Shesh Bharat: दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड और लुटियंस की गलियां... लेकिन सियासी पारा एकदम गरम है. वजह? राहुल गांधी के घर पहुंचीं डीएमके की सबसे भरोसेमंद चेहरा-कनिमोझी. ऊपर से देखने में ये एक शिष्टाचार भेंट लग सकती है, लेकिन राजनीति में कुछ भी यूं ही नहीं होता. कनिमोझी सिर्फ एक सांसद नहीं हैं, वो एम.के. स्टालिन का वो मैसेंजर हैं, जो सीधे राहुल गांधी की 'वेवलेंथ' पर बात करती हैं. राहुल गांधी, एम. करुणानिधि के प्रति अगाध सम्मान रखते थे. कनिमोझी उस विरासत की वारिस हैं. राहुल उन्हें केवल एक सहयोगी दल की सांसद नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की सदस्य मानते हैं जिसने दशकों तक कांग्रेस का साथ दिया है. 2026 के चुनावों के मद्देनजर, ये 'पर्सनल टच' ही है जो गठबंधन को मजबूत बनाएगा. दिल्ली में राहुल गांधी और कनिमोझी की अच्छी और शानदार पटती है.
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2026 में तमिलनाडु का रण सजना है. एक तरफ अभिनेता विजय अपनी नई पार्टी के साथ ताल ठोक रहे हैं, दूसरी तरफ बीजेपी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में है. ऐसे में राहुल और कनिमोझी की इस बंद कमरे की बातचीत से क्या निकला?
राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिली कनिमोझी
कनिमोझी DMK की डिप्टी महासचिव हैं. दिल्ली में DMK की फेस हैं और सीएम स्टालिन की बहन और राहुल गांधी की अच्छी दोस्तों में हैं. राहुल गांधी और एम जे स्टालिन की होने वाली मुलाकातों में कनिमोझी को देखा जाना नई बात नहीं है. नई बात तब हुई वो दिल्ली में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के घर 10 जनपथ में कार से उतरती देखी गईं. ये कोई पर्सनल मुलाकात नहीं थी. तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए अपने भाई पार्टी चीफ स्टालिन का मैसेज लेकर कनिमोझी राहुल गांधी से मिलने पहुंची थी. राहुल के घर कनिमोझी का देखा जाना चुनावों में कनिमोझी के बढ़ते कद की तस्वीर भी है और ये भी कि डीएमके-कांग्रेस के बीच आगे जो भी चुनावी बातचीत होगी वो कनिमोझी के जरिए होगी.
DMK में बढ़ी कनिमोझी की ताकत
राहुल गांधी और कनिमोझी की मुलाकात के बाद डीएमके के भीतर कनिमोझी का कद नेशनल स्ट्रैटजिस्ट के तौर पर और ऊंचा हो गया है. कनिमोझी डीएमके संसदीय दल की नेता हैं. पहली बार कनिमोझी सोलो ऐसे किसी डिस्कशन को लीड करती दिख रही हैं. कनिमोझी को 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए स्टालिन ने डीएमके की घोषणापत्र समिति का प्रमुख बनाया गया है. स्टालिन ने इलेक्शन स्ट्रैटजी के तहत पूरे तमिलनाडु को 7 जोन में बांटा है. 7 नेताओं को जिम्मेदारी मिली है. कनिमोझी को चेन्नई और दक्षिणी जिलों के लिए जोनल प्रभारी नियुक्त किया है. कम से कम 17 सीटों पर टिकट देने और इलेक्शन स्ट्रैटजी बनाने के लिए फ्री हैंड भी मिला है. ये सब पार्टी के अंदर बढ़ती ऑर्गनाइजेशन पावर का इशारा है.
एम के स्टालिन डीएमके और करुणानिधि का परिवार दोनों लीड कर रहे हैं. उनके सामने बड़ा चैलेंज है कि बेटे उदयनिधि स्टालिन और कनिमोझी के बीच संतुलन बिठाकर रहे हैं. उन्होंने उदयनिधि को डिप्टी सीएम और यूथ डीएमके का चार्ज दिया हुआ है. कनिमोझी के हिस्से में दिल्ली की राजनीति और महिला डीएमके है.
ट्रबलशूटर की भूमिका में कनिमोझी
जब भी कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे या बयानबाजी को लेकर खटास आती है, कनिमोझी ट्रबलशूटर की भूमिका निभाती हैं. कनिमोझी की दिल्ली में मौजूदगी का मतलब ये है कि एम.के. स्टालिन ने अपना सबसे भरोसेमंद मैसेंजर को भेजा है. राहुल गांधी के लिए अच्छा ये है कि कनिमोझी से खुलकर बात होने से उनका मैसेज सीधे स्टालिन तक बिना किसी 'फिल्टर' के पहुंचेगा. एम.के. स्टालिन और राहुल गांधी के बीच सीधा संवाद मुश्किल से होता है लेकिन कनिमोझी कम्युनिकेशन मैनेजर की भूमिका निभाती हैं. कनिमोझी के जरिए दिल्ली और चेन्नई के बीच 'स्मूथ' बातचीत होती रही है.
