परिमल नाथवानी के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने के साथ साफ हो गया कि उनकी जीत पक्की है. 2008 में जब उन्होंने ऐसे समय पहली बार राज्यसभा चुनाव लड़ा था जब किसी को बहुमत नहीं था. परिमल नाथवानी के नाम पर कांग्रेस, जेएमएम (JMM) और आरजेडी (RJD) विधायकों ने मन की आवाज पर क्रॉस वोटिंग करके जीत दिलाई थी. 2014 और 2020 में ऐसे किसी खेल की नौबत नहीं पड़ी. 2026 में फिर क्रॉस वोटिंग हुई. बहस चल रही है कि कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की या जेएमएम वालों ने.
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झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन सरकार के पास 56 विधायकों का प्रचंड बहुमत था, जीत कांग्रेस के प्रणव झा की पक्की मानी जा रही थी. जब रिजल्ट सामने आया तो प्रणव झा सिर्फ 20 वोटों पर सिमट गए. बीजेपी के समर्थन वाले निर्दलीय परिमल नाथवानी ने 28 जादुई वोट हासिल कर दिल्ली का टिकट कटा लिया. गठबंधन के कुनबे में ऐसी 'तोड़फोड़' और 'क्रॉस-वोटिंग' हुई कि सब आंखें फाड़े देखते रहे. हालांकि परिमल नाथवानी फिर चमत्कार से जीते और उनकी इस जीत की पूरे देश में चर्चा में हो रही है.
राजनीति में जब सब कह रहे हों कि खेल खत्म हो चुका है, तभी पर्दे के पीछे से एंट्री होती है रिलायंस के सबसे बड़े 'क्राइसिस मैनेजर' और चाणक्य परिमल नाथवानी की! यही उनका गुण है राजनीति में भी और कॉरपोरेट वर्ल्ड में भी. कभी साबुन बेचकर बिजनेसमैन बनने में फेल, कभी अमीर बनने के चक्कर में शेयर बाजार में डूबे परिमल नाथवानी आज देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट, देश के सबसे बड़े बिजनेस हाउस रिलायंस के सबसे लॉयल माने जाते हैं. उन्हें रिलायंस के फाउंडर धीरू भाई अंबानी का थर्ड सन ऐसे नहीं कहा जाता. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानेंगे परिमल नाथवानी की पूरी कहानी.
मिडिल क्लास परिवार में जन्मे थे नाथवानी!
अकूत संपत्ति और रिलायंस की टॉप पोजिशन बैठे परिमल नाथवानी का बचपन और जवानी किसी रईसी में नहीं बीती. 1 फरवरी 1956 को मुंबई में जन्मे परिमल के पिता धीरजलाल नाथवानी और माता पुष्पाबेन नाथवानी गुजरात के एक छोटे से कस्बे 'जाम खंभालीया' के रहने वाले थे. मुंबई में साधारण और मिडिल क्लास माहौल में परिमल की परवरिश हुई. वो परिवार के ऐसे बेटे थे जिसका मन पढ़ने में कम, क्रिकेट खेलने में ज्यादा लगता था.
परिमल नाथवानी आज जहां हैं वो पहुंचना कतई सपना नहीं था. कॉलेज के दिनों में उस जमाने के बॉम्बे की कांघा लीग में क्रिकेट खेलते थे. किसी एक मैच में गेंद सीधे आंख पर लगी और क्रिकेट करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया. परिमल नाथवानी देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट फेस में से हैं लेकिन किसी आईएमएस या बड़े बी स्कूल से नहीं निकले.
फ्लॉप हो गया था पहला बिजनेस
parimalnathwani.com पर परिमल नाथवानी ने अपनी कहानी लिखी है कि बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से पीएचडी की डिग्री हासिल की. मुंबई के न्यू एरा मिल्स के ब्लीचिंग डिपार्टमेंट में काम किया. वहां से जो सबक सीखे, वो बेकार नहीं गए. मैंने मुंबई में अपनी खुद की एक साबुन की एजेंसी स्थापित कर ली. एक
उद्यमी(Entrepreneur) के तौर पर मेरा पहला कदम बिल्कुल फ्लॉप साबित हुआ. शेयर बाजार की तेजी में मुनाफे की तलाश में मेरा मन शेयर बाजार की तरफ गया लेकिन तभी हर्षद मेहता घोटाले की वजह से बाजार में भारी मंदी आ गई. एक बार फिर, मोटी कमाई करने के मेरे सपने हकीकत में नहीं बदल सके.
परिमल नाथवानी की लाइफ फिलॉसफी रही कि इंसान खुद अपने भाग्य का निर्माता होता है और धैर्य एक ऐसा गुण है जो कभी निराश नहीं करता. एक उद्यमी के रूप में इतनी निराशाजनक शुरुआत के बाद, आखिरकार सफलता ने मुझे ढूंढ ही लिया. मेरे इस कभी न हार मानने वाले रवैये (जिद) के अलावा, यह भगवान पर मेरा अटूट विश्वास ही था, जिसने मुझे जीवन के उन बेहद मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद की.'
धीरूभाई अंबानी ने परिमल को दिया था सीक्रेट टास्क!
इतना सब होने के बाद रिलायंस ब्रैंडेड उस परिमल नाथवानी की जिंदगी शुरू हुई. परिमल धीरूभाई अंबानी के जमाने के हैं. परिमल की किस्मत की कहानी और धीरू भाई के बिजनेस की कहानी एक साथ 1995 में बदलनी शुरू हुई. तब धीरूभाई अंबानी जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी लगाने की कोशिश कर रहे थे. 10,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना था लेकिन किसान विरोध करने सड़कों पर थे. तब धीरूभाई के खास मनोज मोदी ने परिमल को धीरूभाई से मिलवाया. धीरूभाई ने परिमल को एक खुफिया टास्क दिया ये पता लगाने के लिए किसान हमारे खिलाफ क्यों हैं?
