Tamilnadu: क्या BJP छोड़ रहे हैं 'सिंघम' अन्नामलाई? लीक हुआ सीक्रेट प्लान, इस नाम से शुरू कर सकते हैं नया आंदोलन

तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी छोड़ने और 'मक्कल शक्ति अयक्कम' नाम से नया आंदोलन शुरू करने के सीक्रेट प्लान का खुलासा हुआ है.

के. अन्नामलाई
के. अन्नामलाई

रूपक प्रियदर्शी

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अध्यक्ष बनते ही अन्नामलाई ने पारंपरिक और सुस्त पड़ी तमिलनाडु बीजेपी को एक 'आक्रामक चुनावी मशीन' में बदल दिया. उन्होंने सत्ताधारी पार्टी डीएमके (DMK) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला और उनके मंत्रियों के भ्रष्टाचार पर 'डीएमके फाइल्स' उजागर की. उनकी 'एन मन, एन मक्कल यानी मेरी भूमि, मेरे लोग पदयात्रा ने तमिलनाडु के कोने-कोने में बीजेपी का झंडा पहुंचा दिया. 2024 के लोकसभा चुनावों में भले ही बीजेपी सीटें नहीं जीत पाई, लेकिन अन्नामलाई की आक्रामक शैली के दम पर पार्टी का वोट शेयर करीब 11 परसेंट तक पहुंच गया, जो इतिहास में सबसे ज्यादा था. 

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अन्नामलाई की हैसियत कम होने लगी

वहीं उनसे कमी रह गई. पार्टी को कुछ वोट तो दिला पाए लेकिन सीट एक भी नहीं मिली. बीजेपी हाईकमान की नजर में यहीं से अन्नामलाई की हैसियत कम होने लगी. उन्होंने कई चुनाव लड़े लेकिन अपना ही चुनाव नहीं जीत पाए. 2021 के विधानसभा चुनाव में खुद अरावकुरिची सीट से चुनाव हार गए. 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने कोयंबटूर सीट से बेहद आक्रामक चुनाव लड़ा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके लिए कई रैलियां कीं, लेकिन हार गए.

जब कद बहुत तेजी से बढ़ता है, तो दुश्मन भी उतनी ही तेजी से पैदा होते हैं. अन्नामलाई की यही 'आक्रामक शैली' उनके लिए मुसीबत बन गई. आखिर कहां से खराब होने लगीं चीजें? आंतरिक कलह के चलते या पार्टी के अलायंस वाले कमिटमेंट के कारण अन्नामलाई के लिए बीजेपी में टिकना होने लगा मुश्किल?

तमिलनाडु द्रविड़ राजनीति के कब्जे में थे. उन्होंने बीजेपी को तीसरी द्रविड़ पार्टी बनाना मंजूर नहीं किया. हिंदुत्व एजेंडे पर तमिलनाडु में अपने पैरों पर बीजेपी को खड़ा करने में जुट गए. नहीं चाहते थे कि AIADMK की पिछलग्गू बने बीजेपी. इसी एजेंडे और मिशन के साथ अन्नामलाई ने द्रविड़ आइकन सी.एन. अन्नादुरई और जे. जयललिता पर तीखे हमले शुरू किए. इससे बीजेपी की पुरानी सहयोगी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) भड़क गई और 2023 में गठबंधन टूट गया. 

2026 चुनाव का टर्निंग पॉइंट तब बना जब 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आए, तो दिल्ली आलाकमान को समझ आया कि बिना एआईएडीएमके के गठबंधन के डीएमके को हराना नामुमकिन है. एआईएडीएमके ने दोबारा गठबंधन के लिए एक ही शर्त रखी- अन्नामलाई को रास्ते से हटाया जाए.

अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा

पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने गठबंधन की खातिर अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया. विधानसभा चुनावों में टिकट मिलना मुश्किल हो गया क्योंकि अलायंस के तहत उनकी सीट पलानीस्वामी ने अपनी पार्टी के लिए ले ली. उन्होंने जिले लेवल पर चुनाव का काम दिया गया जिसे उन्होंने लेने से मना कर दिया. लगातार अनदेखी से अन्नामलाई और उनके समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे.

बीजेपी हाईकमान के साथ दूरियों की एक बड़ी वजह तब सामने आई, जब उन्होंने CBSE की क्लास  9 के छात्रों के लिए समय से पहले लागू की जा रही Three-Language Policy की सार्वजनिक रूप से आलोचना की. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है. अन्नामलाई ने बीजेपी में रहते हुए भी तमिल अस्मिता और छात्रों के हितों का हवाला देकर केंद्र के इस फैसले का विरोध किया, जिसने दिल्ली नेतृत्व को चौंका दिया.

जब बीजेपी में उनके लिए रास्ते बंद दिखाई दे रहे हैं, तो अन्नामलाई ने अपना अलग रास्ता चुनने का मन बना लिया है. तमिलनाडु के मदुरै और अन्य शहरों में उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं. सूत्रों की मानें तो वह मक्कल शक्ति अय्यकम नाम से एक गैर-राजनीतिक सार्वजनिक मंच या एनजीओ के जरिए युवाओं की एक नई फौज तैयार कर रहे हैं, जो आगे चलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक दल का रूप ले सकती है. वह तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के अलावा एक तीसरा विकल्प बनना चाहते हैं, जहां उनका मुकाबला अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी (TVK) से होगा.

अन्नामलाई की संपत्ति करीब 1.5 करोड़ 

नेताओं की तुलना में उनकी कुल संपत्ति काफी सीमित और साधारण मानी जाती है. अन्नामलाई की कुल घोषित संपत्ति करीब 1.5 करोड़ रुपये है. उनकी अधिकांश अचल संपत्ति पैतृक है. हलफनामे के अनुसार, उनके पास उनके पैतृक गांव करूर में लगभग 52 एकड़ कृषि भूमि में अपनी हिस्सेदारी है. बैंक अकाउंट, शेयर बाजार ये सब मिलाकर 49 लाख है. हालांकि अन्नामलाई की पत्नी अखिला स्वामीनाथन वित्तीय रूप से काफी मजबूत हैं. उनके पास लगभग 2.3 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है.


अन्नामलाई फीनिक्स पक्षी जैसा माना जा रहा है जो हर बड़ी गिरावट के बाद एक नए रूप में उठ खड़ा होता है. बीजेपी छोड़ने और 'मक्कल शक्ति अय्यकम' आंदोलन शुरू करने की उनकी ये योजना उनके करियर का सबसे बड़ा जुआ मानी जा रही है. हालांकि राजनीति में कोई भी कदम आखिरी नहीं होता. 

तो ये है अन्नामलाई की पूरी कहानी- खाकी की हनक से लेकर खादी की चमक और अब बगावत की दहलीज़ तक. देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली में अमित शाह से होने वाली उनकी संभावित मुलाकात इस स्क्रिप्ट को बदल पाएगी, या फिर तमिलनाडु की धरती पर एक नए राजनीतिक दल का उदय होगा. अन्नामलाई की हर पल की हलचल के लिए बने रहिए हमारे साथ.

 

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