Shesh Bharat: LDF का नैरेटिव ध्वस्त, BJP का सूपड़ा साफ; केरल के मालाबार में मुस्लिम लीग की 'क्लीन स्वीप' की इनसाइड स्टोरी

रूपक प्रियदर्शी

22 May 2026 (अपडेटेड: May 22 2026 3:56 PM)

Kerala Cabinet Allocation: केरल चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) की ऐतिहासिक जीत के बाद नई कैबिनेट का गठन हो गया है. सरकार में 22 विधायकों वाली 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को 5 कद्दावर मंत्रालय मिले हैं. राहुल गांधी और सादिक अली थंगल की अटूट केमिस्ट्री ने बीजेपी के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नाकाम कर दिया है.

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Kerala Cabinet News: केरल विधानसभा चुनाव में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) की प्रचंड जीत के बाद सूबे में नई सरकार का स्वरूप पूरी तरह साफ हो गया है. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व में गठित हुई इस नई कैबिनेट में विभागों का बंटवारा महज मंत्रियों की नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारतीय राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग का एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. इस नए मंत्रिमंडल में कांग्रेस ने अपने सबसे बड़े और भरोसेमंद सहयोगी दल 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) की उपयोगिता का पूरा सम्मान किया है, जिससे राज्य का सियासी पारा गरमाया हुआ है.

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सरकार में मुस्लिम लीग का बढ़ा कद! 

140 सीटों वाली विधानसभा में 22 विधायकों के साथ किंगमेकर की भूमिका निभाने वाली मुस्लिम लीग को कैबिनेट में पांच महत्वपूर्ण स्थान मिले हैं. पार्टी के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय महासचिव पी.के. कुन्हालीकुट्टी को उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और स्टार्टअप जैसे हाई-प्रोफाइल मंत्रालयों की कमान सौंपी गई है. इसके अतिरिक्त, एन. शमसुद्दीन को सामान्य शिक्षा, के.एम. शाजी को स्थानीय स्वशासन (LSG), पी.के. बशीर को लोक निर्माण विभाग (PWD) और वी.ई. अब्दुल गफूर को मत्स्य पालन व सामाजिक न्याय मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि लीग को उद्योग और शिक्षा जैसे अहम विभाग मिलना उनके पांच दशक पुराने ऐतिहासिक रसूख को दर्शाता है.

मुख्यमंत्री सतीशन की प्रशासन पर मजबूत पकड़

एक तरफ जहां सहयोगी दलों को बड़े विभाग दिए गए हैं, वहीं मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत रखी है. उन्होंने वित्त, कानून और बंदरगाह सहित कुल 35 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं. इसके अलावा, कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को गृह, सतर्कता (Vigilance), स्वास्थ्य, राजस्व, बिजली और उच्च शिक्षा जैसे नीतिगत रूप से संवेदनशील मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है.

राहुल गांधी और थंगल की केमिस्ट्री

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में एक खास नजारा देखने को मिला, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. मंच पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष सादिक अली शिहाब थंगल के बीच बेहद गर्मजोशी और गहरी केमिस्ट्री साफ नजर आई. बीजेपी द्वारा मुस्लिम लीग पर लगाए जाने वाले सांप्रदायिकता के आरोपों के बीच, राहुल गांधी का खुलकर लीग को एक सेक्युलर दल बताना और मंच साझा करना विरोधी खेमे को एक कड़ा संदेश है. वायनाड से लेकर पूरे केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुई है.

मालाबार में क्लीन स्वीप 

इस चुनाव में मुस्लिम लीग ने उत्तरी केरल के मुस्लिम बहुल मालाबार इलाके (मलप्पुरम, कासरगोड और कोझिकोड) में एकतरफा जीत हासिल कर एलडीएफ (LDF) के तमाम मंसूबों पर पानी फेर दिया. माकपा (CPIM) ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और वैश्विक मुद्दों के सहारे मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश की थी लेकिन लीग ने स्थानीय विकास और सांप्रदायिक सद्भाव के मुद्दे पर अपने कैडर को पूरी तरह एकजुट रखा. दूसरी तरफ, बीजेपी द्वारा बहुसंख्यक समाज के एक वर्ग को साधकर किए जा रहे ध्रुवीकरण के प्रयास के खिलाफ मुस्लिम लीग अल्पसंख्यक समाज के लिए एक 'धर्मनिरपेक्ष ढाल' बनकर उभरी, जिसके चलते बीजेपी का खाता तक नहीं खुल सका.

खाड़ी देशों के वोटरों का मिला साथ

लीग की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रहने वाले प्रवासी मलयाली मतदाताओं का भी बड़ा हाथ रहा, जो विशेष रूप से मतदान के लिए घर लौटे. इसके अलावा, लीग ने केवल एक वर्ग तक सीमित न रहकर ईसाई और दलित समुदायों के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित किया, जिससे यूडीएफ के पक्ष में वोटों का सीधा ट्रांसफर मुमकिन हो सका. 1979 में सी.एच. मोहम्मद कोया के रूप में राज्य को एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री देने वाली यह पार्टी आज भी केरल की मुख्यधारा की राजनीति का एक सबसे मजबूत स्तंभ बनी हुई है.