27 हजार करोड़ का मेगा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट... हमेशा के लिए खत्म! मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने वो कर दिया है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. किसानों के आंदोलन के आगे सरकार झुक गई. एयरपोर्ट का प्लान कैंसल हो गया लेकिन कहानी में ऐसा सस्पेंस आ गया है, जिसने किसानों की नींद उड़ा दी है. एयरपोर्ट रद्द हो गया, लेकिन किसानों की 1,800 एकड़ जमीन सरकार वापस नहीं करेगी. सरकार ने साफ कह दिया कि जमीन वापस नहीं होगी, वहां फैक्ट्रियां लगेंगी. तमिलनाडु में अब विजय की सरकार इन सवालों से घिरी है कि ये विकास की जीत है या किसानों के साथ बहुत बड़ा खेल? विपक्ष कह रहा है- विजय ने तमिलनाडु का भविष्य 10 साल पीछे धकेल दिया. किसान पूछ रहे हैं- जब एयरपोर्ट नहीं बन रहा, तो हमारी पुश्तैनी जमीन क्यों हड़प रहे हो?
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तमिलनाडु सरकार ने परंदूर में बनने वाले 27,400 करोड़ रुपये के भव्य ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को पूरी तरह रद्द कर दिया. सीएम सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में खुद इस फैसले का आधिकारिक ऐलान किया. जब किसानों की जमीन पर एयरपोर्ट बनाने से मना किया तो लगा कि सरकार की बड़ी वाहवाही होगी कि किसानों से कितना प्यार करते हैं. विजय की सरकार ने कहा भी किसानों की उपजाऊ जमीन और रिहायशी इलाकों को तबाह करके विकास नहीं चाहते.
दूसरा खेल तब सामने आया जब उद्योग मंत्री एस. कीर्तना ने विधानसभा में नया एलान किया कि पहले से अधिग्रहित की जा चुकी 1,802 एकड़ जमीन को किसानों को वापस नहीं लौटाई जाएगी. जमीन सरकार अपने ही रखेगी ताकि कोई और काम कर सके. सरकार एयरपोर्ट तो नहीं बना रही, लेकिन किसानों से ली गई करीब 1,800 एकड़ जमीन वापस भी नहीं कर रही है! इसे लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक संग्राम छिड़ गया है.
किसान और ग्रामीण विरोध कर रहे थे
चेन्नई को दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात देने वाला परंदूर प्रोजेक्ट डीएमके की स्टालिन सरकार ने 2022 में घोषित किया था. प्रोजेक्ट का स्थानीय किसान और ग्रामीण पिछले 1000 से अधिक दिनों से लगातार विरोध कर रहे थे. ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रोजेक्ट से 13 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि, जलाशय और सैकड़ों परिवार पूरी तरह बर्बाद हो जाते. चुनाव से पहले नेता के तौर पर किसानों के बीच पहुंचे जोसेफ विजय ने वादा किया था कि वो सत्ता में आए तो परंदूर को बचाएंगे. सीएम बनने के बाद उन्होंने अपना वादा निभाया और प्रोजेक्ट को रद्द करने का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया. एयरपोर्ट के लिए कुल 5,700 एकड़ से ज्यादा जमीन की जरूरत थी.
पिछली सरकार के समय तक इसका 48% हिस्सा करीब 1,802 एकड़ जमीन कानूनी रूप से अधिग्रहित किया जा चुका था. विजय ने ऐलान किया कि बाकी बची 52% जमीन जिसमें उपजाऊ खेत और गांव थे को अब जबरन नहीं लिया जाएगा और वहां एयरपोर्ट नहीं बनेगा. लेकिन जो 1,802 एकड़ जमीन पहले ही सरकार के नाम हो चुकी है, उसे सरकार अपने पास ही रखेगी. एक बार जब सरकार किसी जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लेती है, उसका मुआवजा तय या भुगतान कर देती है, और जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है, तो उसे कानूनी रूप से मूल मालिकों को वापस सौंपना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है. सरकार मानती है कि यह जमीन अब सरकारी संपत्ति है और इसका इस्तेमाल जनहित के दूसरे कामों में किया जा सकता है.
एयरपोर्ट रद्द होने से किसान बेहद खुश हैं, उन्होंने मिठाइयां बांटी और पटाखे फोड़े. लेकिन इस खुशी के बीच एक बड़ा झटका भी लगा. विपक्ष सवाल उठा रहा है कि प्रोजेक्ट के लिए जो 48 फीसदी यानी करीब 1,802 एकड़ जमीन पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है, उसे सरकार वापस क्यों नहीं कर रही? विधानसभा में उद्योग मंत्री एस. कीर्तना ने कहा कि इस जमीन को वापस करने के बजाय सरकार यहां पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक प्रोजेक्ट्स लगाएगी, जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके. सरकार का तर्क है कि इस क्षेत्र में खेती के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी संतुलित रखा जाएगा.
राज्य के युवाओं के रोजगार के सपनों की बलि
पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को विजय का ये फैसला कतई पसंद नहीं आया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए राज्य के युवाओं के रोजगार के सपनों की बलि दे दी गई. अन्नामलाई ने तीखा सवाल उठाया कि बिना किसी वैकल्पिक जगह की तलाश किए इतना बड़ा प्रोजेक्ट क्यों रद्द किया गया? नए एयरपोर्ट की तलाश में अब तमिलनाडु का इंफ्रास्ट्रक्चर 10 साल पीछे चला जाएगा. परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए ली गई जमीन के लिए सरकार मुआवजा दे चुकी है लेकिन विधानसभा में सरकार ने खर्च का कोई सटीक आंकड़ा दिया नहीं कि जिस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द कर रहे उस पर सरकार का कितना खर्च हुआ?
