Shesh Bharat: क्या कर्नाटक की राजनीति के रॉकस्टार डीके शिवकुमार ने रियल एस्टेट के खेल से अपनी तिजोरी भरी? क्या कनकपुरा के एक किसान का बेटा सिर्फ 20 साल में बिना किसी जादुई चिराग के 1400 करोड़ का मालिक बन गया? जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के सनसनीखेज आरोप ने देश की राजनीति में पावर ब्लास्ट कर दिया है. आरोप है कि डीके शिवकुमार के पास 4 करोड़ से 1400 करोड़ का सफर मेहनत का नहीं, बल्कि NICE रोड प्रोजेक्ट के महा-घपले का नतीजा है. कुमारस्वामी के आरोपों से डीके शिवकुमार की भारी-भरकम और हमेशा सबकी आंखों में चुभने वाली संपत्ति राजनीति के सेंटर में आई है. डीके शिवकुमार ने कुमारस्वामी के आरोपों को टालने की बजाय सीना ठोंककर जवाब दिया कि हां, मैं अमीर हूं, लेकिन मेरी दौलत नंबर एक की है.
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डीके शिवकुमार सीएम को अब बने हैं लेकिन कर्नाटक की राजनीति में पिछले 20-25 साल से टॉकिंग प्वॉइंट हैं. 2023 के चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सरकार बनने के बाद एक दिन नहीं जाता जब डीके शिवकुमार की चर्चा न होती हो. बहुत सारे लोगों के मन में ये सवाल होगा कि आखिर क्या है डीके की इस अकूत संपत्ति का राज? क्या वो वाकई सिर्फ अपनी बिजनेस सूझबूझ से अमीर बने या फिर सत्ता की आड़ में नक्शे बदलने से उनका वेल्थ बढ़ता गया.
डी.के. शिवकुमार 11 अक्टूबर 1999 से 20 मई 2004 तक कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री रहे थे. तब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी जिसके सीएम एस एम कृष्णा हुआ करते थे. कृष्णा की सरकार में ही डीके पहली बार मंत्री बने और शहरी विकास मंत्री बनाए गए. उस दौर की कहानी सुनाते हुए कुमारस्वामी ने आरोप लगाए कि बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर यानी नाइस प्रोजेक्ट में रियल एस्टेट घपला हुआ. नक्शे में फेरबदल करने डीके की संपत्ति में तूफानी रफ्तार आती गई.
एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि डीके ने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए नाइस रोड प्रोजेक्ट के मूल नक्शे, फ्रेमवर्क एग्रीमेंट और भूमि आवंटन योजना में बिना कैबिनेट मंजूरी के बड़े फेरबदल कराए. कुमारस्वामी का दावा है कि सुनियोजित बदलाव के जरिए शिवकुमार और उनके परिवार ने प्रोजेक्ट के लिए नोटिफाइड कीमती जमीनों को अपने नाम कराया, जिससे उनका निजी और व्यापारिक फायदा हुआ. कुमारस्वामी का आरोप है कि 2003 में 4 करोड़ की शिवकुमार की घोषित संपत्ति का 2023 तक 1400 करोड़ यानी करीब 350 गुना कैसे हो गई. ये कोई सामान्य व्यापारिक मुनाफा नहीं, बल्कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में किए गए भारी रियल एस्टेट घपले और भ्रष्टाचार की देन है.
कुमारस्वामी के आरोप पर डी.के. शिवकुमार बोलें
कुमारस्वामी के आरोपों पर डी.के. शिवकुमार ने सीना ठोककर दंभ भरा कि आज के मार्केट वैल्यू के हिसाब से मेरे पास 1400 करोड़ की संपत्ति है. लेकिन क्या देश में मुझे संपत्ति रखने का अधिकार नहीं है? मैंने ये सारी दौलत पूरी तरह से कानूनन अर्जित की है. शिवकुमार ने लॉजिक दिया कि पिछले 20 सालों में बेंगलुरु और उसके आसपास रियल एस्टेट की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया है, जिससे उनके पास मौजूद जमीनों की बाजार कीमत कई गुना बढ़ गई है. उन्होंने कुमारस्वामी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि उनकी पाई-पाई का ब्योरा इन्कम टैक्स विभाग और चुनाव आयोग के पास घोषित है. उन्होंने कुमारस्वामी के आरोपों को 'हताशा और राजनीतिक जलन' का नतीजा बताया और तंज कसा कि कांग्रेस सरकार की लोकप्रियता से घबराकर वे मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहे हैं.