राजनैतिक और प्रोफेशनल रिश्ता
राहुल गांधी और कनिमोझी के बीच के संबंध शुद्ध रूप से राजनैतिक और प्रोफेशनल हैं, जो दशकों पुराने पारिवारिक और गठबंधन के रिश्तों पर आधारित हैं. कहानी दो बड़े राजनीतिक परिवारों की विरासत की है, एक तरफ नेहरू-गांधी परिवार और दूसरी तरफ एम. करुणानिधि का परिवार. इन दोनों परिवारों का रिश्ता इंदिरा गांधी और करुणानिधि के दौर से चला आ रहा है.
पारिवारिक बैकग्राउंड
स्टालिन और कनिमोझी के पिता तो करुणानिधि हैं लेकिन दोनों की मां अलग-अलग हैं. करुणानिधि की तीन शादियां पद्मावती अम्मल, दयालु अम्मल और रजती अम्मल से की. स्टालिन की मां दयालु अम्मल हैं. कनिमोझी की मां रजती अम्मल हैं. उनके सगे भाई एमके अलागिरी हैं जिनका भाई स्टालिन से इतना भयंकर विवाद हुआ कि पार्टी और परिवार से बाहर हो गए.
स्टालिन और कनिमोझी के बीच भाई-बहन का रिश्ता ठीक से निभता रहा. पिता करुणानिधि ने स्टालिन के बाद बेटी कनिमोझी को ही राजनीति में सेट किया. स्टालिन के दौर में भी कनिमोझी की स्थिति मजबूत बनी हुई है. ये जरूर है कि पहली बार बड़े चुनाव के लिए स्टालिन ने बहन को फ्रंटफुट पर लाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
40 मिनट हुई दोनों के बीच बातचीत
राहुल से 40 मिनट की मीटिंग के बाद कनिमोझी जिस रास्ते आई उसी रास्ते से वापस लौट गईं. उन्होंने कोई मीडिया बाइट नहीं. कांग्रेस ने भी इस मीटिंग पर कुछ नहीं कहा. कहा जा रहा है कि तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस अलायंस को लेकर ये फॉर्मल मीटिंग हुई. ये मीटिंग इसलिए अहम थी कि अरसे से ये कन्फ्यूजन चल रहा था कि कांग्रेस कहीं डीएमके को छोड़कर थलापति विजय के साथ तो नहीं चली जाएगी.
विजय को लेकर कन्फ्यूजन खत्म
कुछ दिन पहले तमिलनाडु कांग्रेस की दिल्ली में हुई बैठक में राहुल ने साफ कर दिया था कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है. डीएमके-कांग्रेस मिलकर ही लड़ेंगे. एक और मुद्दा है जिसकी चर्चा है कि अगर चुनाव बाद फिर सरकार बनी तो कांग्रेस पावर शेयरिंग करेगी या नहीं. डीएमके-कांग्रेस मिलकर लड़ते जरूर हैं लेकिन कांग्रेस के विधायक मंत्री नहीं बनते. बाहरी सपोर्ट ही चलता है. सुनने में आ रहा है कि राहुल गांधी इस बात को लेकर उतने सीरियस नहीं है कि कांग्रेस को पावर शेयरिंग का मौका मिले ही. डीएमके की ओर से ये इशारा है कि पहले के मुकाबले कांग्रेस को ज्यादा सीटें लड़ने के लिए मिल सकती है.
सीटों के बंटवारे पर फंसा है पेंच?
तमिलनाडु कांग्रेस नेताओं की ये शिकायत है कि शानदार स्ट्राइक के बाद भी विधानसभा में कांग्रेस को मिलने वाली सीटें लगातार घट रही हैं. 2011 के चुनाव कांग्रेस 63 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. केवल 5 जीत पाई थी. उसके बाद से कांग्रेस को डीएमके से मिलने वाली सीटें लगातार घटती रहीं. 2016 में कांग्रेस की सीटें घटकर 41 रह गईं और जीत भी केवल 8 पर मिली. 2021 में केवल 25 सीटें मिली लेकिन कांग्रेस ने बढ़िया करते हुए 18 सीटें जीत ली.
कांग्रेस का स्ट्राइक रेट शानदार रहा
2019 और 2024 के चुनावों में भी कांग्रेस का स्ट्राइक रेट शानदार रहा इसलिए अब ज्यादा सीटों की मांग हो रही है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने 35 सीटों की मांग रखी है जिस पर फाइनल फैसला बाकी है. चुनावी स्ट्रैटजी पर अगली चर्चा 3-4 फरवरी को चेन्नई में हो सकती है. कांग्रेस से केसी वेणुगोपाल जाएंगे. डीएमके की ओर से स्टालिन की बनाई कमेटी बात करेगी. कांग्रेस ने 1967 के बाद से कभी सत्ता में नहीं आई. अब स्थिति ये है कि कांग्रेस डीएमके पर निर्भर हो गई है. साथ लड़े तो कम पर लड़ना पड़ेगा. अकेले लड़ने पर और ज्यादा नुकसान की आशंका है.
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