Shesh Bharat: चुनावी फंड से नेताओं ने खरीदी कारें और चुकाए पुराने लोन? केरल बीजेपी में 80 करोड़ के हेरफेर पर मचा बवाल

रूपक प्रियदर्शी

• 10:00 AM • 15 Jul 2026

केरल विधानसभा चुनाव में 3 सीटें जीतकर इतिहास रचने वाली बीजेपी के अंदर 400 करोड़ रुपये के चुनावी बजट में से 80 करोड़ रुपये के महा-घोटाले का विस्फोट हुआ है. नेताओं द्वारा फर्जी बिल, 'घोस्ट कार' और हेलीकॉप्टर बुकिंग के जरिए कमीशनखोरी का आरोप है। प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस पर आंतरिक जांच बिठा दी है.

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अयोध्या के राम मंदिर में चोरी का बवाल अभी थमा नहीं कि केरल बीजेपी से आ रही घोटाले की खबरों ने बीजेपी हाईकमान को हैरान कर दिया है. केरल में 4 मई को चुनाव के नतीजे आए. चुनाव में बहुत सारा पैसा आता है लेकिन हिसाब-किताब चुनाव खत्म होने के बाद होता है. केरल बीजेपी में जब यही हिसाब-किताब शुरू हुआ तो सामने आया बड़ा घोटाला. इतना बड़ा घोटाला कि केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इंटरनल जांच बिठा दी है और जांच के घेरे में केरल बीजेपी के पदाधिकारी (ऑफिस बियरर्स) हैं. चर्चा है कि जो कुछ सामने आया है, वह केवल 'टिप ऑफ द आइसबर्ग' (Only the tip of the iceberg) है. मतलब बहुत छोटा मामला सामने आया है, आगे कुछ और बड़ा सामने आ सकता है.

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400 करोड़ के बजट में 80 करोड़ का गोलमाल

केरल विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक 3 सीटों की कामयाबी के जश्न के बीच, पार्टी के भीतर ही फंड की महा-हेराफेरी का एक बहुत बड़ा विस्फोट हुआ है. चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को अपनी जेब से खर्च करना होता है, फिर भी पार्टी हाईकमान स्टेट यूनिट को मोटा पैसा देती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल का चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली से बीजेपी हाईकमान ने केरल बीजेपी को 400 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया था. उसी पैसे के इस्तेमाल में घोटाले का खुलासा हुआ है. 400 करोड़ के चुनावी बजट में से करीब 80 करोड़ का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है. केरल की यह खबर दिल्ली हाईकमान तक पहुंच चुकी है.

नेताओं की संपत्ति में अचानक उछाल से खुला राज

'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरा मामला तब उजागर हुआ जब चुनाव खत्म होते ही केरल बीजेपी के कुछ बड़े पदाधिकारियों ने अचानक अपने लाखों-करोड़ों के पुराने बैंक लोन चुका दिए, महंगी गाड़ियां खरीद लीं और रियल एस्टेट में भारी निवेश किया. इसे देखकर जब पार्टी की 'केंद्रीय ऑडिट विंग' ने खातों को खंगाला, तो उनके होश उड़ गए. शुरुआती जांच में करीब 12 करोड़ से 80 करोड़ तक के हेरफेर की बात सामने आई है. इस वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत सीधे आलाकमान तक लिखित सबूतों के साथ भेजी गई थी, जिसमें एक राज्य सचिव, एक राज्य समिति सदस्य और एक क्षेत्रीय सचिव सीधे रडार पर आ गए हैं.

फर्जी बिल, घोस्ट कार और हेलीकॉप्टर घोटाला

आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भव्य रोड शो और रैलियों के लिए बने कट-आउट और चुनावी सामग्री के नाम पर जाली बिल पेश किए गए. चुनाव प्रचार के लिए 1 करोड़ झंडे बनाने का ₹3.5 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट अपनी ही एक फर्जी प्राइवेट कंपनी को दे दिया गया, जिसमें करीब ₹54 लाख का सीधा कमीशन खाया गया. इतना ही नहीं, वीआईपी मूवमेंट के लिए 3 हेलीकॉप्टर्स का कॉन्ट्रैक्ट 136 घंटों के लिए था, लेकिन वे उड़े सिर्फ 42 घंटे और बाकी की रकम साफ कर दी गई. प्रचार के लिए किराए पर ली गई 200 गाड़ियों में से आधी जमीन पर थीं ही नहीं, जिन्हें चुनावी भाषा में 'घोस्ट कार' कहा जा रहा है, लेकिन जाली ट्रिप शीट बनाकर 1 करोड़ का भुगतान उठा लिया गया.

राजीव चंद्रशेखर का डैमेज कंट्रोल और सीपीएम की मांग

केरल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस पूरे मामले की कमान संभाली है और कुम्मनम राजशेखरन की अगुवाई में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय इंटरनल जांच समिति का गठन कर दिया है. संदिग्ध नेताओं को चेतावनी दी गई है कि या तो वे पार्टी फंड का पैसा लौटाएं या निष्कासन (Expulsion) के लिए तैयार रहें. हालांकि, डैमेज कंट्रोल में जुटे राजीव चंद्रशेखर ने कैमरे पर किसी भी वित्तीय हेराफेरी से साफ इनकार किया है और इसे भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से जलने वाली 'देश विरोधी ताकतों' की साजिश और फेक न्यूज़ करार दिया है. मामला बीजेपी का इंटरनल है लेकिन केरल के राजनीतिक गलियारों में चर्चित है. इसने राजनीतिक तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. लेफ्ट का इससे कुछ लेना-देना नहीं, लेकिन सीपीएम नेता मांग कर रहे हैं कि इस मामले की पुलिस जांच कराई जानी चाहिए.

