाउंडेशन के लिए काम करती हैं. बड़े बेटे ऋषद प्रेमजी विप्रो को Executive Chairman की हैसियत से लीड करते हैं. छोटे बेटे तारिक प्रेमजी भी विप्रो और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में काम करते हैं. इतनी संपत्ति के बावजूद वे अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं. वे अक्सर इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं और पुराने मॉडल की कारें इस्तेमाल करते रहे हैं. प्रेमजी 'Simple Living, High Thinking' में विश्वास रखते हैं. आज भी फूंक-फूंक कर खर्च करना के लिए मशहूर हैं.

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