Charchit Chehra: कौन हैं सयानी घोष जो कही जा रहीं ममता की उत्तराधिकारी? जानिए कैसे बबली गर्ल बनी बंगाल टाइग्रेस

Charchit Chehra Saayoni Ghosh: कौन हैं सयानी घोष जिन्हें ममता बनर्जी की संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है? जानिए कैसे एक बंगाली फिल्म एक्ट्रेस से तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड नेता बनीं सयानी घोष. 2026 बंगाल चुनाव से पहले उनकी बढ़ती लोकप्रियता, वायरल भाषण, विवाद, जादवपुर से बड़ी जीत और राजनीति में तेजी से उभार की पूरी कहानी पढ़ें इस स्पेशल 'चर्चित चेहरा' में.

Saayoni Ghosh Biography
Saayoni Ghosh Biography

रूपक प्रियदर्शी

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बंगाल के चुनाव में हार या जीत ममता बनर्जी की होनी है. सब कुछ ममता कर रही हैं. उनके आसपास हो रहा है. ममता के शैडो में एक लड़की ने तेजी से नाम कमाया है. ऐसा नाम जिसके बारे में दावा किया जा रहा है वही चुनाव में ममता और तृणमूल कांग्रेस की जीत की गारंटी बनेगी. बंगाल के रैली ग्राउंड से लेकर सोशल मीडिया पर एक ही नाम की गूंज है-सयानी घोष!  

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कभी गाना गाते हुए, कभी शेरो शायरी करते हुए सयानी घोष ने बीजेपी के खिलाफ पूरा बवाल काटा हुआ है. सोशल मीडिया पर उनके वीडियो ऐसे आग लगा रहे हैं कि विरोधियों के लिए गर्मी अभी से बढ़ गई है. सयानी आज ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी क्राउड पुलर बन चुकी हैं. अग्रेशन भी, शेरो-शायरी भी, तेवरों के कारण 'इंटरनेट सेंसेशन' बनी हुई हैं, सीधे मोदी-शाह को ललकार रही हैं. ममता और अभिषेक बनर्जी के साथ बंगाल की रैलियों के लिए सबसे ज्यादा किसी की डिमांड है तो वो हैं सयानी घोष क्योंकि उनकी अपील महिलाओं और यूथ में जबरदस्त है. 

चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ही सयानी 'टॉक ऑफ द टाउन' बनी हुई हैं? साथ ही जानेंगे बांग्ला फिल्मों की बबली गर्ल से सायनी कैसे बनी बंगाल की 'टाइग्रेस'?

ममता का फोन और सयानी की एंट्री

पश्चिम बंगाल में 2021 का विधानसभा चुनाव बड़ा हाहाकारी हो रहा था. मान लिया गया था कि 2019 में धमाका कर चुकी बीजेपी ममता को हराकर सत्ता में आ जाएगी. चुनाव का बिगुल बजा हुआ था. उस दौर में सयानी घोष बंगाली फिल्मों की ग्लैमरस स्टार एक्ट्रेस थीं. तभी आता है ममता बनर्जी का एक फोन कॉल. ममता ने कहा- 'सयानी, लड़ना है!'. सयानी ने न आव देखा न ताव, मेकअप वैन छोड़ी और सीधे चुनावी मैदान में उतर गईं. उसी दिन तय हो गया था कि ये लड़की लंबी रेस वाली बंगाल टाइग्रेस बनेगी जिस पर ममता बनर्जी ने दांव लगाया. ग्लैमर की दुनिया से इस 'इंस्टेंट शिफ्ट' ने पूरे बंगाल को चौंका दिया था.

तब आसनसोल दक्षिण से बीजेपी अग्निमित्रा पॉल से हार गईं, लेकिन उनकी 'फाइटिंग स्पिरिट' ने दीदी का दिल जीत लिया. पहला चुनाव हारने के बाद सयानी राजनीति में टिकी रहीं. ममता ने तेवर देखकर टीएमसी की 'यूथ विंग' का नेशनल प्रेसिडेंट बनाकर सीधे पार्टी के पावर सेंटर में एंट्री दे दी. तब से सयानी घोष की पोजिशन हर दिन स्ट्रान्ग हो रही है. वीक होने का तो सवाल ही नहीं.

कौन हैं सयानी घोष?

सयानी घोष का जन्म 27 जनवरी 1993 को कोलकाता के मिडिल क्लास फैमिली समर घोष और मां सुदीपा घोष के घर में हुआ. बचपन कोलकाता में बीता जहां उन्होंने छोटी उम्र से ही सिंगिंग और डांसिंग की ट्रेनिंग शुरू की जो आगे चलकर एक्ट्रेस बनने में काम आया. सयानी ने अपने करियर का आगाज 2010 में 'स्टार जलशा' के टेलीफिल्म 'इच्छे दाना' (Ichhe Dana) से किया. इसके बाद उन्होंने 'अपराजिता', 'प्रलय आस्छे' और 'केयर कोरी ना' जैसे लोकप्रिय बंगाली धारावाहिकों में काम किया, जिससे वो घर-घर में पहचानी जाने लगीं. 