स्थानीय नेता की शिकायत पर पुलिस में केस

वैसे यह मामला पुलिस तक जा चुका है. 'द वीक' की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के वामनपुरम के एक स्थानीय बीजेपी नेता प्रमथचंद्रन ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. आरोप है कि उनके परिवार के फूड सप्लाई बिजनेस के GST रजिस्ट्रेशन नंबर का किसी ने गलत इस्तेमाल किया है. फर्जी बिलों में यह दिखाया गया कि कंपनी ने बीजेपी के लिए झंडे (BJP Flags) सप्लाई किए हैं, और इस बहाने मोटी रकम इकट्ठा या ट्रांसफर की गई.

बीएल संतोष को लिखी गई सीक्रेट चिट्ठी

शिकायतकर्ताओं ने बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को चिट्ठी लिखकर बताया कि कैसे नेताओं ने इस सिस्टम में सेंध लगाई. आरोप है कि मुफ्त में या कम दाम पर मिली प्रचार सामग्री और झंडों के नाम पर घोटालेबाज नेताओं ने अपनी करीबी फूड डिस्ट्रीब्यूशन या प्राइवेट एजेंसियों से जाली जीएसटी बिल (Fake Bills) बनवाकर पार्टी फंड से बड़ी रकम कैश में निकाल ली. वीआईपी और लोकल नेताओं के दौरों के लिए जितनी गाड़ियां कागजों पर किराए पर दिखाई गईं, उनमें से कई जमीन पर उतरी ही नहीं. हेलीकॉप्टर कंपनियों के साथ उड़ान के घंटों (Flying Hours) के बिलों में भारी हेरफेर कर लाखों रुपये का कमीशन अंदर ही अंदर खा लिया गया.

ऐतिहासिक जीत के जश्न में लीडरशिप की परीक्षा

केरल में ऐतिहासिक 3 सीटों की जीत का सेहरा जिस राजीव चंद्रशेखर के सिर बंधा था, इस फंड विवाद ने उनकी लीडरशिप की पहली अग्निपरीक्षा ले ली है. यह स्कैंडल राजीव चंद्रशेखर का फेल्योर बन रहा है. वह ईमानदार रहे होंगे लेकिन उनकी नाक के नीचे यह घोटाला हुआ है. राजीव चंद्रशेखर एक तो ट्रेडिशनल नेता नहीं हैं, ऊपर से उनके अध्यक्ष बनने के बाद ऐसा घोटाला उनके लिए परेशानी बना है. किसी राज्य में ऐसा कांड हुआ भी होगा तो उसकी खबर बाहर नहीं आई. ऑडिट शुरू होते ही लीक हुए इस कांड से केरल बीजेपी के कैश कांड की चारों तरफ चर्चा हो रही है.

हाईकमान का एक्शन और अनुशासनात्मक कार्रवाई

400 करोड़ रुपये राज्य अध्यक्ष के कार्यकाल और निगरानी में ही खर्च किए गए. इतने बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग और 'घोस्ट कार' घोटाला होना दिखाता है कि सब कुछ उनके कंट्रोल में नहीं रहा. कहीं राजीव चंद्रशेखर का भय नहीं होना ही इतने बड़े कांड का कारण तो नहीं बना? जब 26 मई को ही स्थानीय नेताओं ने राज्य नेतृत्व को बायपास करके सीधे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को सबूत भेजे, तब जाकर दिल्ली ने एक्शन लिया. जैसे ही आंतरिक जांच समिति ने राज्य सचिव अंजना रंजीत सहित तीन पदाधिकारियों को संदिग्ध पाया, राजीव चंद्रशेखर ने बिना किसी संकोच के तुरंत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी.

ऐतिहासिक 3 सीटों की जीत पर लगा दाग

केरल में बीजेपी ने जीरो से शुरू किया था, इसलिए इसे भी सर्वश्रेष्ठ माना जा रहा है. केरल में पहली बार बीजेपी ने 3 विधानसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की. चुनाव में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने नेमम सीट से, पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने कझाकुट्टम सीट से और बी.बी. गोपकुमार ने चथानूर सीट से जीत दर्ज की. पार्टी ने पहली बार 11 परसेंट से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया और 140 में से 103 सीटों पर पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरी. अब चुनाव बाद करोड़ों रुपये का यह 'फंड मिसमैनेजमेंट विवाद' इशारा कर रहा है कि पार्टी में सब ठीक नहीं है.

कॉर्पोरेट स्टाइल ऑडिट में खुली पोल

कोई भी राष्ट्रीय पार्टी चुनाव के दौरान दो चैनलों से राज्यों में पैसा भेजती है. इसके लिए चुनाव आयोग के कड़े नियम काम करते हैं. चुनाव आयोग (ECI) के कड़े नियमों के तहत, दिल्ली के केंद्रीय मुख्यालय से पैसा सीधे राज्य इकाई के मुख्य और आधिकारिक बैंक खाते में RTGS/NEFT या बैंकिंग चैनल के जरिए भेजा जाता है. केरल में भी इसी लीगल चैनल से चुनावी काम के लिए आवंटन हुआ.

बीजेपी जैसी पार्टियों में फाइनेंशियल मैनेजमेंट कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करता है. चुनाव खत्म होते ही दिल्ली से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) और ऑडिटर्स की एक विशेष टीम राज्यों का दौरा करती है. वे राज्य इकाई से खर्च किए गए एक-एक रुपये का जीएसटी इनवॉइस (GST Invoice) और वाउचर मांगते हैं. यहां तक चेक होता है कि अगर किसी सीट पर प्रचार सामग्री या वाहनों के लिए ₹50 लाख दिए गए, तो जमीनी स्तर पर वे गाड़ियां चलीं या नहीं. केरल में इसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के दौरान पोल खुली.