पश्चिम बंगाल की सियासत में हो रहे उठा-पटक के बीच महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए चर्चाएं तेज हो गई है कि राज्य में एक बार फिर बड़ा खेला होने जा रहा है. जिस तरह TMC में बगावत और टूट हुई, ठीक उसी तरह अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना(UBT) के टूट का खतरा मंडराने लगा है. बीते रविवार को शिवसेना(UBT) ने अपने सभी 9 लोकसभा सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई थी.
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यह बैठक उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर आयोजित थी, लेकिन यहां 9 में से 5 सांसद नहीं पहुंचे जिसके बाद 'ऑपरेशन टाइगर' के कयास लगाए जाने लगे है. वहीं एक सांसद ने एकनाथ शिंदे के मंत्री के साथ मुलाकात की है, जिसके बाद ही महाराष्ट्र की राजनीति में इसे उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका माना जा रहा है. हालांकि इसी बीच उद्धव ठाकरे ने भी बड़ा बयान दिया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. आइए विस्तार से जानते हैं इस नए राजनीतिक फेरबदल के चर्चे की पूरी कहानी.
कौन हैं वह 5 सांसद, जो बैठक में नहीं पहुंचे?
बताया जा रहा कि उद्धव ठाकरे के आवास पर बुलाई गई शिवसेना(UBT) की यह बैठक काफी अहम है. लेकिन 5 सांसदों के नहीं पहुंचने की वजह से इसने अलग ही रंग ले लिया है. इस बैठक में नहीं पहुंचने विधायकों में संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर है. इनकी गैर-मौजूदगी की वजह से पार्टी में फूट पड़ने की चर्चाएं तेज हो गई है. हालांकि, शिवसेना(UBT) की तरफ से मामला संभालने की कोशिश की गई और दावा किया कि ये सांसद ऑनलाइन शामिल हुए थे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे नागेश पाटिल अष्टिकर से ही सीधे बात कर पाए.
उद्धव ठाकरे ने तोड़ी चुप्पी!
ऑपरेशन टाइगर की चल रही चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. उन्होंने सख्त और चेतावनी देते हुए लहजे में साफ-साफ कहा कि, आज मेरा वक्त नहीं है, लेकिन कल जरूर आएगा. तब तक हमें संघर्ष करना होगा, सहना होगा. उन्होंने आगे यह भी कहा कि जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी है, उन्हें एक दिन जरूर पछताना पड़ेगा...लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होगी.
उद्धव ठाकरे ने 4 साल पहले हुई पार्टी में टूट का जिक्र करते हुए कहा कि, चार साल पहले पार्टी में एक बड़ी फूट पड़ी थी और तब 40 विधायक हमसे अलग हो गए थे. तब मैं राज्य का मुख्यमंत्री था लेकिन क्या लोगों में सच में लगता था कि मुझे नहीं पता था कि क्या-कैसे हुआ है, जो बाकी लोगों को साफ-साफ दिखाई दे रहा और समझ आ रहा था?
'जो जाना चाहता है, वह जा सकता है...'
उद्धव ठाकरे ने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा कि, शिवसेना में 4 साल पहले हुई बगावत की भनक मुझे पहले ही लग गई थी. लेकिन मैंने ना तो किसी से कुछ कहा, ना ही किसी पर कोई दबाव डाला और ना ही किसी के घोटालों की जांच के लिए फाइलें खुलवाई. अगर कोई जाना चाहता है तो उसे जबरदस्ती रोकने का क्या ही मतलब निकलेगा? उन्होंने आगे साफ कहा कि, जो जाना चाहता है, वह जा सकता है. मैं उन्हें नहीं रोकूंगा और उनके अच्छे राजनीतिक भविष्य की कामना करूंगा. उद्धव ठाकरे के इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है.
एकनाथ शिंदे के संपर्क में उद्धव के कई सांसद- प्रताप जाधव
दरअसल, जो 5 सांसदों ने शिवसेना(UBT) की बैठक में शामिल नहीं हुए थे, उनमें संजय देशमुख का भी नाम था. संजय देशमुख ने उद्धव ठाकरे की बैठक के बजाय दिल्ली में एकनाथ शिंदे के एक मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात की, जिसने सियासी पारा और हाई कर दिया है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री प्रपात राव जाधव ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में कहा कि शिवसेना(UBT) के सभी सांसद मेरे दोस्त है, हमने पहले साथ में किया है. हमारी मुलाकातें होती है.
उन्होंने आगे कहा कि, लेकिन एक बात साफ है कि पश्चिम बंगाल में TMC के सांसदों की तरह ही शिवसेना(UBT) के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से खुश नहीं है. साथ ही शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ही असली शिवसेना है जो कि बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर काम कर रही है. शिवसेना(UBT) के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे जी के साथ संपर्क में है और सभी सांसदों का हमारी पार्टी में स्वागत है.
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