Shesh Bharat: मास्टरस्ट्रोक! PM श्री योजना मानकर भी खेल गए वीडी सतीशन, ₹1400 करोड़ का फंड भी मिला और केंद्र के हाथ भी

रूपक प्रियदर्शी

• 08:58 AM • 19 Jun 2026

केरल के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सूबे का 1400 करोड़ का शिक्षा फंड बचाने के लिए 'PM श्री' योजना को मंजूरी तो दे दी, लेकिन स्कूलों के चयन और सिलेबस का कंट्रोल अपने पास रखकर केंद्र का दखल रोक दिया.

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केरल में लेफ्ट की सरकार जाने के बाद ऐसा राजनीतिक खेला हुआ है, जिसने तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक सबको हैरान कर दिया. चूंकि दक्षिण के राज्यों में बीजेपी की सरकारें नहीं हैं इसलिए लाख कोशिशों के बाद भी पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'PM SHRI' यानी पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया दक्षिण के सारे राज्यों में लागू नहीं हो पा रही है. लेफ्ट के सीएम पिनाराई विजयन पहले तो बहुत लड़े केंद्र सरकार से लेकिन फिर पैसों के लिए चुपके से घुटने टेकते हुए हामी भर दी कि पीएम श्री योजना केरल में लागू कर देंगे.

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सीएम सतीशन का मास्टरस्ट्रोक

नए सीएम वीडी सतीशन ने सरकार संभाली तो फाइल सामने आई कि विजयन ने जाते-जाते पीएम श्री पर हामी भर दी थी. मजबूरी हो गई कि कांग्रेस की सरकार को भी पीएम श्री योजना लागू करनी पड़ेगी. वी.डी. सतीशन ने मोदी सरकार की विवादित योजना को स्वीकार तो किया, लेकिन ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया कि केंद्र सरकार के हाथ बंध जाएंगे. सतीशन ने केंद्र की योजना मानकर भी ऐसा खेला कर दिया है कि फंड भी केरल का हुआ और कंट्रोल भी. सीएम सतीशन के पॉलिटिकल माइंड गेम से पीएम श्री योजना लागू भी होगी लेकिन मर्जी चलेगी कांग्रेस सरकार की.

क्या है पीएम श्री योजना और विवाद?

पीएम श्री 7 सितंबर 2022 को लॉन्च किया गया था. इसका मकसद देश भर के 14,500 से अधिक मौजूदा सरकारी स्कूलों को 'मॉडल स्कूलों' के तौर पर अपग्रेड करना है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी इससे जुड़ी है. इस योजना पर 2022-23 से 2026-27 के बीच 5 साल में 27,360 करोड़ खर्च होने हैं. इस योजना की शर्त ये होती है कि अपग्रेड होने वाले राज्य सरकार के स्कूलों को अपने नाम के आगे 'PM SHRI' जोड़ना होता है. आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक में योजना लागू हो गई लेकिन डीएमके सरकार ने तमिलनाडु में और लेफ्ट सरकार ने केरल में इसे लागू नहीं होने दिया. सजा के तौर पर केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ के फंड रोक दिए. योजना को लेकर सबसे ज्यादा विवाद ये है कि गैर बीजेपी पार्टियों की सरकारों को लगता है कि बीजेपी शिक्षा के भगवाकरण के लिए ये योजना लाई.

सतीशन ने मजबूरी को बनाया मजबूती

केरल की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य का खाली खजाना और केंद्र द्वारा रोका गया करीब ₹1,400 करोड़ का शिक्षा फंड था. पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस भारी-भरकम राशि के लिए चुपचाप दिल्ली के सामने सरेंडर कर दिया था और MoU साइन कर लिया था. लेकिन सतीशन ने सत्ता में आते ही इस मजबूरी को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक मजबूती बना लिया. उन्होंने केंद्र के साथ सीधे टकराव का रास्ता चुनने के बजाय 'को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म' का ऐसा मुखौटा पहना.

कैबिनेट उप-समिति का गठन

सतीशन के 'खेला' का सबसे बड़ा दांव शिक्षा के भगवाकरण के नैरेटिव को ध्वस्त करना था. उन्होंने पीएम श्री योजना को मंज़ूरी तो दी, लेकिन उसके साथ एक बेहद सख्त कानूनी शर्त जोड़ दी. सतीशन ने 'PM SHRI' योजना की समीक्षा करने और केंद्र सरकार को राज्य का अंतिम रुख भेजने के लिए 4 मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है जिसके संयोजक शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन हैं.

केरल सरकार की सख्त शर्तें

सतीशन सरकार ने केंद्र को दो टूक कह दिया कि दिल्ली से सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लास और नए लैब्स के लिए पैसा आएगा, लेकिन स्कूलों के भीतर बच्चों को क्या पढ़ाया जाएगा, इसका सिलेबस केरल सरकार ही तय करेगी. इस एक शर्त से उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उन हिस्सों पर 'नो-एंट्री' का बोर्ड लगा दिया, जिसका केरल में विरोध होता रहा. सीएम वी.डी. सतीशन ने दिल्ली की योजना को अपनाया भी, केरल के बच्चों के लिए ₹1,400 करोड़ का फंड भी सुरक्षित किया और योजना के भीतर ऐसी शर्तें फिट कर दीं कि केंद्र सरकार चाहकर भी केरल की शिक्षा व्यवस्था में दखल नहीं दे पाएगी.