ये पहली बार नहीं है जब 'कनकपुरा के रॉक स्टार की तिजोरी पर सवाल उठे हों. साल 2017 में जब उन्होंने गुजरात के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में ठहराया था, उसके बाद उन पर इनकम टैक्स की बड़ी रेड पड़ी थी. साल 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में ED ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था. साल 2017 में जब इनकम टैक्स ने दिल्ली में सफदरजंग वाले फ्लैट पर छापा मारा था, तब डायरियों में कई संदिग्ध कोडवर्ड मिले जिनकी पुष्टि नहीं हो सकी.
कनकपुरा के एक साधारण वोक्कालिगा किसान परिवार में जन्मे डी.के. शिवकुमार ने राजनीति की शुरुआत 1980 के दशक में NSUI के छात्र नेता के तौर पर की थी. राजनीति के साथ-साथ उन्होंने बेंगलुरु और उसके आसपास तेजी से पैर पसारते रियल एस्टेट और माइनिंग कारोबार में कदम रखा. जैसे-जैसे बेंगलुरु आईटी हब बना, जमीन की कीमतें आसमान छूने लगीं. शिवकुमार ने कनकपुरा, मैसूरु और बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदीं. उन्होंने कई बड़े इंस्टीट्यूट्स और 'ग्लोबल एकेडमी ऑफ टेक्नोलॉजी' जैसे कॉलेज खड़े किए. देखते ही देखते देश के सबसे नेताओं में शामिल हो गए हैं. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक डीके शिवकुमार इस समय देश के सबसे अमीर सीएम हैं. दूसरे नंबर पर 931 करोड़ के साथ चंद्रबाबू नायडू और तीसरे नंबर पर 648 करोड़ के साथ जोसेफ विजय हैं.
डीके के चुनावी हलफनामे बताते हैं कि उनकी संपत्ति बढ़ने की रफ्तार किसी सुपरफास्ट ट्रेन जैसी रही है. साल 2008 में उनकी घोषित संपत्ति करीब 75 करोड़ थी, जो 2013 में 251 करोड़, 2018 में 840 करोड़ और 2023 के चुनाव में 1,413 करोड़ को पार कर गई.
कोई दस्तावेज या सबूत नहीं
कुमारस्वामी ने जो आरोप लगाए हैं उसके सपोर्ट में उन्होंने कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किए लेकिन डीके का ये दावा सही हो सकता है कि जो भी संपत्ति है उसकी जानकारी चुनाव आयोग और इनकम टैक्स के पास है. शहरी विकास मंत्री के दौर पर किसी करप्शन केस में उनका नाम नहीं आया. ईडी और इनकम टैक्स ने जब उन पर दबिश डालकर आय से ज्यादा संपत्ति का केस बनाया तो उसमें भी उस दौर का जिक्र नहीं आया जिसका जिक्र कुमारस्वामी ने किया है.
CBI की एफआईआर के मुताबिक, डी.के. शिवकुमार पर आरोप लगा कि सिद्धारमैया सरकार में बिजली मंत्री रहते हुए उन्होंने 2013 से 2018 के बीच ज्ञात कानूनी आय के स्रोतों से 74.93 करोड़ से अधिक की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की थी. डीके के खिलाफ सरकारी जांच का शिकंजा उसी मामले से शुरू हुआ था. 2017 में इनकम टैक्स ने रेड डाली तो दिल्ली समेत कई ठिकानों से करोड़ों के कैश मिले थे. उसी आधार पर ईडी ने भी जांच की. डीके को जेल भी हुई जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची. डीके पर आरोप साबित नहीं हुए बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2024 में शिवकुमार के खिलाफ ED का दर्ज किया हुआ मनी लॉन्ड्रिंग का केस खारिज कर दिया. आय से अधिक संपत्ति का सीबीआई केस अभी भी खत्म नहीं हुआ है. डीके की मांग के बाद भी सीबीआई की एफआईआर रद्द नहीं हुई है. ये मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.
डीके के नाम जो 1400 करोड़ की संपत्ति है उसमें परिवार भी हिस्सेदार है. डीके की पत्नी उषा के नाम 112 करोड़ से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति घोषित है.शिवकुमार की बड़ी बेटी ऐश्वर्या भी महज 22-23 साल की उम्र में ही 108 करोड़ से अधिक की मालकिन बन चुकी थीं.
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