Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री (नकल उतारे जाने) के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इसे जाट और किसान के अपमान तक से जोड़ा जा रहा है. वहीं मिमिक्री एक्ट के सपोटर्स भी हैं, जो कह रहे हैं कि इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है. इस बीच पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिएक्शन भी देखने को मिला है. बुधवार सुबह जगदीप धनखड़ ने एक ट्वीट किया है. ट्वीट में उन्होंने बताया हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उनसे कॉल कर संसद में हुई घटना पर बात की. इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
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क्या है पूरा मामला?
विपक्ष के 141 सांसदों को दो दिनों के भीतर संसद के शीतकालीन सत्र से निलंबित कर दिया गया है. इसी के विरोध में मंगलवार को विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे. उसी बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी सभापति धनखड़ की मिमिक्री (नकल) करते हुए दिखाई दिए थे. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाते भी नजर आए. इसी पर धनखड़ नाराज हो गए और उन्होंने सदन में इसपर प्रतिक्रिया देते हुए हास्यास्पद और अस्वीकार्य बताया था. इससे कुछ दिन पहले धनखड़ के पीएम मोदी को झुक कर प्रणाम करने पर भी विपक्षी नेताओं ने उनका मजाक बनाते हुए उन्हें पद की गरिमा को बचाए रखने की नसीहत दी थी.
पिछले 20 सालों से सहता आ रहा हूं ऐसा अपमान: पीएम मोदी
अब सभापति धनखड़ ने ट्वीट कर बताया है कि, ‘पीएम मोदी ने मुझे कॉल करके कल की घटना जो देश की पवित्र संसद में कुछ सांसदों ने घृणित नाटकीयता की थी पर बहुत दुख व्यक्त किया’. उन्होंने मुझे बताया कि वह पिछले बीस सालों से इस तरह के अपमान सहते आ रहे हैं, लेकिन ऐसी घटना भारत के उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के साथ और वह भी संसद में होना दुर्भाग्यपूर्ण है. पीएम की बातों पर सभापति धनखड़ ने जवाब दिया कि, ‘श्रीमान प्रधानमंत्री जी कुछ लोगों की हरकतें मुझे अपना कर्तव्य निभाने और हमारे संविधान में निहित सिद्धांतों को बनाए रखने से नहीं रोक पाएंगी. मैं तहे दिल से उन मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हूं. कोई भी अपमान मुझे अपना रास्ता बदलने पर मजबूर नहीं कर सकता.’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की भी आई प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति मुर्मू ने ट्वीट कर इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने लिखा है कि, ‘जिस तरह से हमारे सम्मानित उपराष्ट्रपति को संसद परिसर में अपमानित किया गया उसे देखकर मुझे निराशा हुई. निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्र होना चाहिए, लेकिन उनकी अभिव्यक्ति गरिमा और शिष्टाचार के मानदंडों के भीतर होनी चाहिए. यह संसदीय परंपरा रही है जिस पर हमें गर्व है और भारत के लोग उनसे इसे कायम रखने की उम्मीद करते हैं’.
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