CM रेवंत रेड्डी का BRS पर सरकार गिराने का आरोप, क्या है 'काला जादू' विवाद?

राजू झा

18 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 18 2026 11:28 AM)

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने BRS नेताओं पर कर्नाटक और तमिलनाडु के मंदिरों में अघोर पूजा व काला जादू करवाकर कांग्रेस सरकार को गिराने और राज्य में सूखा लाने की साजिश का आरोप लगाया है.

रेवंत रेड्डी
रेवंत रेड्डी
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तेलंगाना की राजनीति में इन दिनों एक अजीब और गरमाया हुआ मुद्दा छाया हुआ है. राज्य के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेताओं पर बेहद गंभीर और अनोखा आरोप लगाया है. सीएम रेवंत रेड्डी का कहना है कि विपक्ष कांग्रेस सरकार को गिराने और राज्य में संकट पैदा करने के लिए 'काला जादू' और तांत्रिक पूजाओं का सहारा ले रहा है.

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आइए समझते हैं कि तेलंगाना की सियासत में तंत्र-मंत्र की यह कहानी कहाँ से शुरू हुई, दोनों पक्षों का क्या कहना है और इस राज्य का 'काले जादू' से जुड़ा सामाजिक इतिहास क्या रहा है.

स्वतंत्रता दिवस पर सीएम रेवंत रेड्डी का बड़ा दावा

15 अगस्त को संगारेड्डी शहर में स्मार्ट पीडीएस (PDS) राशन कार्ड वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने BRS नेताओं पर सीधा निशाना साधा. सीएम ने बिना नाम लिए BRS के वरिष्ठ नेता और विधायक टी. हरीश राव पर आरोप लगाया कि वे पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु के मंदिरों में जाकर अघोर पूजा और तांत्रिक अनुष्ठान करवा रहे हैं.

सीएम रेवंत रेड्डी के प्रमुख आरोप:

सूखा और तबाही की कामना: सीएम ने कहा कि विरोधी नेताओं ने राज्य में बारिश रुकने, सूखा पड़ने और लोगों को परेशान करने के लिए पूजाएं करवाई हैं ताकि सरकार बदनाम हो सके.

गोपनीयता पर सवाल: उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये सामान्य धार्मिक यात्राएं थीं तो टी. हरीश राव ने अपनी इन मंदिर यात्राओं की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा क्यों नहीं की?

भगवान हमारे साथ हैं: रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की कोशिशें नाकाम होंगी क्योंकि सरकार की नीयत साफ है और हाल की बारिश से जल संकट भी टल गया है.

BRS का पलटवार

मुख्यमंत्री के आरोपों पर BRS विधायक टी. हरीश राव ने कड़ा ऐतराज जताया और स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

  • मानहानि का मुकदमा: हरीश राव ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के इन बेबुनियाद बयानों के खिलाफ मानहानि (Defamation) का केस दर्ज कराएंगे.
  • असली मुद्दों से ध्यान भटकाना: BRS का कहना है कि राज्य सरकार किसान कर्जमाफी, खाद की कमी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुख्य मुद्दों पर घिरी हुई है. इन्हीं नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए तंत्र-मंत्र जैसे अनर्गल आरोप गढ़े जा रहे हैं.
  • 25 साल पुराना ट्रेंड: तेलंगाना में राजनीति और अंधविश्वास

तेलंगाना की राजनीति में तांत्रिक क्रियाओं और शूद्र पूजा के आरोप-प्रत्यारोप का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले 20-25 सालों से यहाँ चुनाव या संकट के समय राजनेता एक-दूसरे पर तांत्रिक अनुष्ठान कराने का आरोप लगाते रहे हैं.

ऐतिहासिक पहलू (1983 का मेदक मामला): अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौरान 1983 में मेदक जिले में काले जादू का डर एक महामारी की तरह फैल गया था, जिससे हिंसक झड़पें होने लगी थीं. तब पुलिस अधीक्षक (SP) को नास्तिक केंद्र और वैज्ञानिकों की टीम बुलानी पड़ी थी. डॉक्टरों की जांच में पता चला था कि जिसे लोग 'काला जादू' मान रहे थे, वह वास्तव में अत्यधिक मानसिक तनाव, 'हिस्टीरिया' और 'शिजोफ्रेनिया' का असर था.

NCRB के चिंताजनक आंकड़े: 2021 की नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, अंधविश्वास और काले जादू के संदेह में होने वाली मौतों के मामले में तेलंगाना देश के शीर्ष राज्यों (तीसरे स्थान) में शामिल है.

सख्त कानून की कमी: महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर तेलंगाना में भी अंधविश्वास और काले जादू के खिलाफ सख्त कानून बनाने की माँग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कानून लागू नहीं हो सका है.

क्या है तेलंगाना विधानसभा का समीकरण?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आंकड़ों के लिहाज से राज्य में कांग्रेस सरकार पूरी तरह मजबूत है [04:01]. 119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा में:

  • कांग्रेस: 76 सीटें
  • BRS: 27 सीटें 
  • BJP: 7 सीटें
  • AIMIM: 7 सीटें
  • CPI: 1 सीट

आंकड़ों के पक्ष में होने के बावजूद, 'काले जादू' के इन बयानों ने तेलंगाना की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है.

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