सयानी घोष का करियर

2010 में ही उन्होंने फिल्म 'नटोबोर नॉट आउट' (Natobar Not Out) में एक छोटी भूमिका के साथ फिल्मों की दुनिया में कदम रखा. 2011 में राज चक्रवर्ती की फिल्म 'शत्रु' (Shotru) में जीत के साथ स्क्रीन शेयर करने के बाद उन्हें असली पहचान मिली. फिर सयानी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'कानमाछी' (2013), 'राजकाहिनी' (2015) और 'ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना' (2016) जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवाया. उसी दौर में आया बंगाल का चुनाव और उसी के साथ ममता दीदी का फोन जिसने हमेशा के लिए सयानी घोष की जिंदगी बदल दी. 

क्या सयानी है ममता की उत्तराधिकारी?

2011 से बंगाल पर राज  कर रहीं ममता बनर्जी ने हर चुनाव में बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला. बंगाल के ग्लैमर वर्ल्ड को राजनीति, पार्टी में ले आई. शताब्दी रॉय, देबोश्री रॉय, सायंतिका बनर्जी. मीमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां, सयानी घोष...ऐसे ग्लैमर फेसेस की लंबी लिस्ट है जिनको ममता ने एक्ट्रेस से विधायक, सांसद बनाकर पावर सेंटर बना दिया. उन सारे नामों में आज सबसे ज्यादा शाइन करने वाला नाम है सयानी घोष का जिनके बारे में लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि वहीं तृणमूल कांग्रेस की फ्यूचर हैं, वही ममता की उत्तराधिकारी हैं.

2024 में ममता ने न केवल टिकट दिया बल्कि उस जादवपुर से उम्मीदवार बनाया जहां से कभी ममता ने खुद अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. 2019 में ये सीट एक्ट्रेस मिमी चक्रवर्ती को मिली थी. आज सयानी न सिर्फ संसद में ममता बनर्जी की सबसे तेज-तर्रार आवाज हैं, बल्कि 2026 के बंगाल चुनाव के लिए टीएमसी की सबसे भरोसेमंद, पॉपुलर फेस बनकर उभरी हैं.

राजनीति में एंट्री लेते ही विवादों में घिरी सयानी

सयानी की एंट्री जितनी फिल्मी थी, उतनी ही विवादित भी. राजनीति में कदम रखते ही उनका 2015 का एक पुराना ट्वीट वायरल हो गया. शिवलिंग पर कंडोम वाली उस तस्वीर ने ऐसा बवाल काटा कि बीजेपी ने हिंदू भावनाओं का अपमान बताकर सयानी को घेर लिया. लेकिन सयानी झुकी नहीं. 

बंगाल चुनाव में सयानी घोष का कैंपेन तब से भारी चर्चा में आया जब उन्होंने बीजेपी के बारे में बोलना शुरू किया कि चाय से शुरू हुई थी सरकार, गाय पर अटक गई. विकास के पापा मोदी जी रास्ते में भटक गए. उस एक वायरल पंचलाइन  ने टीएमसी कार्यकर्ताओं में ऐसा जोश भरा कि सयानी की कही लाइन बंगाल की गलियों में नारों की तरह गूंज रही है. 

सयानी का यहां तक पहुंचना फूलों की सेज नहीं था. करियर की शुरुआत में ही उन पर शिवलिंग के अपमान का आरोप लगा, जिसे बीजेपी ने बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया. फिर हुई त्रिपुरा में गिरफ्तारी और फिर करोड़ों के शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी (ED) की लंबी पूछताछ. मान लिया गया कि सयानी घोष का चैप्टर शुरू होते ही क्लोज हो गया लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 'जादवपुर' जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से ढाई लाख से ज्यादा वोटों की ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सबको खामोश कर दिया. 

सयानी घोष का वायरल अंदाज!

संसद के गलियारों में सयानी घोष की एंट्री किसी कड़क चाय जैसी रही है- तेज, कड़वी और होश उड़ा देने वाली. अच्छे दिन से लेकर महंगाई की थाली तक-उनके 3 'महा-वायरल' भाषणों ने रातों-रात नेशनल स्टार और बीजेपी के खिलाफ देश की मजबूत विपक्षी आवाज बना दिया. सयानी घोष की सबसे बड़ी ताकत और पहचान उनका भाषण है. बंगाल के गांव-गलियों से लेकर संसद तक सयानी घोष के हर भाषण वायरल होते हैं.

संसद में जब सयानी माइक संभालती हैं, तो लोगों को याद आता है ऐसा कभी तो यंग ममता बनर्जी के तेवर हुआ करते थे. सयानी घोष सिर्फ एक अच्छी एक्ट्रेस और नेता ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन सिंगर भी हैं. उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की है और अक्सर अपनी रैलियों में भीड़ को जोड़ने के लिए लोकगीत (Folk Songs) गाती हैं, जो उन्हें जमीन से जुड़े नेता के रूप में स्थापित करता है.

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