शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे पर धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी, बताया क्यों छोड़ा पद

न्यूज तक डेस्क

• 08:38 AM • 09 Aug 2026

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार बयान दिया. उन्होंने कहा कि NEET विवाद के दौरान Gen Z को गुमराह करने की कोशिश हुई. प्रधान ने बताया कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफे की पेशकश की थी. ओडिशा में उन्होंने नवीन पटनायक पर युवाओं को विरोध में शामिल करने का आरोप भी लगाया.

dharmendra pradhan
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से रिजाइन देने के लगभग दो सप्ताह बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. ओडिशा की जीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NEET परीक्षा विवाद के समय देश के युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) को भ्रमित करने का प्रयास किया गया. उन्होंने साफ किया कि उनके लिए कोई भी पद किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से बड़ा नहीं है.

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'पीएम मोदी को खुद की थी इस्तीफे की पेशकश'

कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने बताया कि NEET मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था. उन्होंने पीएम के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया. प्रधान ने 25 जुलाई को मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. उन्होंने कहा कि देश में हर साल करोड़ों युवा सपने देखते हैं और भारत को 'विश्व गुरु' बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में युवाओं का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी था.

नवीन पटनायक और BJD पर साधा निशाना

रायराखोल में हुई एक अन्य बैठक के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और बीजेडी (BJD) पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि पटनायक पार्टी के युवाओं और छात्र कार्यकर्ताओं को उनके खिलाफ काले झंडे दिखाने और विरोध-प्रदर्शन करने के लिए उकसा रहे हैं.

हवाई अड्डे के पास BJD कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए 'धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ' के नारों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मैं एक किसान का बेटा हूं. आप चाहे जितनी बार मुझे वापस जाने को कहेंगे, मैं जनता की सेवा के लिए बार-बार लौटकर आऊंगा."

'कभी ऐसा काम नहीं करूंगा जिससे ओडिशा का नाम खराब हो'

धर्मेंद्र प्रधान ने जनसभा में उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या उन्होंने कभी कोई ऐसा कदम उठाया है जिससे राज्य की साख पर धब्बा लगे? इस पर वहां मौजूद भीड़ ने एक सुर में 'नहीं' कहकर उनका समर्थन किया. प्रधान ने कहा कि वह 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बने थे. उन्होंने आश्वस्त किया कि वे ऐसा कोई काम कभी नहीं करेंगे जिससे ओडिशा की जनता का सिर झुके.

दिलचस्प बात यह रही कि इस कार्यक्रम में मंच पर BJD के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रसन्न आचार्य भी उपस्थित थे. प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने आचार्य से राय लेने के बाद ही कार्यक्रम में शिरकत की थी.