ED raid on Pinarayi Vijayan:केरल में ED की रेड से सियासी भूचाल: दिल्ली में 'हाथ में हाथ', तो केरल में राहुल गांधी और विजयन के बीच क्यों है 'तलवारें खिंची'?
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राष्ट्रीय राजनीति का एक दिलचस्प पहलू हमेशा चर्चा में रहता है. दिल्ली के मंचों पर कांग्रेस और लेफ्ट (वामपंथी) नेता अक्सर एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आते हैं. राहुल गांधी के साथ वाम दल के बड़े चेहरे मुस्कुराते हुए तस्वीरें खिंचवाते हैं. लेकिन जैसे ही भौगोलिक सीमा बदलकर केरल पहुंचती है, यह सियासी दोस्ती फौरन कट्टर दुश्मनी में बदल जाती है. ताजा मामला केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर हुई ED की छापेमारी का है, जिसने सूबे की राजनीति में जबरदस्त भूचाल ला दिया है.
रेड केंद्रीय एजेंसी ने की, पर विजयन के निशाने पर राहुल गांधी क्यों?
आमतौर पर विपक्ष ईडी की कार्रवाई के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराता है. राहुल गांधी खुद भी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मुद्दा जोर-शोर से उठाते रहे हैं. मगर इस बार कहानी थोड़ी अलग है. अपने ठिकानों पर केंद्रीय एजेंसी की रेड होते ही पिनाराई विजयन ने केंद्र के साथ-साथ सीधे राहुल गांधी पर मोर्चा खोल दिया. विजयन ने इस पूरी कार्रवाई का ठीकरा राहुल गांधी के सिर फोड़ दिया है.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार जनसभाओं में पूछ रहे थे कि विजयन के घर छापेमारी क्यों नहीं हो रही, उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा? विजयन ने तंज कसते हुए कहा कि अब इस रेड से राहुल गांधी को बड़ी मानसिक संतुष्टि मिली होगी. वामपंथी नेता का आरोप है कि कांग्रेस और राहुल गांधी ही बीजेपी सरकार को ऐसी कार्रवाइयों के लिए उकसाते हैं.
स्थानीय राजनीति और वायनाड का 'चुनावी कांटा'
इस भारी टकराव की सबसे बड़ी वजह केरल की जमीनी सियासत है. केंद्र में भले ही दोनों दल विपक्षी गठबंधन का हिस्सा रहे हों, लेकिन केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) और लेफ्ट का एलडीएफ (LDF) आमने-सामने रहते हैं. जब राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया, तभी से लेफ्ट असहज था. विजयन को लगा कि राहुल केरल आकर उनकी जमीन कमजोर कर रहे हैं. यही वजह है कि विजयन ने एक बार यहां तक कह दिया था कि राष्ट्रीय नेता होने के बाद भी राहुल में एक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता जितनी भी समझ नहीं है.
'बीजेपी की बी-टीम' बनाम 'भ्रष्टाचार का विक्टिम कार्ड'
चुनावी माहौल के दौरान राहुल गांधी ने भी विजयन सरकार को घेरा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि देश भर में अल्पसंख्यकों पर हमला करने वाली ताकतों और लेफ्ट फ्रंट के बीच अंदरूनी साठगांठ है. राहुल ने विजयन को सीधे तौर पर बीजेपी की 'बी-टीम' करार दिया था और भ्रष्टाचार के मामलों पर चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे.
अब विजयन के इन तीखे हमलों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है. केरल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पिनाराई विजयन और उनकी बेटी की कंपनी (Exalogic Solutions) पर वित्तीय हेरफेर के आरोप पूरी तरह कानूनी हैं. कोर्ट से भी इस जांच को मंजूरी मिल चुकी है. कांग्रेस का आरोप है कि जब अपनी बेटी की कंपनी के मासिक भुगतान घोटाले में फंसने की बात आती है, तो विजयन खुद को बचाने के लिए राहुल गांधी के नाम का सहारा लेकर विक्टिम कार्ड खेलने लगते हैं.
कभी नहीं रही कोई 'पर्सनल बॉन्डिंग'
सियासी गलियारों में यह बात जगजाहिर है कि राहुल गांधी और पिनाराई विजयन के बीच कभी कोई निजी या पारिवारिक रिश्ता नहीं रहा. दोनों नेताओं के बीच कोई पर्सनल बॉन्डिंग नहीं देखी गई. रिकॉर्ड्स बताते हैं कि राहुल गांधी के वायनाड से सांसद रहने के दौरान भी दोनों की मुलाकातें न के बराबर हुईं.
साल 2019 में जब वायनाड में भीषण बाढ़ आई थी तब राहुल ने दिल्ली के केरल हाउस में मुख्यमंत्री विजयन से करीब 20 मिनट की एक बेहद औपचारिक मुलाकात की थी, जिसमें सिर्फ राहत कार्यों पर बात हुई थी.
लेफ्ट के दूसरे नेताओं से अलग हैं विजयन
कांग्रेस के रिश्ते लेफ्ट के केंद्रीय नेताओं जैसे दिवंगत सीताराम येचुरी, हरकिशन सिंह सुरजीत या प्रकाश करात के साथ हमेशा बेहतर रहे हैं. यूपीए सरकार के दौर में इन नेताओं की कांग्रेस से नजदीकियां थीं. इसके उलट, पिनाराई विजयन हमेशा दिल्ली की बैठकों से दूर रहे और अपनी राजनीति को केरल तक ही सीमित रखा. यही वजह है कि आज जब केरल की राजनीति में जांच की आंच आई है, तो दिल्ली की दोस्ती पूरी तरह दरक चुकी है.
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