महाराष्ट्र में NCP के विलय की अटकलें तेज, BJP ने सामने रखी बड़ी शर्त; जानें क्या है पूरा सियासी समीकरण

हिमांशु मिश्रा

• 12:50 PM • 18 Jul 2026

महाराष्ट्र की सियासत में एनसीपी के दोनों गुटों (शरद पवार और अजीत पवार) के एक होने की चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि दोनों गुट पहले आपस में विलय करें, तभी उन्हें एनडीए (NDA) में एंट्री मिलेगी। बीजेपी को परिसीमन बिल पास कराने के लिए शरद पवार गुट के 9 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों (शरद पवार गुट और अजीत पवार गुट) के बीच विलय यानी दोबारा एक होने की हलचल काफी तेज हो गई है. इस बीच, दिल्ली से लेकर मुंबई तक के सियासी गलियारों में बीजेपी के एक बड़े फैसले की चर्चा है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एनसीपी नेतृत्व को साफ संदेश दे दिया है. बीजेपी का कहना है कि अगर एनसीपी को एनडीए (NDA) का हिस्सा बनना है, तो पहले दोनों गुटों को आपस में विलय करना होगा.

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बीजेपी क्यों चाहती है दोनों गुटों का विलय?

बीजेपी शरद पवार गुट को अलग से एनडीए में शामिल करने के मूड में नहीं है. वहीं, पार्टी ने यह भी साफ कर दिया है कि एनसीपी का विलय बीजेपी में नहीं किया जाएगा. इस पूरी सियासी रणनीति के पीछे केंद्र सरकार का 'परिसीमन बिल' (Delimitation Bill) माना जा रही है. सूत्रों के मुताबिक, आगामी परिसीमन बिल को लेकर शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) का रुख थोड़ा नरम है और वह संसद में इसका समर्थन कर सकती है.

फिलहाल संसद में शरद पवार गुट के पास कुल 9 सांसद हैं, जिनमें 8 लोकसभा और 1 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं. परिसीमन बिल को आसानी से पास कराने के लिए बीजेपी को इन 9 सांसदों के समर्थन की सख्त जरूरत है. यही वजह है कि बीजेपी दोनों गुटों को एक साथ लाने पर जोर दे रही है. चर्चा है कि अगर यह विलय कामयाब रहता है, तो भविष्य में दोनों तरफ से एक-एक नेता को मंत्री पद भी दिया जा सकता है.

बढ़ती अटकलों से बढ़ी बेचैनी और विपक्ष का तंज

एनसीपी के दोनों गुटों के करीब आने की खबरों ने राज्य की राजनीति में बेचैनी भी बढ़ा दी है. सूत्रों की मानें तो अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार इस संभावित गठबंधन से असहज नजर आ रही हैं. हाल ही में शरद पवार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई मुलाकात के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है.

दूसरी ओर, महाविकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगी दल इस पर करीबी नजर रखे हुए हैं. शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने इस मामले पर कहा कि विलय की बातें पिछले दो साल से चल रही हैं. हालांकि, सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल हमेशा इन खबरों को खारिज करते रहे हैं. राउत ने कहा कि उन्हें एनसीपी (SP) के इन दोनों बड़े नेताओं पर पूरा भरोसा है.

किसानों के मुद्दे पर शरद पवार की चेतावनी

इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच, बारामती में शरद पवार ने किसानों के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा. उन्होंने कर्ज माफी की समयसीमा बढ़ाए जाने पर नाराजगी जताई. पवार ने कहा, "सरकार को पहले तय की गई तारीख का पालन करना चाहिए था. अब नई तारीख दी गई है, तो हम इंतजार करेंगे. किसानों को कर्ज मुक्त करना हमारी पहली प्राथमिकता है. अगर सरकार कर्ज माफ करती है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन करेंगे."

वहीं, जब पत्रकारों ने उनसे एनसीपी में दोबारा होने वाली हलचल और संभावित फूट पर सवाल किया, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अभी इस विषय पर बात करने का सही समय नहीं है.