एक तरफ देश में नौकरियों की किल्लत, परीक्षाओं में पेपर लीक के घाव और जगह-जगह चुनाव आयोग से लेकर सरकारों के खिलाफ सड़कों पर फूटा युवाओं का गुस्सा! जब दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग कोनों में युवाओं का आक्रोश सिस्टम को हिला रहा है, ठीक उसी माहौल के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने एनडीए के सबसे मजबूत किले यानी आंध्र प्रदेश को भी हिलाकर रख दिया है.
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वायरल वीडियो में दिख रहा है कि मंच पर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भाषण देने खड़ी होती हैं, लेकिन अचानक युवाओं की हूटिंग और नारों के बीच उन्हें अपना भाषण रोकना पड़ता है. मदनपल्ले के इस लाइव ड्रामे को जैसे ही कांग्रेस ने लपका, देश की राजनीति में एक नया और बेहद आक्रामक नैरेटिव वॉर छिड़ गया. कांग्रेस के जयराम रमेश ने इस क्लिप को शेयर कर सीधा वार किया- वित्त मंत्री खुद देख रही हैं जनता में कितनी नाराज़गी है. मुख्यमंत्री को लोगों को चुप कराना पड़ा. सीजेपी के सौरव दास भी इस विवाद में कूद पड़े ये कहते हुए कि यह वाकई एक बड़ी हलचल का समय लग रहा है. लोकतंत्र में जब जनता अपने अधिकारों के लिए सक्रिय होती है, तो व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं.
कहानी यहीं खत्म नहीं होती. नैरेटिव की इस जंग में खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन और सालों बाद पहली बार खुद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सोशल मीडिया पर सीधे फ्रंट फुट पर आ गए हैं. सरकार लगातार इस हूटिंग को छिपाने और एक 'अलग नैरेटिव, अलग तस्वीर' दिखाने की कोशिश कर रही है कि यह गुस्सा नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं का उत्साह था. आखिर क्या है इस 'मदनपल्ले संग्राम' का पूरा सच?
ये सब कुछ हुआ 2 अक्तूबर को आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में. मौका था भव्य 'ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब' के शिलान्यास का. मंच पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उप-मुख्यमंत्री पवन कल्याण और उद्योगपति अनंत अंबानी मौजूद थे. निर्मला सीतारमण जैसे ही पोडियम पर भाषण देने खड़ी हुईं, भीड़ की तरफ से भारी शोर और नारेबाजी होने लगी. निर्मला सीतारामन तेलुगू भी जानती हैं. उन्होंने तेलुगू में भी लोगों को शांत रहने की कोशिश की लेकिन नारेबाजी होती रही.
वित्त मंत्री का भाषण पूरी तरह ठप नहीं हुआ था
बढ़ते शोर के कारण वित्त मंत्री को अपना भाषण बीच में ही रोकना पड़ा. वित्त मंत्री का भाषण पूरी तरह ठप नहीं हुआ था. सोशल मीडिया पर केवल 30 सेकंड की क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें शोर के कारण उन्हें रुकना पड़ा. स्थिति को भांपते हुए खुद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को अपनी सीट से उठकर माइक संभालना पड़ा और उन्होंने बेहद सख्ती से अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जब भीड़ पूरी तरह शांत हो गई और स्थिति नियंत्रण में आ गई, तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोबारा अपना भाषण शुरू किया और उसे पूरा किया.
मंच का यह ड्रामा जैसे ही खत्म हुआ, सोशल मीडिया पर महाभारत शुरू हो गई. कांग्रेस के जयराम रमेश ने समारोह का वीडियो शेयर करते हुए निर्मला के भाषण में हुए डिस्रप्शन को जनता की नाराजगी करार दे दिया. सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग दावे कर रहे हैं कि रायलसीमा के स्थानीय युवाओं ने वित्त मंत्री के सामने "पहले नौकरियां दो" (Give jobs first) के नारे लगाए हैं और यह वीडियो देश में बढ़ रही बेरोजगारी का प्रमाण है.
