नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत, लेकिन इन शर्तों का करना होगा पालन!

अनुपम मिश्रा

• 03:51 PM • 29 Sep 2026

Nandigram Bypoll News: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 29 सितंबर को जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने 2007 से जुड़े छह मामलों में उन्हें तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी. कोर्ट ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर को हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है. जानिए पूरी कहानी.

Milan Pradhan interim bail
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पश्चिम बंगाल के हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी गलियारों में हलचल मचा रखी है. चुनावी ऐलान के बाद से ही यह सीट लगातार चर्चा में बनी हुई है और उठा-पटक का दौर भी जारी है. इसी बीच कांग्रेस उम्मीदवान मिलन प्रधान के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है और उन्हें अब बड़ी राहत मिली है. हालांकि उन्हें कुछ शर्तों के साथ यह अंतरिम जमानत दी गई और मिलन प्रधान को इसका सख्ती से पालन भी करना होगा. आइए विस्तार से जानते हैं मामले की पूरी कहानी.

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कांग्रेस उम्मीदवार को मिला सशर्त जमानत!

कलकत्ता हाई कोर्ट में नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार के मामले को लेकर आज यानी 29 सितंबर को सुनवाई हुई. इस दौरान जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने मिलन प्रधान को 10 हजार रुपए के दो बॉन्ड पर अंतरिम जमानत दे दी है. इस दौरान कुछ शर्तें भी तय की गई है. जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस उम्मीदवार को अपना मौजूदा मोबाइल नंबर लोकल पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा. हालांकि मिलन प्रधान की ये अंतरिम जमानत 20 अक्टूबर तक ही वैलिड रहेगी और फिर 21 अक्टूबर को उन्हें हल्दिया कोर्ट में सरेंडर करना होगा.

किस मामले में हुई थी कार्रवाई?

कांग्रेस कैंडिडेट मिलन प्रधान पर जिस मामले में कार्रवाई  हुई है, वह 2007 से लेकर अब तक कुल 6 आपराधिक मामले है. मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से दो मामले फिलहाल कोंटाई अदालत में और 4 मामले हल्दिया कोर्ट में विचाराधीन है. इन्हीं पुराने मामलों में मिलन प्रधान पर हत्या का आरोप है और इसी वजह से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. बता दें कि इससे पहले जब मामले की सुनवाई निचली अदालत में हुई थी तब उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस तीर्थंकर घोष ने कहा है कि, मिलन प्रधान को नॉमिनेशन दाखिल करने के बाद गिरफ्तार किया गया था. इस दौरान अदालत को पता चला कि राज्य सरकार ने ऐसा कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो सके कि साल 2007 के बाद से उन्हें किसी भी मामले में पहले गिरफ्तार नहीं किया गया था.

मिलन प्रधान की पत्नी ने भी किया था बड़ा दावा

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद ही उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने दावा करते हुए कहा था कि, उनके पति को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा था, उन्हें झूठे आरोपों के आधार पर हिरासत में लिया गया और जिन्होंने उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया है, उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए. नियम कहता है कि गलती करने पर सजा मिलती है, लेकिन मेरे पति ने तो कुछ भी गलत नहीं किया है.

ममता ने भी दिया समर्थन, हसिरानी रथ से सीधा मुकाबला

इस उपचुनाव को लेकर अब तक कई दिलचस्प पहलु देखने को मिले है. पहले ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस लिया तब ममता ने मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई थी. अब मामला साफ दिखाई दे रहा है और मुख्य तौर पर नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार हसिरानी रथ और मिलन प्रधान के बीच चुनावी मुकाबला है.

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