देश में युवाओं की राजनीति और उनके रुख को लेकर अक्सर टीवी स्टूडियोज से लेकर चाय की टपरियों तक बहस छिड़ी रहती है. लेकिन आज का युवा असल में क्या सोच रहा है? इसी 'पल्स' को पकड़ने के लिए C-Voter ने एक विस्तृत सर्वे किया है. इस सर्वे में Gen Z से उनकी चुनावी प्राथमिकताओं, सोशल मीडिया के असर और नेताओं की योग्यता पर सीधे सवाल पूछे गए. आइए देखते हैं आज का युवा क्या चाहता है.
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रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ा मुद्दा
सर्वे में युवाओं से पूछा गया कि चुनाव में उनके लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है. इस सवाल पर 53 फीसदी युवाओं ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे जरूरी बताया.
इसके बाद 13.1 फीसदी युवाओं ने महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा माना. 11.9 फीसदी के लिए भ्रष्टाचार अहम रहा. वहीं 8.2 फीसदी युवाओं ने सड़क, बिजली और पानी को प्राथमिकता दी.
4.8 फीसदी युवाओं ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को जरूरी बताया. 2.7 फीसदी के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रही. 1.3 फीसदी ने दूसरे मुद्दों को अहम बताया, जबकि 5 फीसदी युवा कोई जवाब नहीं दे सके.
मुद्दे देखकर वोट करना पसंद करते हैं युवा
वोट देने के आधार पर बात हुई तो 33.3 फीसदी युवाओं ने माना कि वे किसी खास 'मुद्दे' को देखकर ही बटन दबाते हैं. वहीं 20 फीसदी युवा किसी बड़े राष्ट्रीय नेता का चेहरा देखकर और 13.9 फीसदी लोग पार्टी के सिंबल को देखकर वोट तय करते हैं. उम्मीदवार का चेहरा देखकर वोट देने वाले महज 7.7 फीसदी रहे.
नेताओं से 'कनेक्ट' नहीं बिठा पा रहे युवा
हाल के दिनों में पेपर लीक और छात्र आंदोलनों का असर सर्वे के नतीजों में भी साफ दिखा. जब पूछा गया कि क्या राजनीतिक पार्टियां उनकी समस्याओं को समझती हैं, तो 58.7 फीसदी युवाओं ने बेबाक अंदाज में कहा 'बिल्कुल नहीं!' सिर्फ 20.7 फीसदी युवाओं को लगता है कि पार्टियां उनकी चिंता करती हैं.
जातिवाद को 'नो', पढ़े-लिखे चेहरों को 'हां'
भारतीय राजनीति में भले ही जाति एक बड़ा फैक्टर मानी जाती हो, लेकिन 48.2 फीसदी युवाओं ने साफ कह दिया कि वे जाति देखकर वोट नहीं करेंगे. इसके साथ ही नेताओं की डिग्री को लेकर युवा काफी सख्त दिखे, 59.5 फीसदी का मानना है कि उम्मीदवार का पढ़ा-लिखा होना बेहद जरूरी है. 74.6 फीसदी युवाओं ने तो यहां तक कहा कि अगर पार्टियां युवाओं को टिकट दें, तो वे उन्हें खुशी-खुशी वोट देंगे.
वोट देने के फैसले में राष्ट्रवाद कितना अहम कारक?
देशभक्ति और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर युवाओं से जब राय मांगी गई, तो 49.5 फीसदी युवाओं ने माना कि वोट देते समय राष्ट्रवाद उनके फैसले में एक अहम कारक होता है. वहीं 26.5 फीसदी युवाओं ने कहा कि राष्ट्रवाद उनके लिए वोट देने का मुख्य आधार नहीं है और 24 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस बारे में स्पष्ट नहीं हैं.
आज का युवा सबसे ज्यादा किस पर करता है भरोसा?
भरोसे के सवाल पर चौंकाने वाले और सकारात्मक आंकड़े सामने आए. सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स के दौर में भी देश के 75.1 फीसदी युवा सबसे ज्यादा भरोसा अपने माता-पिता (परिवार) पर करते हैं. दोस्तों पर भरोसा करने वाले युवा 6.9 फीसदी हैं, जबकि इन्फ्लुएंसर्स पर महज 6.8 फीसदी युवा ही भरोसा करते हैं. वहीं 11.1 फीसदी लोगों का कहना था कि वे इस पर कुछ कह नहीं सकते.
सोशल मीडिया गलत भाषा का इस्तेमाल जायज?
सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटीज और हस्तियों के खिलाफ होने वाली ट्रॉलिंग और अभद्र भाषा पर भी सवाल पूछा गया. इस पर 21.1 फीसदी युवाओं ने कहा कि वे इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करते, जबकि 29.1 फीसदी ने कहा कि वे शायद इसे स्वीकार नहीं करते. वहीं 21.4 फीसदी लोग ऐसे थे जो इसे पूरी तरह स्वीकार करते हैं, 15.1 फीसदी कुछ हद तक स्वीकार करते हैं और 13.4 फीसदी ने इस पर अपनी कोई राय नहीं जताई.
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