साउथ सिनेमा के 'मैन ऑफ मासेस' यानी जूनियर एनटीआर (Jr NTR) की राजनीति में एंट्री होने वाली है? क्या थलापति विजय के बाद अब टॉलीवुड का यह 'ग्लोबल टाइगर' भी अपनी नई राजनीतिक पार्टी का एलान करने जा रहा है? बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और आंध्र प्रदेश के सियासी गलियारों में यह सवाल आग की तरह फैल रहा था. वजह थी 'रॉ एनटीआर' (RAW NTR) नाम के एक अनऑफिशियल ग्रुप का वह सोशल मीडिया पोस्ट, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया. इस पोस्ट में दावा किया गया कि 18 जुलाई को तिरुपति में 'ऊरु वाडा' यानी गली-गली नाम का एक ऐसा महा-इवेंट होने जा रहा है, जो आंध्र प्रदेश की राजनीति का नक्शा बदल देगा. बस फिर क्या था, कयासों का बाजार गर्म हो गया कि जूनियर एनटीआर भी राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं.
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सुपरस्टार के ऑफिस ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
जब यह अफवाह राजनीतिक तूफान बनने लगी तो जूनियर एनटीआर के ऑफिस ने एक कड़ा बयान जारी कर इन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. फाइनल वॉर्निंग देते हुए कहा कि 'रॉ एनटीआर' नाम की संस्था या इस सोशल मीडिया कैंपेन से जूनियर एनटीआर का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. यह पूरी तरह से एक सोशल इनिशिएटिव और फैन-ड्रिवेन इवेंट है, जिसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है. सुपरस्टार के दफ्तर ने साफ कर दिया कि इस तरह की फर्जी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ उनका आधिकारिक फैन एसोसिएशन पुलिस में कानूनी शिकायत दर्ज कराने जा रहा है. यानी, फिलहाल राजनीति के लिए जूनियर एनटीआर का 'नो' बिल्कुल क्लियर है.
दादा एन. टी. रामा राव की राजनीतिक विरासत का असर
आखिर क्यों हर साल जूनियर एनटीआर के नाम के साथ ही राजनीति का पारा चढ़ जाता है? जवाब छिपा है उनकी रगों में दौड़ रहे खून और उनकी विरासत में. जूनियर एनटीआर कोई आम एक्टर नहीं हैं. वह आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, सिनेमा के भगवान और 'तेलुगु देशम पार्टी' (TDP) के संस्थापक एन. टी. रामा राव (NTR) के पोते हैं. उनके पिता नंदामुरी हरिकृष्णा भी राजनीति का बड़ा चेहरा रहे और आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू रिश्ते में उनके फूफा लगते हैं. 2009 के विधानसभा चुनावों में जब इस 26 साल के युवा स्टार ने टीडीपी के लिए प्रचार किया था तो उनके एक इशारे पर लाखों की भीड़ सड़कों पर आ जाती थी. उनका बोलने का अंदाज, भारी आवाज और तेवर बिल्कुल उनके दादा एनटीआर जैसे हैं, यही वजह है कि जनता आज भी उनमें आंध्र प्रदेश का अगला बड़ा राजनेता देखती है. हालांकि 2009 के बाद उन्होंने कभी खुद को चुनाव या राजनीति के करीब नहीं किया.
Jr NTR की ताकतवर 'फैन आर्मी' और 'ऊरु वाडा' कैंपेन
थलापति विजय को भी राजनीति में स्थापित करने के पीछे उनके फैन क्लब का सबसे बड़ा हाथ रहा. जूनियर एनटीआर का भी सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है उनकी 'फैन आर्मी'. उनके फैन क्लब किसी आम फैंस एसोसिएशन की तरह सिर्फ सिनेमाघरों में सीटी बजाने का काम नहीं करते, बल्कि वे एक बेहद अनुशासित सोशल ऑर्गेनाइजेशन की तरह काम करते हैं. पूरे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की हर एक गली में फैले ये क्लब 'ऊरु वाडा' (गली-गली) कैंपेन के तहत बड़े पैमाने पर चैरिटी, रक्तदान शिविर, मुफ्त मेडिकल कैंप और गरीबों को राशन बांटने का काम करते हैं. ये फैंस ग्राउंड लेवल पर इतने मजबूत और संगठित हैं कि किसी भी राजनीतिक दल के वोट बैंक को रातों-रात पलटने का दम रखते हैं. यही वजह है कि जब भी यह फैन आर्मी सड़कों पर कोई बड़ा सामाजिक काम करती है, तो सत्ता के गलियारों में बैठे नेताओं के पसीने छूट जाते हैं.