परिमल जामनगर में सीक्रेट ऑपरेशन चलाया. लौटकर धीरूभाई को रिपोर्ट दी कि किसान सिर्फ पैसा नहीं, अपने बच्चों के लिए रिलायंस में नौकरी की गारंटी चाहते हैं. नाथवानी ने रिलायंस का नाम गुप्त रखते हुए ताकि दाम न बढ़ें किसानों की मर्जी से 10,000 एकड़ जमीन और 1600 से ज्यादा प्रॉपर्टीज का जादुई अधिग्रहण अकेले दम पर कर दिखाया.
धीरूभाई ने ही पलट दी परिमल की किस्मत!
धीरूभाई को परिमल का काम इतना पसंद आया कि रिफाइनरी शुरू होने से दो साल पहले ही 1997 में उन्हें पूरे गुजरात का 'फेस ऑफ रिलायंस' बना दिया. वही से रिलायंस के सबसे बड़े 'संकटमोचक' बन गए परिमल नाथवानी. रिलायंस की हायरार्की(Hierarchy) में परिमल का कद और करियर रॉकेट की तरह उड़ने लगा. परिमल नाथवानी ने 1997 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ज्वाइन की. 2013 यानी सिर्फ 16 साल में ग्रुप प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स एंड प्रोजेक्ट्स) यानी रिलायंस की कोर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा हैं.
कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कहा जाता है कि मुकेश अंबानी के पास बिजनेस चलाने के लिए बहुत से लोग हैं, लेकिन डील डन करने की चाबी केवल परिमल नाथवानी के पास है. धीरू भाई अंबानी के जाने के बाद परिमल मुकेश अंबानी की भी परछाईं बन गए. भुज भूकंप के दौरान राहत कार्य संभालना हो, रिलायंस रिटेल का साम्राज्य खड़ा करना हो या देश भर में 'जियो' (Jio) के लिए फाइबर नेटवर्क बिछाना-परिमल कहीं नहीं चूके. शायद इसलिए ही उन्हें धीरूभाई अंबानी थर्ड सन भी कहा जाता है.
रिलायंस की वजह से ही आए राजनीति में?
परिमल नाथवानी आज क्या कुछ नहीं है. चौथी बार राज्यसभा सांसद बने है. रिलायंस के टॉप मैनेजमेंट हैं. करीब 400 करोड़ की संपत्ति है उन्हें देश के सबसे अमीर राज्यसभा सांसदों की टॉप-10 लिस्ट में शुमार करती है. धीरू भाई इतने बड़े आदमी बने लेकिन राजनीति में नहीं आए. मुकेश-अनिल अंबानी भी राजनीति से दूर रहे लेकिन परिवार और घराने के सगे परिमल नाथवानी की राजनीति में एंट्री हुई या कराई गई, ये कौन जाने. मान सकते हैं कि रिलायंस में इतना ऊंचा कद होने के बाद भी अगर परिमल 2008 से राजनीति में हैं तो इसके पीछे रिलायंस की कोई हिडन क्रिस्प स्ट्रेटेजी हो सकती है.
मोदी-शाह से करीब 3 दशक से हैं दोस्ती
परिमल नाथवानी राजनीति में आए और निर्दलीय रहे. इसके बाद भी कि मोदी-शाह से उनकी दोस्ती आज नहीं करीब 3 दशक पुरानी है. नाथवानी, नरेंद्र मोदी को तब से जानते हैं जब वो गुजरात के सीएम तक नहीं थे. किसी एक पार्टी का बिल्ला न लगाने के कारण वो बीजेपी, कांग्रेस, जेएमएम और यहां तक कि वाईएसआरसीपी के लिए भी हमेशा मित्र बने रहे. हर बार निर्दलीय चुनाव में उतरते हैं, बीजेपी उनका समर्थन करती है और सामने वाली पार्टी में तोड़फोड़, क्रॉस वोटिंग के साथ परिमल राज्यसभा चुनाव जीत जाते हैं. देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक रहने वाले 'निर्दलीय' राज्यसभा सांसदों में शुमार हैं परिमल नाथवानी.
परमिल नाथवानी का परिवार
परिमल नाथवानी के इस आलीशान साम्राज्य और उनके जीवन को स्थिरता दी उनकी पत्नी वर्षा नाथवानी ने. आज परिमल नाथवानी की अगली पीढ़ी भी कॉर्पोरेट और खेल जगत में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है. उनके दो बेटे हैं- धनराज नाथवानी और करन नाथवानी. उनके बड़े बेटे धनराज नाथवानी रिलायंस न्यू एनर्जी के डायरेक्टर होने के साथ-साथ गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष भी हैं.
छोटे बेटे करन नाथवानी की शादी में पूरा अंबानी परिवार एक अभिभावक के तौर पर शरीक हुआ था, जो इस बात का सबूत है कि नाथवानी परिवार ने केवल संपत्ति नहीं, बल्कि रिलायंस के साम्राज्य में अटूट पारिवारिक संबंध कमाए हैं. अंबानी परिवार के साथ परिमल नाथवानी का रिश्ता सिर्फ बॉस और कर्मचारी का नहीं, बल्कि गहरी दोस्ती और अटूट भरोसे का है. उनके बेटे करन नाथवानी की शादी रिलायंस के जियो वर्ल्ड सेंटर में हुई, जिसमें अंबानी परिवार की मौजूदगी ने इस तीन दशक पुराने भरोसेमंद रिश्ते की गवाही दी.
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