Shesh Bharat: मेकेदातु प्रोजेक्ट पर थलापति विजय और डीके शिवकुमार में ठनी, जानिए क्या है पानी का यह पूरा विवाद

Shesh Bharat: कर्नाटक के मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलापति विजय और कर्नाटक के भावी सीएम डीके शिवकुमार के बीच सियासी जंग छिड़ गई है. विजय ने बांध रोकने के लिए पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है, जबकि डीके शिवकुमार हर हाल में भूमि पूजन करने पर अड़े हैं.

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रूपक प्रियदर्शी

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Shesh Bharat: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर बरसों पुराना विवाद एक बार फिर गर्मा गया है. इस बार लड़ाई का केंद्र 'मेकेदातु प्रोजेक्ट' (Mekedatu Project) है. इस मुद्दे पर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलापति विजय और कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार आमने-सामने आ गए हैं. दोनों नेताओं के बीच छिड़ी यह सियासी जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है.

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चुनावी तल्खी के बाद अब पानी पर संग्राम

तमिलनाडु चुनाव के दौरान कर्नाटक के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार ने अभिनेता से नेता बने थलापति विजय को राजनीति में अपरिपक्व बताया था. हालांकि, चुनाव नतीजों में विजय की बड़ी जीत के बाद डीके शिवकुमार ने अपनी गलती मानी और फोन पर उन्हें बधाई भी दी. लेकिन यह चुनावी दोस्ती एक महीने भी नहीं टिक पाई. अब दोनों नेता अपने-अपने राज्य के हितों के लिए अड़ गए हैं.

सीएम विजय ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

तमिलनाडु की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री विजय ने मेकेदातु प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्र सरकार कर्नाटक की इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) को तुरंत खारिज करे. विजय का तर्क है कि कावेरी बेसिन में पहले से ही पानी की कमी है. अगर कर्नाटक ने बांध बना लिया तो कम बारिश वाले सालों में तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के लाखों किसानों की खेती पूरी तरह तबाह हो जाएगी.

डीके शिवकुमार का पलटवार 'हर हाल में करेंगे भूमि पूजन'

दूसरी तरफ, कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार ने विजय की इस आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया है. डीके शिवकुमार का कहना है कि तमिलनाडु को इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कर्नाटक सरकार जल्द ही इस बांध का भूमि पूजन और शिलान्यास करने की तैयारी में है. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया कि तमिलनाडु के हिस्से का 177 TMC पानी प्रभावित नहीं होगा. बांध केवल अतिरिक्त पानी को रोकने के लिए बनाया जा रहा है.

क्या है मेकेदातु प्रोजेक्ट और इसका इतिहास?

कन्नड़ भाषा में 'मेकेदातु' का अर्थ होता है 'बकरी की छलांग'. यह कर्नाटक के रामनगर जिले में कावेरी और अर्कावती नदी के संगम पर स्थित एक संकरी घाटी है. कर्नाटक सरकार यहां लगभग 9,000 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा जलाशय (डैम) बनाना चाहती है.

इस जलाशय की क्षमता 67.16 TMC पानी जमा करने की होगी. इसका मुख्य उद्देश्य आईटी सिटी बेंगलुरु और उसके आस-पास के इलाकों में पीने के पानी की किल्लत को दूर करना है. साथ ही इससे 400 मेगावाट बिजली पैदा करने की भी योजना है. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था कि कर्नाटक सामान्य मानसून में तमिलनाडु को 177.25 TMC पानी देगा. कर्नाटक का कहना है कि वे इस पानी को देने के बाद समुद्र में बह जाने वाले एक्स्ट्रा पानी को ही स्टोर करना चाहते हैं.

गठबंधन के बावजूद क्यों फंसा है पेंच?

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने द्रमुक (DMK) से नाता तोड़कर विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) को बिना शर्त समर्थन दिया है. चूंकि कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है, इसलिए उम्मीद थी कि दोनों राज्यों में बातचीत आसान होगी. लेकिन पानी एक ऐसा संवेदनशील मुद्दा है, जहां कोई भी नेता ढील नहीं दे सकता.

विजय पर विपक्ष आरोप लगा रहा है कि वे कांग्रेस के दबाव में तमिलनाडु के अधिकारों से समझौता कर रहे हैं. ऐसे में अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और पहली बड़ी परीक्षा में पास होने के लिए सीएम विजय केंद्र सरकार के जरिए कर्नाटक पर दबाव बनाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं.

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