बचपन का नाम 'तारक' और दादा से मिला 'जूनियर एनटीआर' नाम
जूनियर एनटीआर के नाम के पीछे की कहानी बेहद फिल्मी और भावनाओं से भरी है. 20 मई 1983 को जन्मे इस सुपरस्टार का असली और बचपन का नाम केवल 'तारक' (Tarak) था. उनके पिता नंदामुरी हरिकृष्णा ने शालिनी भास्कर राव से दूसरी शादी की थी, जिसकी वजह से शुरुआत में तारक को नंदामुरी परिवार से वह पहचान नहीं मिली थी. कहानी में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब 1991 में तेलुगु सिनेमा के भगवान और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामा राव (NTR Sr.) अपनी फिल्म 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' की शूटिंग कर रहे थे. फिल्म के सेट पर दादा एनटीआर की मुलाकात पहली बार अपने 8 साल के पोते 'तारक' से हुई.
वे बच्चे की मासूमियत, तेज दिमाग और हाव-भाव से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने न सिर्फ उसे अपनी फिल्म में एक छोटा किरदार दिया, बल्कि सबके सामने एलान किया कि "आज से इसका नाम सिर्फ तारक नहीं, बल्कि मेरा नाम यानी 'नंदामुरी तारक रामा राव' होगा". दादा से मिले इस नाम और आशीर्वाद के बाद जब वे बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मों में आए, तो मीडिया और इंडस्ट्री के लोगों ने महान एनटीआर से उनकी पहचान अलग रखने के लिए उन्हें 'जूनियर एनटीआर' (Jr NTR) कहना शुरू कर दिया. आज भले ही वे पूरी दुनिया में 'मैन ऑफ मासेस जूनियर एनटीआर' के नाम से राज कर रहे हैं, लेकिन उनके करीबी दोस्त और चाहने वाले आज भी उन्हें उनके बचपन के नाम 'तारक' से ही पुकारते हैं.
नंदामुरी परिवार और टीडीपी की राजनीतिक कमान का सच
एन. टी. रामा राव ने आंध्र की राजनीति को दिशा दी इसलिए आज वह महान कहे जाते हैं, लेकिन सच यह है कि उनके बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटों या बेटियों ने नहीं, बल्कि दामाद चंद्रबाबू नायडू ने संभाली. 1995 में बड़े राजनीतिक तख्तापलट के बाद कमान चंद्रबाबू नायडू के हाथों में आ गई थी. चंद्रबाबू के बाद यह विरासत उनके बेटे नारा लोकेश संभालेंगे. एनटीआर के सगे बेटों में से केवल नंदामुरी बालकृष्णा (Nandamuri Balakrishna) सक्रिय राजनीति में सफल रहे हैं, जो टीडीपी से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. एनटीआर की बेटी दग्गुबाती पुरंदेश्वरी (Daggubati Purandeswari) ने अपनी राह अलग चुनते हुए बीजेपी का दामन थामा और केंद्रीय मंत्री भी रहीं. एनटीआर की बेटी और चंद्रबाबू नायडू की पत्नी भुवनेश्वरी हमेशा राजनीति से दूर रहीं.
दादा की वैचारिक विरासत के असली हकदार, फिर भी राजनीति से दूरी
जूनियर एनटीआर के पिता नंदामुरी हरिकृष्णा टीडीपी में हमेशा एक बागी सुर रहे और उनके निधन के बाद उनका परिवार सक्रिय राजनीति से दूर हो चुका है. आज भले ही चंद्रबाबू नायडू ने एनटीआर की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखकर उनकी विरासत को जीवित रखा है, लेकिन जूनियर एनटीआर की बेमिसाल लोकप्रियता और जनसैलाब को देखते हुए आम जनता और राजनीतिक विश्लेषक आज भी उन्हें ही सीनियर एनटीआर की 'असली वैचारिक और जन-आकर्षण वाली विरासत' का असली हकदार मानते हैं. हालांकि, जूनियर एनटीआर ने आज तक दादा की विरासत को संभालने की कोशिश नहीं की. रह-रहकर राजनीतिक चर्चाएं होती हैं, लेकिन वह हमेशा इससे किनारा कर लेते हैं.
चाइल्ड आर्टिस्ट से 'ग्लोबल सुपरस्टार' बनने का संघर्षमय सफर
जूनियर एनटीआर का सिनेमाई सफर किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है. दिग्गज एनटीआर के पोते होने के बावजूद, उन्हें इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने महज 8 साल की उम्र में 1991 में फिल्म 'ब्रह्मर्षि विश्वामित्र' से बतौर बाल कलाकार शुरुआत की और 1997 में 'रामायणम' में भगवान राम की भूमिका निभाकर नेशनल अवॉर्ड जीता. 2001 में फिल्म 'निन्नू चूडालानी' से बतौर लीड एक्टर डेब्यू करने वाले जूनियर एनटीआर को शुरुआती असफलताएं भी देखनी पड़ीं, लेकिन एसएस राजामौली की फिल्म 'स्टूडेंट नंबर 1' और एक्शन ड्रामा 'आदि' ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया.
