Shesh Bharat: सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार? महीनों से कांग्रेस के सामने ये सवाल बना हुआ है कि सीएम बनाए रखना है या डीके से किया गया ढाई साल पहले किया गया ढाई वाला वादा पूरा करना है. कर्नाटक के लेवल इसको लेकर गर्म बहस ठंडी पड़ती नहीं और दिल्ली में बैठा हाईकमान कोई स्टैंड ले नहीं रहा है. इस बीच 2026 के चुनावों को लेकर कांग्रेस ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे लग रहा है कि शायद अगले तीन-चार महीने कुछ न हो. असम, केरल, तमिलनाडु, बंगाल में चुनाव सिर पर आ चुका है. कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के साथ एक साथ अपने कई धाकड़ों की ड्यूटी लगा दी है. एक ड्यूटी लगी है डीके शिवकुमार की भी.
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असम चुनाव के लिए कांग्रेस ने तीन सीनियर ऑब्जर्बर्स की जो टीम बनाई है उसमें डीके शिवकुमार को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. भूपेश बघेल और झारखंड के नेता बंधु तिर्की के साथ मिलकर डीके शिवकुमार ऑब्जर्बर बनाए गए हैं. प्रियंका गांधी की भी ड्यूटी लगी है असम में जो स्क्रीनिंग कमेटी को हेड कर रही है. कुल मिलाकर अप्रैल में चुनाव होने तक डीके प्रियंका गांधी, बघेल के साथ गौरव गोगोई को सीएम बनाने में जुटे रहेंगे. ये संभव है कि कर्नाटक में सीएम का फैसला इस साल के विधानसभा चुनावों के बाद हो. असम, केरल, तमिलनाडु में कांग्रेस के बेहतरीन संभावनाएं हैं. बस फंसा हुआ राज्य बंगाल है.
गौरव गोगोई ने अपने दम पर बढ़िया माहौल बना रखा है. प्रियंका और बघेल-डीके उन्हें पुश देने का काम करेंगे. भूपेश बघेल भी कांग्रेस के स्ट्रैटजिस्ट बनकर उभरे हैं लेकिन उन्होंने न तो अपनी सरकार बचाई, न कहीं सरकार बनवाई. डीके शिवकुमार का गुण ये है कि कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष होते हुए उन्होंने न केवल बीजेपी से झपटकर कांग्रेस को जिताया बल्कि मजबूती से सिद्धारमैया के साथ सरकार चला रहे हैं. गौरव गोगोई की लोकल अपील, प्रियंका गांधी का करिश्मा, डीके-बघेल की प्लानिंग स्ट्रैटजी-इसी से असम में कांग्रेस की जीत हो सकती है.
डीके को असम की जिम्मेदारी के कई मायने-मतलब निकल रहे हैं. एक ये कि चुनाव होने तक उन्होंने कर्नाटक की सरकार के साथ असम को संभालना पड़ेगा. मतलब फिलहाल सीएम को लेकर कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है. दूसरा मायने-मतलब ये कि डीके को एक टेस्ट में उतारा गया है जहां जीतने से उनका रुतबा पार्टी में बढ़ेगा. तीसरा-कहीं मन बहलाने के लिए तो उन्हें असम में नहीं लगाया गया है. सीएम सिद्धारमैया बढ़िया खेल रहे हैं. एक सीएम कुर्सी पकड़े बैठे हैं. अब तो उन्होंने देवराज उर्स का 2 हजार 792 दिनों का सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. ये मुकाम हासिल करते उन्होंने हुंकार भरी कि वो हैं और वही रहेंगे. हावेरी में सरकारी कार्यक्रमों में दो एक साथ दिखे तो डीके ने सिद्धारमैया का मुंह केक खिलाकर मीठा कराया. डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया को गुड लक भी बोला दिया.
फिर सिद्धारमैया ने जो बोला उसका एक इशारा ये है कि डीके सीएम की कुर्सी की ओर बढ़ते दिख रहे हैं. सिद्धारमैया जाने का काउंट डाउन कर रहे हैं. सिद्धारमैया ने कहा-मुझे पता नहीं मैं कब तक सत्ता में रहूंगा. राजनीति में बने रहने के लिए जनता का आशीर्वाद आवश्यक है. जनता के आशीर्वाद से ही मैं यहां तक पहुंचा हूं, पता नहीं कब तक राजनीति में रहूंगा. मैं यहां तक पहुंच चुका हूं और आगे भी बढ़ता रहूंगा. जब तक जनता का आशीर्वाद रहेगा, राजनीति में बना रहूंगा.
सिद्धारमैया ने कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सीएम रहने का रिकॉर्ड ऐसे वक्त बनाया है डीके के साथ पावर डायनामिक्स को लेकर संघर्ष तेज है. सीएम बदलने की चर्चा एकदम पीक पर है. आज कल परसों कभी सिद्धारमैया के पक्ष या विपक्ष में एलान हो सकता है. 2023 से ये चर्चा चल रही है कि ढाई-ढाई साल फॉर्मूले के साथ सिद्धारमैया बने थे. 20 नवंबर को सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो चुके हैं. अब डीके के ढाई साल के सीएम बनने की बारी है. सिद्धारमैया 5 साल तक सीएम रहने के दावे कई बार कर चुके. के एन रजन्ना जैसे समर्थक इतना तक बोल रहे हैं कि सिद्धारमैया के बिना कांग्रेस नहीं रहेगी. मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने जवाब में कह दिया कि पार्टी किसी एक से नहीं, कार्यकर्ताओं से चलती है.
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