Kerala Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब बस कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन इस बार चुनावी मैदान की हलचल सात समंदर पार खाड़ी देशों (Gulf) के हालातों से प्रभावित होती दिख रही है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने केरल की कई सीटों पर सियासी समीकरणों को उलझा दिया है. दरअसल, बड़ी संख्या में मलयाली लोग खाड़ी देशों में रहते हैं, जिनका इस बार मतदान के लिए केरल आना मुश्किल लग रहा है.
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50 सीटों पर रहता है प्रवासियों का दबदबा
केरल के करीब 22 लाख लोग रोजगार और व्यापार के लिए खाड़ी देशों में रहते हैं. खास तौर पर उत्तरी केरल के मालाबार इलाके में इनका खासा प्रभाव है. कन्नूर से लेकर पलक्कड़ तक फैली करीब 50 ऐसी सीटें हैं, जहां NRI वोटर्स हार-जीत का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. अमूमन हर चुनाव में ये लोग वोट डालने घर लौटते हैं, लेकिन इस बार स्थिति बदली हुई है.
क्यों नहीं आ पा रहे हैं वोटर?
खाड़ी देशों में रह रहे मलयाली लोगों के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ युद्ध की आहट के चलते हवाई टिकटों की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ जॉब पर संकट और उड़ानें रद्द होने का डर सता रहा है. संगठनों का अनुमान है कि इस बार 60 से 90 प्रतिशत प्रवासी भारतीय मतदान के लिए नहीं लौट पाएंगे.
कम मार्जिन वाली सीटों पर बढ़ेगी टेंशन
यह संकट उन सीटों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है जहां पिछले चुनाव में जीत का अंतर बहुत कम था. उदाहरण के तौर पर पेरिनथलमान्ना सीट, जहां 2021 में हार-जीत का अंतर महज 38 वोट था. कुट्टियाडी सीट पर 16,000 NRI वोटर हैं, पिछले चुनाव में इस सीट पर जीत का अंतर सिर्फ 333 वोट था. नडापुरम में 12,000 NRI वोटर रजिस्टर्ड हैं, जबकि पिछली बार यहां मार्जिन 3,385 वोटों का था.
ऐसे अगर इन सीटों पर प्रवासी वोटर नहीं पहुंचते हैं तो कम मार्जिन वाली सीटों पर नतीजों का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है.
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