2003 में आई फिल्म 'सिम्हाद्री' उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई और उन्हें 'मास हीरो' का टैग दिलाया. हालांकि, करियर के बीच में लगातार फ्लॉप फिल्मों के दौर ने उनके स्टारडम को हिला दिया था, जहां उनकी बॉडी शेमिंग तक की गई. लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने जबरदस्त फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन किया और 'टेम्पर', 'नान्नाकु प्रेमाथो' और 'जनता गैराज' जैसी लगातार हिट फिल्में देकर खुद को 'बॉक्स ऑफिस का सुल्तान' साबित किया. इसके बाद एसएस राजामौली की ऐतिहासिक फिल्म 'RRR' में 'कोमाराम भीम' के किरदार और उनके ऑस्कर विनर सॉन्ग 'नाटू नाटू' ने उन्हें एक ग्लोबल सुपरस्टार बना दिया. भारी आवाज, बेमिसाल डायलॉग डिलीवरी, बिजली जैसी फुर्तीली डांसिंग स्किल्स और आंखों से अभिनय करने की कला के दम पर आज वे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक बन चुके हैं.
100 करोड़ की आलीशान शादी और एक परफेक्ट फैमिली मैन
जूनियर एनटीआर की शादी और परिवार की कहानी किसी भव्य बॉलीवुड फिल्म जैसी ही खूबसूरत है. साल 2011 में जूनियर एनटीआर ने तेलुगु बिजनेसमैन और चंद्रबाबू नायडू के रिश्तेदार नार्ने श्रीनिवास राव की बेटी लक्ष्मी प्रणति (Lakshmi Pranathi) से शादी की. हालांकि यह एक पारंपरिक अरेंज मैरिज थी, लेकिन शादी के बाद दोनों की आपसी अंडरस्टैंडिंग और केमिस्ट्री ने इसे एक खूबसूरत लव स्टोरी में बदल दिया. दोनों की शादी भारतीय इतिहास की सबसे महंगी और आलीशान शादियों में गिनी जाती है, जिस पर करीब ₹100 करोड़ खर्च हुए थे. आज जूनियर एनटीआर अपनी पत्नी लक्ष्मी को अपनी सबसे बड़ी ताकत और 'होममेकर' के रूप में अपनी सफलता का पिलर मानते हैं. इस स्टार कपल के दो बेहद प्यारे बेटे हैं बड़ा बेटा अभय राम (Abhay Ram) और छोटा बेटा भार्गव राम (Bhargava Ram). जूनियर एनटीआर अपने बिजी शेड्यूल के बावजूद एक परफेक्ट 'फैमिली मैन' हैं, जो शूटिंग खत्म होते ही सारा वक्त अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बिताना पसंद करते हैं.
चंद्रबाबू नायडू और Jr NTR का अनोखा और दोहरा रिश्ता
चंद्रबाबू नायडू (N. Chandrababu Naidu) रिश्ते में जूनियर एनटीआर के फूफा और ससुर दोनों लगते हैं. पहला रिश्ता सीधा और खून का है. चंद्रबाबू नायडू ने जूनियर एनटीआर के दादा और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक स्वर्गीय एन. टी. रामा राव (NTR) की बेटी नारा भुवनेश्वरी से शादी की है. इस नाते चंद्रबाबू, जूनियर एनटीआर के पिता नंदामुरी हरिकृष्णा के सगे जीजा हैं, यानी रिश्ते में जूनियर एनटीआर के फूफा हैं और नारा लोकेश उनके कजिन भाई हैं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
इस रिश्ते में दूसरा बड़ा ट्विस्ट साल 2011 में आया, जब जूनियर एनटीआर की शादी हुई. उनकी पत्नी लक्ष्मी प्रणति, चंद्रबाबू नायडू की सगी बहन की नातिन हैं. लक्ष्मी की मां, चंद्रबाबू की भांजी हैं. इस तरह लक्ष्मी प्रणति के परिवार से चंद्रबाबू का सीधा रिश्ता है और खुद चंद्रबाबू नायडू ने ही बीच में पड़कर जूनियर एनटीआर और लक्ष्मी प्रणति का यह रिश्ता तय करवाया था. यही वजह है कि चंद्रबाबू नायडू न सिर्फ जूनियर एनटीआर के फूफा हैं, बल्कि उनके रिश्ते के दादा-ससुर भी लगते हैं.
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