चेन्नई के मौजूदा हवाई अड्डे (Meenambakkam Airport) पर बढ़ते भारी दबाव को कम करने और तमिलनाडु को एक बड़ा ग्लोबल बिजनेस हब बनाने के लिए परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी. चेन्नई का मौजूदा हवाई अड्डा हर साल करीब 3 करोड़ यात्रियों को संभाल रहा है. एयरपोर्ट शहर के बीचों-बीच स्थित है, जिसके कारण इसके चारों तरफ जमीन ही नहीं बची है कि इसका बड़े पैमाने पर विस्तार (Expansion) किया जा सके. अनुमान है कि अगले कुछ सालों में यहां आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या मौजूदा क्षमता से कहीं ज्यादा हो जाएगी, जिससे निपटने के लिए दूसरे बड़े एयरपोर्ट की जरूरत थी.
तमिलनाडु ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल का बहुत बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है. इन उद्योगों के हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स को दुनिया भर के बाजारों में तेजी से भेजने के लिए एक विशाल कार्गो टर्मिनल की सख्त जरूरत थी. ये भी एक कारण था कि एक ही एयरपोर्ट होने के कारण फ्लाइट्स की लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए रनवे पर दबाव बहुत ज्यादा रहता है. दूसरा एयरपोर्ट होने से आपातकालीन स्थितियों में एयर ट्रैफिक को आसानी से डायवर्ट किया जा सकता है.
परंदूर की लोकेशन रणनीतिक रूप से चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक कॉरिडोर के बेहद करीब चुनी गई थी. परंदूर को केवल एक साधारण हवाई अड्डे के तौर पर नहीं, बल्कि अगले 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था. इसकी अंतिम क्षमता सालाना 10 करोड़ यात्रियों को संभालने की थी. इसे बेंगलुरु एक्सप्रेसवे और चेन्नई मेट्रो फेज-2 के विस्तार से जोड़ा जाना था ताकि यात्रियों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो. दिल्ली के पास जेवर एयरपोर्टऔर मुंबई के पास नवी मुंबई एयरपोर्ट की तर्ज पर चेन्नई के पास भी एक आधुनिक ग्रीनफील्ड ट्विन-एयरपोर्ट (Twin Airport) होना बेहद जरूरी माना जा रहा था, ताकि ग्लोबल कंपनियां निवेश के लिए तमिलनाडु को प्राथमिकता दें.
आलोचनाओं के जवाब में सरकार ने साफ किया है कि चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की योजना को छोड़ा नहीं गया है, बल्कि किसी वैकल्पिक और ऐसी जगह की तलाश जारी है जहां उपजाऊ खेती और रिहायशी इलाकों को कम से कम नुकसान हो.
चेन्नई को दूसरे बड़े हवाई अड्डे की जरूरत है
परंदूर प्रोजेक्ट रद्द होने के बाद अब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार दो मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है: पहला, मौजूदा हवाई अड्डे का तुरंत विस्तार करना और दूसरा, बिना किसी बड़े विवाद के नए एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक जगह खोजना. चेन्नई एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव तुरंत कम करने के लिए सरकार शॉर्ट-टर्म (Short-term) प्लान पर काम कर रही है:नया टर्मिनल 5 (Terminal 5): विधानसभा में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के सहयोग से चेन्नई हवाई अड्डे के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक आधुनिक टर्मिनल 5 विकसित किया जाएगा. इस नए टर्मिनल तक यात्रियों की आसान पहुंच के लिए एक एप्रोच रोड और फ्लाईओव्हर का निर्माण किया जाएगा. इस विस्तार से मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता में सालाना करीब 2 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को संभालने की ताकत आ जाएगी.
मुख्यमंत्री विजय ने माना है कि चेन्नई को दूसरे बड़े हवाई अड्डे की जरूरत है, लेकिन ये वहां बनेगा जहां कृषि भूमि, जलाशयों और इंसानी बस्तियों को न्यूनतम नुकसान हो. जिन वैकल्पिक स्थानों पर दोबारा विचार और फिजिबिलिटी स्टडी शुरू की गई है, उनमें चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के पास पन्नूर, चेंगलपट्टू जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) के पास पडालम, चेन्नई के प्रमुख आईटी कॉरिडोर के पास तिरुप्पोरुर के साथ शामिल हैं.
सरकार ऐसे गैर-कृषि और कम आबादी वाले बंजर इलाकों का नक्शा तैयार कर रही हैं जहां बिना किसी स्थानीय विरोध या भूमि अधिग्रहण विवाद के काम शुरू किया जा सके. हालांकि नए सिरे से जमीन खोजने में समय लग सकता है. जहां भी जमीन लेंगे वहां जमीन का ही विवाद होना है क्योंकि कोई किसान खुशी से अपनी जमीन देना नहीं चाहता. विजय की सरकार ने एक मुहल्ले की जमीन छोड़कर किसी और मुहल्ले की जमीन की तलाश कर रही है लेकिन सवाल ये है कि क्यों.
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