Shesh Bharat: कर्नाटक में कांग्रेस क्यों शुरू कर रही भारत जोड़ो 2 यात्रा? येदियुरप्पा के गढ़ में क्यों घुस रहे DK शिवकुमार?

रूपक प्रियदर्शी

• 10:00 AM • 30 Sep 2026

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में 38 साल से चले आ रहे सरकार बदलने के रिवाज को तोड़ने और 2028 तक अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 'भारत जोड़ो यात्रा 2.0' का आगाज किया है.

भारत जोड़ा यात्रा 2.0
भारत जोड़ा यात्रा 2.0
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही डीके शिवकुमार ने ये साफ कर दिया कि वो दिल्ली हाईकमान को दिया अपना वादा नहीं भूले हैं. ये चर्चा तो रही है कि 2023 में कांग्रेस को सरकार बनाने लायक लाने के इनाम के तौर पर ही 2026 में लंबे इंतजार के बाद उन्हें सीएम का पद मिला. वो भी इस शर्त के साथ 2028 में ही उन्हें ही करिश्मा करना होगा. अभी तो डीके शिवकुमार केवल 2 साल या किसी छोटे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं लेकिन उनके इरादे भी होंगे कि लंबे समय तक कर्नाटक पर राज करना. मुख्यमंत्री बनते ही डीके ने 30 सितंबर से राज्य में 'भारत जोड़ो यात्रा 2.0' का बिगुल फूंक दिया है ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर इतना मजबूत कर दिया जाए कि हाईकमान के सामने 2028 और उसके बाद भी मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कोई विकल्प ही न बचे!

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर शुरू हो रही कर्नाटक कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा 2 किसी शौक के कारण नहीं हुई है. ये कांग्रेस की जरूरत भी है. इस तैयारी की नींव साल 2023 में ही पड़ गई थी. 2023 में जिन 84 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस हार गई थी, वहां  84 दिन की पदयात्रा चलेगी. 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में डीके शिवकुमार के चुनावी मैनेजमेंट की बदौलत कांग्रेस ने 134 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की थी. बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने के बाद निर्दलीय विधायकों के समर्थन से विधानसभा में कांग्रेस की प्रभावी ताकत 140 तक पहुंच गई थी. इस ऐतिहासिक जीत ने ही डीके शिवकुमार को राज्य की राजनीति का निर्विवाद 'बाहुबली' और संकटमोचक साबित किया था.

30 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी कि राहुल भी भारत जोड़ो यात्रा लेकर इसी दिन कर्नाटक आए थे. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के मुताबिक, 'भारत जोड़ो 2.0' का  शंखनाद 30 सितंबर को दोपहर 1 बजे शिवमोगा के शिकारीपुरा से होगा. हर दिन यह पदयात्रा दोपहर में शुरू होगी और शाम को एक बड़ी जनसभा (के साथ खत्म होगी. शिकारिपुरा में पहली मेगा लॉन्चिंग के बाद, 4 अक्टूबर से यात्रा राज्य के अन्य सभी 83 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ रफ्तार पकड़ेगी. कार्यक्रम की रणनीति इतनी सटीक है कि राहुल गांधी की पहली यात्रा जिन 11 जिलों से गुजरी थी, उन्हें छोड़कर इस बार बाकी बचे 29 जिलों की उन सभी 84 सीटों को टारगेट किया गया है जहां कांग्रेस चुनाव हार गई थी. दोपहर की धूप में पसीना बहाने और शाम को जनसभाओं से माहौल गरमाने का कांग्रेस का यह रूटीन अगले 84 दिनों तक कर्नाटक में भूचाल लाने वाला है!

डीके शिवकुमार के लिए एक और बड़ा लिटमस टेस्ट 

विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आया साल 2024 का लोकसभा चुनाव, जो डीके शिवकुमार के लिए एक और बड़ा लिटमस टेस्ट था. 2019 के लोकसभा चुनाव में जहां कांग्रेस पूरे कर्नाटक में महज 1 सीट पर सिमट गई थी लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त छलांग लगाते हुए अपनी सीटों की संख्या 1 से बढ़ाकर 9 कर दी. 2023 के मुकाबले ये नंबर बहुत जोशीला नहीं माना गया. लोकसभा चुनाव से बस इतना साबित हुआ कि कर्नाटक में कांग्रेस का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है.

साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस ने सरकार बना ली, लेकिन 84 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. डीके शिवकुमार का गेम प्लान बिल्कुल साफ है- अपनी जीती हुई सीटों को सुरक्षित रखो और इन 84 कमजोर कड़ियों पर 84 दिनों तक लगातार पसीना बहाकर बीजेपी-जेडीएस के वोट बैंक को पूरी तरह ध्वस्त कर दो. इस 'मिशन 84' की सबसे आक्रामक शुरुआत शिवमोगा जिले की शिकारिपुरा सीट से हो रही है, जो कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र का विधानसभा क्षेत्र और पूर्व सीएम बी.एस. येदियुरप्पा का सबसे मजबूत किला है. रणनीति यह है कि दुश्मन के घर में घुसकर उसकी कमियों को उजागर किया जाए और जमीन पर ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जाए कि साल 2028 के फाइनल दंगल से पहले इन हारी हुई सीटों पर कांग्रेस का झंडा पूरी मजबूती से बुलंद हो सके!

डीके शिवकुमार के लिए पहला टेस्ट होने जा रहा है दिसंबर में जब कर्नाटक में निकाय चुनाव होंगे. वो 2028 और 2029 के चुनावों से पहले निकाय चुनावों में कांग्रेस की जीत ही डीके का काबिलियत का पहला इम्तिहान होने वाला है. कर्नाटक में बड़े पैमाने पर शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनाव अगस्त 2018 और मई 2019 में हुए थे, जिसके बाद दिसंबर 2021 में भी 58 स्थानीय निकायों के चुनाव कराए गए. 2018 के चुनावों में कांग्रेस 982 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि बीजेपी 929 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर बेहद करीब रही थी. 

लोकसभा चुनाव में बीजेपी की एकतरफा लहर

मई 2019 के चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक चमत्कार हुआ; लोकसभा चुनाव में बीजेपी की एकतरफा लहर के ठीक एक हफ्ते बाद हुए इन स्थानीय चुनावों में कांग्रेस ने बैलेट पेपर की बदौलत 509 सीटें जीतकर शानदार वापसी की थी, जबकि बीजेपी महज़ 366 सीटों पर सिमट गई थी. यही ट्रेंड दिसंबर 2021 में भी जारी रहा, जब 1,184 वार्डों के दंगल में कांग्रेस ने 501 सीटें जीतकर बीजेपी (433 सीटें) को पछाड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की थी. इन सभी चुनावों में क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस (JD-S) तीसरे नंबर पर सिमट कर रह गई थी. इन पुराने रिकॉर्ड्स से साफ है कि लोकल स्तर पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा है, और डीके शिवकुमार इस बार भी इसी जीत के सिलसिले को बरकरार रखने के लिए अपनी पूरी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रहे हैं!

सबसे दिलचस्प पहलू कर्नाटक का वो कड़वा चुनावी इतिहास है, जो हर सत्ताधारी पार्टी को डराता है. कर्नाटक में पिछले 38 सालों से यह एक अटूट परंपरा रही है कि यहां हर 5 साल में जनता सरकार बदल देती है. साल 1985 में रामकृष्ण हेगड़े की सरकार के बाद से आज तक कोई भी पार्टी कर्नाटक में लगातार दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाई है. हर 5 साल में रिवाज बदलने के इसी 'शाप' को तोड़ने और इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पलटने के लिए डीके शिवकुमार अभी से दिन-रात एक करने में जुट गए हैं.

2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में डीके शिवकुमार के बेजोड़ सांगठनिक नेतृत्व के दम पर ही कांग्रेस ने 135 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था और बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था. उस चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी की एंटी-इन्कंबेंसी का पूरा फायदा उठाया था. डीके शिवकुमार बहुत अच्छे से जानते हैं कि जो चाबुक उन्होंने 2023 में बीजेपी पर चलाया था, वही चाबुक 2028 में उन पर भी चल सकता है, इसलिए वो अभी से चौकन्ने हैं.

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