कर्नाटक की सियासत में वादे और दावे तो कई देखे गए, लेकिन आत्मसम्मान की एक ऐसी जिद जिसने आखिरकार सूबे की राजनीति का भूगोल बदल दिया, उसकी मिसाल कम ही मिलती है. यह कहानी है कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार यानी डीके शिवकुमार की. उनके चेहरे पर दिखने वाली सफेद-काली (सॉल्ट एंड पेपर) दाढ़ी कोई स्टाइल स्टेटमेंट या फैशन नहीं थी, बल्कि दिल्ली की तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे खाई गई एक ऐसी राजनीतिक कसम थी, जो 3 जून 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही पूरी हो गई.
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साल 2019 से पहले, कांग्रेस के कद्दावर नेता और संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार अमूमन क्लीन-शेव लुक में ही नजर आते थे. लेकिन सितंबर 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के आरोपों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. उन्हें करीब 50 दिन दिल्ली की तिहाड़ जेल की कोठरी नंबर-7 में गुजारने पड़े. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी जेल में रहते हुए उन्होंने अपने आत्मसम्मान को लगी ठेस का जवाब देने के लिए एक बड़ी प्रतिज्ञा ली. उन्होंने खुद से वादा किया कि जब तक वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठ जाते, तब तक अपने चेहरे पर रेजर नहीं चलाएंगे.
जेल से बाहर आए तो हैरान रह गए लोग
जब 23 अक्टूबर 2019 को डीके शिवकुमार जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आए, तो उनका लुक पूरी तरह बदल चुका था. उनके चेहरे पर घनी, सफेद-काली दाढ़ी थी, जिसे फैशन की दुनिया में 'सॉल्ट एंड पेपर' या ग्रे लुक कहा जाता है. राजनीति के गलियारों में यह दाढ़ी उनके कड़े संघर्ष और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ उनकी ताकत का प्रतीक बन गई. कनकपुरा और रामनगर जैसे इलाकों में उनकी यह कसम इस कदर लोकप्रिय हुई कि उनके वफादार समर्थकों ने भी एकजुटता दिखाने के लिए दाढ़ी बढ़ा ली थी.
राहुल गांधी ने भी दी थी दाढ़ी बनाए रखने की सलाह
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी डीके शिवकुमार को अपना यह दाढ़ी वाला लुक बनाए रखने का सुझाव दिया था. उनका मानना था कि यह लुक जनता के बीच एक ऐसे विद्रोही और मजबूत नेता की छवि पेश करता है, जिसने बड़े सियासी तूफान का डटकर मुकाबला किया है. दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी ने खुद भी अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान ऐसा ही सॉल्ट एंड पेपर लुक रखा था.
डिप्टी सीएम बनने पर भी नहीं डिगी कसम
साल 2023 के कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला और इसका श्रेय प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते डीके शिवकुमार को गया. हालांकि, हाईकमान के फैसले के बाद सिद्धारमैया को सीएम बनाया गया और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा. उस वक्त जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या अब वे दाढ़ी कटवाएंगे, तो उन्होंने बेहद संजीदगी से कहा था, "नहीं, अभी सही वक्त नहीं आया है." उन्होंने सत्ता के नजदीक पहुंचकर भी अपनी कसम नहीं तोड़ी और पत्रकारों से मुस्कुराते हुए कहा कि धैर्य ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.
अमीरी, अध्यात्म और 7 साल लंबा सियासी सफर
करीब 1,413 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक और आलीशान लाइफस्टाइल पसंद करने वाले डीके शिवकुमार के चेहरे की यह रफ दाढ़ी उनके एक जमीनी और जुझारू नेता होने का अहसास कराती थी. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बेहद धार्मिक स्वभाव के डीके शिवकुमार ने अपने ज्योतिषी सलाहकार द्वारकानाथ की सलाह पर इस सियासी जिद में आध्यात्मिक मन्नत को भी जोड़ा था.
मुकम्मल हुआ संकल्प
साल 2026 में कर्नाटक की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली. सिद्धारमैया के पद छोड़ने के बाद कांग्रेस आलाकमान और विधायक दल ने सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार को नेता चुना. 3 जून 2026 को शाम 4:05 बजे के शुभ मुहूर्त पर जैसे ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उनका 7 साल लंबा यह कठिन संकल्प पूरा हो गया. अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि क्या कर्नाटक के नए कप्तान अब अपने पुराने क्लीन शेव लुक में लौटेंगे या इस सियासी पहचान को बरकरार रखेंगे.
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