पार्टियां तोड़ने के लिए बीजेपी पर जो खेल पूरे देश में खेलने का आरोप लगता रहा है, वैसे ही खेल से कर्नाटक में उसकी पार्टी में रोज धमाके हो रहे हैं. कर्नाटक से ही बीजेपी के दल-बदल का 'ऑपरेशन कमल' शुरू हुआ था. आज हालात ऐसे बदल गए हैं कि ऑपरेशन कमल रिवर्स मोड में चल रहा है. ऑपरेशन कमल पर भारी पड़ रहा है कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का 'ऑपरेशन हस्त'.
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क्या है डीके शिवकुमार का 'ऑपरेशन हस्त'?
ऑपरेशन हस्त बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' या कमल के जवाब में कांग्रेस द्वारा चलाई गई एक गुप्त राजनीतिक रणनीति है. इसके तहत बीजेपी और जेडीएस के असंतुष्ट विधायकों और बड़े नेताओं को तोड़कर कांग्रेस में शामिल कराया जाता है या चुनाव में उनसे क्रॉस-वोटिंग कराई जाती है. इस पूरे ऑपरेशन के रणनीतिकार और 'किंगमेकर' उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (DK) हैं. उन्हें विधायकों को साधने और विपक्ष के खेमे में सेंध लगाने का माहिर खिलाड़ी माना जाता है.
MLC चुनाव में गद्दारी से हिला सियासी गलियारा
MLC चुनाव में ऑपरेशन हस्त का इतना बड़ा धमाका हुआ कि बीजेपी पस्त हो गई. एक चुनाव, 11 गद्दार और अब नार्को टेस्ट की मांग से बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक का सियासी गलियारा हिला हुआ है! MLC चुनावों में हुई क्रॉस-वोटिंग से जेडीएस के उम्मीदवार की हार हुई और कांग्रेस को एक एक्स्ट्रा सीट मिल गई.
63 विधायकों पर शक और मंदिर में कसम का आइडिया
खुलासा हुआ कि बीजेपी के 11 विधायकों ने कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताने के लिए क्रॉस-वोटिंग कर दी. वो 11 गद्दार विधायक कौन हैं, ये पता लगाने के लिए बीजेपी ने एसआईटी (SIT) बनाई है लेकिन किसी का नाम सामने नहीं आ रहा है. कर्नाटक बीजेपी के सारे 63 विधायक शक के घेरे में हैं. गद्दारों का पता लगाने के लिए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आइडिया दिया था कि सारे 63 विधायकों को धर्मस्थल के प्रसिद्ध मंजुनाथ स्वामी मंदिर ले जाकर शपथ दिलाएंगे, लेकिन बहुत ज्यादा विरोध और हाईकमान के कहने पर विजयेंद्र इस आइडिया पर आगे नहीं बढ़ पाए.
BJP विधायक एच.के. सुरेश की मंदिर में सत्य की परीक्षा
कर्नाटक की सियासत में इन दिनों भगवान, भक्ति और राजनीति का ऐसा कॉकटेल देखने को मिल रहा है जिसने सबको हैरान कर दिया है. बेलूर से बीजेपी विधायक एच.के. सुरेश ने बड़ा धमाका करके राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया. बेलूर के विधायक ने पहले बेलूर के ऐतिहासिक चेन्नाकेशव मंदिर और बाद में धर्मस्थल के श्री मंजुनाथेश्वर मंदिर जाकर सत्य की परीक्षा दी. सुरेश अपने 300 से अधिक समर्थकों के साथ गाड़ियों के काफिले में सीधे मंजुनाथ स्वामी मंदिर, धर्मस्थल पहुंचे. वहां उन्होंने पुरोहितों के कहे अनुसार मंदिर के 'बलिपीठ' को दोनों हाथों से छुआ और भगवान के सामने तीन बार कसम खाई कि उन्होंने न तो दल-बदल किया है और न ही बीजेपी के साथ विश्वासघात किया है.
विधायक सुरेश की मांग: सभी 63 विधायकों का हो नार्को टेस्ट
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, मंदिर से निकलते ही सुरेश ने अपनी ही पार्टी से मांग कर दी कि सच सामने लाने के लिए बीजेपी के सभी 63 विधायकों का 'सीक्रेट नार्को टेस्ट' कराया जाए और इस टेस्ट के लिए सबसे पहले वे खुद को पेश करने के लिए तैयार हैं. नार्को टेस्ट मतलब झूठ पकड़ने का टेस्ट.
कैसे हुआ MLC चुनाव में यह बड़ा खेल?
इस पूरे ड्रामे की जड़ें 18 जून को हुए कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के चुनावों से जुड़ी हैं. इन सात सीटों के चुनाव में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को 4 सीटें मिलनी तय थीं, जबकि बीजेपी-जेडीएस गठबंधन को 3 सीटें मिलनी थीं. लेकिन जब नतीजे आए तो कांग्रेस ने सबको चौंकाते हुए 5 सीटें जीत लीं. कांग्रेस को उम्मीद से 11 वोट ज्यादा मिले! यानी बीजेपी और जेडीएस खेमे के करीब एक दर्जन विधायकों ने बिककर या बगावत करके कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दी. इस गद्दारी से जेडीएस का उम्मीदवार बुरी तरह हार गया और तब से ही बीजेपी के अंदर "गद्दार कौन?" की तलाश में एक-दूसरे पर शक की सुइयां घूम रही हैं.