रिमोट कंट्रोल तिरुवनंतपुरम के पास

पीएम श्री योजना के जरिए बीजेपी सरकार जमीनी स्तर पर स्कूलों का चयन कर राजनीतिक माइलेज लेने की फिराक में थी. लेकिन सतीशन ने यहां भी बाजी पलट दी. उन्होंने साफ कर दिया कि किस जिले के किस स्कूल को इस योजना के तहत अपग्रेड किया जाएगा, इसकी पूरी सूची केरल की कैबिनेट उप-समिति (Cabinet Sub-Committee) तैयार करेगी. नतीजा यह हुआ कि योजना पर नाम भले ही 'पीएम श्री' का रहेगा, लेकिन उसका असली रिमोट कंट्रोल सीएम ऑफिस यानी तिरुवनंतपुरम के पास ही रहेगा. इस चाल से सतीशन ने स्थानीय स्तर पर बीजेपी के क्रेडिट लेने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. वैसे उनकी भी मजबूरी ये है कि विजयन सरकार पहले ही इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुकी थी और 99 करोड़ का फंड ले चुकी थी, इसलिए वे कानूनी रूप से इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य हैं.

विजयन सरकार का सीक्रेट सरेंडर

वित्तीय संकट से जूझ रहे केरल के लिए इस भारी राशि को छोड़ना नामुमकिन था, इसलिए विजयन सरकार ने इसे एक "रणनीतिक कदम" (Tactical Decision) बताते हुए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए. विजयन सरकार की इस "गुप्त संधि" की खबर जैसे ही लीक हुई, एलडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी CPI भड़क गई. सीपीआई के 4 मंत्रियों ने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार करने की धमकी दे दी. चारों तरफ से घिरे विजयन को अपनी ही सरकार बचाने के लिए एक और यू-टर्न लेना पड़ा और उन्होंने योजना के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से 'फ्रीज' (ठंडे बस्ते में) कर दिया और मामला कैबिनेट सब-कमेटी को भेज दिया. सतीशन ने बाकी कांग्रेस शासित राज्यों की तरह पीएम श्री योजना लागू करने पर हामी भरी लेकिन अपनी शर्तों के साथ कि हम तय करेंगे कि क्या पढ़ाना है.

लेफ्ट को विधानसभा में घेरा

सतीशन के इस सियासी दांव ने विपक्ष में बैठी लेफ्ट को भी चारों खाने चित्त कर दिया है. जब लेफ्ट ने कांग्रेस पर वैचारिक यू-टर्न लेने का आरोप मढ़ा, तो सतीशन ने विधानसभा में पिनाराई विजयन का वो पुराना सीक्रेट समझौता पत्र लहरा दिया. सतीशन ने जनता के सामने यह नैरेटिव सेट कर दिया कि वे सिर्फ उस आर्थिक गड्ढे को भर रहे हैं जो विजयन सरकार खोद कर गई थी. इस तरह उन्होंने लेफ्ट को 'कमजोर' साबित कर दिया और खुद को एक 'चतुर और व्यावहारिक प्रशासक' के रूप में स्थापित कर लिया, जिसने बिना झुके केरल का हक छीन लिया.

खाली खजाने की विवशता

कहानी का एक मैसेज ये है कि राजनीति में जब राज्य का खजाना खाली हो, तो "दिल्ली का फंड" बड़े से बड़े वैचारिक विरोधियों को भी एक ही पटरी पर आने के लिए मजबूर कर देता है, चाहे वे कम्युस्टि हों या कांग्रेसी.

तमिलनाडु का कड़ा रुख

केंद्र सरकार खुश हो सकती है कि केरल का कांटा भी निकल गया लेकिन एक कांटा है तमिलनाडु जो निकल नहीं रहा. स्टालिन की सरकार जाने के बाद सीएम विजय ने भी शिक्षा को लेकर केंद्र सरकार से नो कॉम्प्रोमाइज स्टैंड लिया है. स्टालिन सरकार की लाइन आगे बढ़ाई है कि केंद्र सरकार की मर्जी से पीएम श्री को तमिलनाडु में लागू नहीं करेंगे. PM SHRI योजना को किसी भी पिछले दरवाजे से भी लागू नहीं होने देंगे.

तमिलनाडु की नई मांग

PM SHRI योजना के तहत 10वीं तक की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी भी लागू करने के लिए तैयार नहीं. केंद्र के आर्थिक दबाव के आगे झुकने से भी इनकार कर रहे हैं. 3,500 करोड़ के शिक्षा फंड रोकने पर कहा है कि ये पैसा छात्रों का है, किसी सरकार का नहीं. केंद्र फंड रोककर दबाव बनाने की राजनीति कर रहा है, लेकिन तमिलनाडु ब्लैकमेलिंग के आगे घुटने नहीं टेकेगा. विजय ने नई मांग की है कि शिक्षा को 'समवर्ती सूची' (यानी Concurrent List) से हटाकर वापस पूरी तरह से 'राज्य सूची' (State List) में डाला जाना चाहिए, ताकि केंद्र राज्यों के स्कूली सिस्टम में हस्तक्षेप न कर सके.