संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के तुरंत बाद इंदिरा भवन में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत CWC के अधिकांश वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस बैठक में हिस्सा नहीं ले सके. आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह बैठक रणनीतिक रूप से बेहद खास मानी जा रही है, जिसमें पार्टी ने जनता के बीच जाने के लिए अपने मुख्य एजेंडे को अंतिम रूप दे दिया है.
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युवाओं और रोजगार पर रहेगा कांग्रेस का सबसे बड़ा फोकस
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पार्टी के लिए देश का युवा सबसे बड़ी सामूहिक चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी कई क्षेत्रों में स्थितियां सुधरने के बजाय बदतर हुई हैं और सरकार की गलत नीतियों ने देश के युवाओं को हताशा के दलदल में धकेल दिया है.
खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा युवाओं को प्राथमिकता दी है. अब समय आ गया है कि पार्टी युवाओं के भविष्य, पेपर लीक, शिक्षा और रोजगार की समस्याओं को देखते हुए एक स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध 'एजुकेशन टू एंप्लॉयमेंट' (Education to Employment) रोडमैप तैयार करें.
राम मंदिर चढ़ावा और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र को घेरने का प्लान
CWC की इस बैठक में केवल युवाओं का मुद्दा ही नहीं, बल्कि आम जनता के भरोसे से जुड़े अन्य प्रमुख मुद्दों पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी और घोटाले के मुद्दे पर जनता में भारी रोष है. लोग सवाल उठा रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री इस पर मौन हैं.
इसके अलावा, देश की सीमाओं की वास्तविक स्थिति और गलवान झड़प के बाद के हालात पर भी सवाल उठाए गए. कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही तय करना विपक्ष की जिम्मेदारी है, और पार्टी इन तमाम विषयों पर जनता के सामने ठोस विकल्प, नीति और समाधान पेश करेगी.
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