डीके शिवकुमार का मास्टरस्ट्रोक और बीजेपी में आंतरिक कलह
कर्नाटक की राजनीति में इस महा-उलटफेर के पीछे सीधे तौर पर कांग्रेस के संकटमोचक और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार का दिमाग माना जा रहा है. डीके शिवकुमार ने ऐसा अदृश्य जाल बुना कि बीजेपी और जेडीएस गठबंधन को भनक तक नहीं लगी और उनके विधायक टूटकर कांग्रेस के पाले में वोट डाल आए. डीके के इस मास्टरस्ट्रोक ने पूरी बीजेपी को आत्ममंथन और आंतरिक कलह की आग में झोंक दिया है. डीके शिवकुमार के इस 'वोट खेल' ने बीजेपी के भीतर अविश्वास का ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि अब विधायक खुद को वफादार साबित करने के लिए मंदिरों में कसमें खा रहे हैं और नार्को टेस्ट की गुहार लगा रहे हैं.
प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र पर लगे गंभीर आरोप
बीजेपी के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र पर अलग आरोप लगने लगे कि उन्होंने ही डीके के साथ एडजस्टमेंट पॉलिटिक्स (समझौते की राजनीति) की. उनकी ढीली कमान की वजह से बीजेपी विधायकों ने बिना किसी डर के कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दी और विजयेंद्र इसे रोक नहीं पाए. विरोधी गुट लंबे समय से उन्हें हटाने की मांग कर रहा है. MLC कांड से ये मामला और बढ़ गया. विजयेंद्र जब अपने विधायकों को मंजुनाथ स्वामी मंदिर नहीं ले जा सके, तो खुद जाकर कसम खाई कि मेरा डीके शिवकुमार से न तो कोई बिजनेस संबंध है और न ही कोई व्यक्तिगत रिश्ता.
कौन हैं बेलूर के हाई-प्रोफाइल विधायक एच.के. सुरेश?
विवाद तो पहले से पीक पर था, एच.के. सुरेश ने खुद मंदिर में सत्य की परीक्षा देकर बाकी बीजेपी विधायकों पर प्रेशर बना दिया है. सुरेश कर्नाटक के हसन जिले की हाई-प्रोफाइल बेलूर विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक हैं. 1971 में जन्मे सुरेश पेशे से एक सफल बिजनेसमैन और किसान हैं. उन्होंने साल 1991 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी की थी. वह राजनीतिक रूप से बेहद मजबूत और आर्थिक रूप से बेहद संपन्न नेताओं में गिने जाते हैं. रुतबा ऐसा कि 2023 के चुनाव में उनके लिए प्रचार करने खुद पीएम मोदी आए थे.
RSS से जुड़ाव और क्रॉस वोटिंग की अफवाहों का खंडन
एच.के. सुरेश लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार से जुड़े रहे हैं और कट्टर हिंदुत्व की राजनीति का चेहरा माने जाते हैं. उन्होंने 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन तब उन्हें जेडीएस उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने हार नहीं मानी और 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में शानदार वापसी करते हुए कांग्रेस के बी. शिवरामु को 7,736 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार बेलूर सीट से विधायक चुने गए. क्रॉस-वोटिंग का तूफान उठा तो राजनीतिक गलियारों में इस बात की अफवाह उड़ने लगी कि पार्टी से बगावत करने वाले गद्दारों में बेलूर के विधायक एच.के. सुरेश भी शामिल हैं. इस आरोप से आहत होकर सुरेश ने 19 जून को बी.वाई. विजयेंद्र और बीजेपी हाईकमान को पत्र लिखकर सफाई दी कि उन्होंने क्रॉस-वोटिंग नहीं की. उन्होंने कहा कि आरोप उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से रची गई राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं.
सीटी रवि की गुप्त रिपोर्ट ने बढ़ाया सस्पेंस
नया कांड ये है कि बीजेपी MLC सीटी रवि ने 27 जून को बी.वाई. विजयेंद्र को क्रॉस-वोटिंग पर जो फैक्ट फाइंडिंग (तथ्य अन्वेषण) जांच रिपोर्ट सौंपी, उसमें उन्होंने दावा किया कि एनडीए से क्रॉस-वोटों की संख्या 11 के बजाय 12 हो सकती है.
कर्नाटक का सियासी विवाद अब दिल्ली दरबार में
कर्नाटक से निकलकर ये मामला दिल्ली पहुंच चुका है. इस मामले की पूरी कमान अब खुद नितिन नबीन ने अपने हाथों में ले ली है. कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक को दिल्ली तलब किया जा चुका है. पार्टी मान रही है कि जिन विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया है, उन्हें पहले से पता था कि 2028 के अगले विधानसभा चुनाव में उनका टिकट कटने वाला है, इसलिए वे पहले ही कांग्रेस के साथ 'डील' कर चुके हैं. दावों के मुताबिक ऐसे विधायकों में एच.के. सुरेश जैसे नेता हैं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं है; लेकिन मंदिर में कसमें खाकर उन्होंने खुद को पाक-साफ बताने की पूरी कोशिश की है.
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