Shesh Bharat: कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की आहट, DK की दिल्ली मीटिंग से बढ़ा सस्पेंस, एक बयान से गरमाई राजनीति

रूपक प्रियदर्शी

• 09:03 AM • 13 Feb 2026

Karnataka Politics: कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान तेज हो गई है. डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की दिल्ली में सोनिया और राहुल गांधी के साथ हुई 45 मिनट की गुप्त मुलाकात ने नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट बढ़ा दी है.

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Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इस पूरे सियासी ड्रामे के केंद्र में हैं राज्य के ट्रबलशूटर कहे जाने वाले डीके शिवकुमार, जिनकी दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई एक मुलाकात ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है.

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10 जनपथ पर 45 मिनट का सस्पेंस

बेंगलुरु में जब बजट की तैयारियां जोरों पर थीं, तब अचानक डीके शिवकुमार का दिल्ली पहुंचना सबको चौंका गया. उन्होंने दिल्ली के '10 जनपथ' में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा की. दिलचस्प बात यह है कि इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दिल्ली में मौजूद नहीं थे. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को असम चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन गलियारों में चर्चा 'ढाई-ढाई साल' वाले उस कथित फॉर्मूले की है, जिसके तहत अब सत्ता परिवर्तन का समय आ गया है.

'मैं यहां हवा खाने नहीं आया'

मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत में डीके शिवकुमार ने कहा, "मैं यहां राजनीति करने आया हूं, दिल्ली की हवा खाने नहीं." जब उनसे मुख्यमंत्री बनने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा - "Time will answer." यही बयान सोशल मीडिया पर तूफान बन गया.

कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चले आ रहे कथित "ढाई-ढाई साल" के फॉर्मूले की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि मार्च में बजट के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है. डीके शिवकुमार और सोनिया गांधी के बीच पुरानी राजनीतिक केमिस्ट्री भी इस चर्चा को बल दे रही है.

बढ़ती दूरियां और विपक्ष का तंज

एक तरफ शिवकुमार के भाई डीके सुरेश के बयान कि "सिद्धारमैया अपना वादा निभाएंगे" ने आग में घी डालने का काम किया है तो दूसरी तरफ सिद्धारमैया खेमे में सन्नाटा पसरा है. मुख्यमंत्री खुद इन सवालों से बचते नजर आ रहे हैं और गेंद आलाकमान के पाले में डाल दी है.

इस बीच, बीजेपी और जेडीएस ने कांग्रेस की इस आपसी कलह पर चुटकी लेना शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया पर 'कांग्रेस सर्कस' जैसे हैशटैग चलाकर विपक्ष तंज कस रहा है कि जनता की समस्याओं को छोड़कर कांग्रेस नेता कुर्सी की लड़ाई में मशगूल हैं.

अब सबकी नजरें मार्च के बजट सत्र पर टिकी हैं. क्या यह सिद्धारमैया का आखिरी बजट होगा? शिवकुमार की रहस्यमयी मुस्कान तो इसी ओर इशारा कर रही है कि कर्नाटक की सत्ता का नक्शा जल्द ही बदल सकता है.