कांग्रेस के इस बड़े हमले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शांत नहीं बैठीं. उन्होंने जयराम रमेश के पोस्ट के नीचे सीधे कमेंट बॉक्स में जाकर बेहद आक्रामक शैली में जवाब दिया. वित्त मंत्री ने लिखा-Unbelievable, Jairam मैंने नहीं सोचा था कि आप इतने जल्दबाज (impetuous) निकलेंगे. वहां मौजूद टीडीपी और जनसेना के कार्यकर्ता सिर्फ अपने प्रिय नेताओं चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण से बात करने के लिए उतावले थे. मुख्यमंत्री ने सिर्फ इतना कहा था कि कार्यक्रम के बाद वे उनसे मिलेंगे. बस इतनी सी ही बात थी. बीजेपी ने भी पलटवार किया कि कांग्रेस की सोच का जवाब नहीं: इतनी बौखलाई हुई है कि जनता के उत्साह को भी विवाद का रंग दे दिया.
इस जंग में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू खुद X वार में कूद पड़े. सोशल मीडिया पर सीधे तू-तू मैं-मैं से बचने वाले नायडू ने जयराम रमेश को टैग करते हुए लिखा, "जयराम जी, आपका यह आंकलन असलियत से कोसों दूर है. जिसे आप जानबूझकर 'जनता का गुस्सा' बताने की झूठी कोशिश कर रहे हैं, वह वास्तव में जनता का 'अभूतपूर्व उत्साह' था. भीड़ के इसी उत्साह के चलते मुझे बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि सरकारी कार्यक्रम सही से चल सके.
सोशल मीडिया की रोज-रोज की किचकिच में नहीं पड़ते चंद्रबाबू नायडू
चंद्रबाबू नायडू अपने काम से काम रखते हैं. सोशल मीडिया की रोज-रोज की किचकिच में नहीं पड़ते. आमतौर पर या तो पार्टी का स्टैंड क्लियर करने आते हैं या प्रचार करने या नेताओं से सलाम-नमस्ते करने. आरोपों का जवाब देने तो कतई प्रकट नहीं होते. कभी किसी विपक्षी नेता के व्यक्तिगत ट्वीट को सीधे कोट (Quote) या रिप्लाई करके बहस में नहीं उलझते. न जाने जयराम रमेश ने ऐसा क्या लिखा कि खुद उन्हें सोशल मीडिया पर आकर जवाब देना पड़ा जिसमें कथित तौर पर उनसे या उनकी सरकार से नाराजगी का कोई दावा नहीं किया गया था. जब वे आंध्र प्रदेश में विपक्ष में थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और वाईएसआरसीपी (YSRCP) के नेताओं के साथ उनकी तीखी बयानबाजी होती थी. लेकिन तब भी वह सीधे एक्स पर रिप्लाई करने के बजाय प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे या उनकी पार्टी की सोशल मीडिया विंग जवाब देती थी.
प्रशासनिक मोर्चे पर भी इस डैमेज को कंट्रोल करने की कवायद तुरंत शुरू हुई. अन्नमय्या जिले के कलेक्टर निशांत कुमार ने इस पूरे हंगामे को नौकरी का विरोध बताने वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कलेक्टर ने कहा कि युवाओं की तरफ से किया गया शोर नौकरियों को लेकर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि वो अपने नेताओं के स्वागत में उमड़ा एक सामान्य उत्साह था. मदनपल्ले की इस एक घटना ने देश के सियासी गलियारों को दो हिस्सों में बांट दिया है. विपक्ष के लिए यह देश के युवाओं की 'बेरोजगारी की वो चीख' है जो बंद कमरों से निकलकर अब मंचों तक पहुंच रही है, तो सरकार के लिए यह 'नेताओं की लोकप्रियता का शोर' है.
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