Shesh Bharat: विजय की फिल्म अटकी, शिवाकार्तिकेयन की मुश्किलें बढ़ीं, तमिलनाडु में गरमाई राजनीति

Shesh Bharat: शिवाकार्तिकेयन की फिल्म पराशक्ति रिलीज के बाद राजनीतिक विवाद में फंस गई है. कांग्रेस और डीएमके ने इंदिरा गांधी की छवि खराब करने और गलत इतिहास दिखाने का आरोप लगाया है. 600 से ज्यादा शो रद्द हुए हैं और कमाई तेजी से गिर गई है.

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रूपक प्रियदर्शी

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Shesh Bharat: तमिलनाडु में चुनाव से पहले थलापति विजय की आखिरी फिल्म जननायकन को लेकर राजनीतिक विवाद हुई तो अचानक चर्चा में आ गई शिवाकार्तिकेयन की फिल्म पराशक्ति. पहले ये चर्चा हुई कि शिवा और विजय की बड़ी फिल्मों में टकराव होगा. फिर दोनों फिल्मों की एक साथ सेंसर सर्टिफिकेट फंसी लेकिन एक दिन पहले शिवा की फिल्म पराशक्ति को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट दे दिया. फिल्म रिलीज होने के बाद बढ़िया चलने भी लगी लेकिन फिल्म देखने के बाद ऐसा विवाद छिड़ा कि फिल्म को भारी नुकसान हो चला. 

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पराशक्ति 10 जनवरी को रिलीज हुई और 14 जनवरी को शिवाकार्तिकेयन दिल्ली में पीएम मोदी के साथ पोंगल सेलिब्रेट करते दिखे. तब तक ये चर्चा तेज हो चली कि एंटरटेनमेंट के नाम पर पराशक्ति तो प्रोपेगंडा फिल्म है जो इंदिरा गांधी के बारे में नेगेटिव हैं. पराशक्ति का सीधा कनेक्शन जुड़ा मोदी और शिवाकार्तिकेयन की मुलाकात और कांग्रेस-बीजेपी की लड़ाई से. 4 दिन में बढ़िया कमाई कर रही पराशक्ति अचानक औंधे मुंह गिर पड़ी है. कांग्रेस-डीएमके ने पराशक्ति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया कि इंदिरा गांधी की बुराई करने के लिए शिवाकार्तिकेयन ने फिल्म बनाई. 

यूथ कांग्रेस ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की

तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. आरोप है कि फिल्म में कांग्रेस और इंदिरा गांधी को villainous की तरह पेश किया गया. ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप लगा है कि फिल्म 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलनों से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश करती है. फिल्म में मनगढ़ंत फैक्ट दिखाए गए कि उस समय डाकघरों के फॉर्म केवल हिंदी में थे. फिल्म में दिखाया कि इंदिरा गांधी कोयंबटूर आईं, ट्रेन जलने की घटना देखी और हिंदी विरोधी हस्ताक्षर स्वीकार किए. कांग्रेस ने दावा किया है ऐसे मनगढ़त फैक्ट्स से इंदिरा गांधी की गलत इमेज दिखाई गई. 

सोशल मीडिया पर #BanParasakthiMovie करने लगा ट्रेंड

विवाद बढ़ने के साथ पूरे देश में पराशक्ति के 600 से ज्यादा शोज कैंसल कर दिए गए. इंडिया टुडे रिपोर्ट के मुताबिक पहले थियेटर्स में पूरे देश में 2 हजार 37 शोज लगे थे. जो घटकर 1400 रह गए. फिल्म ने पहले दिन 12 करोड़ से ज्यादा कमाए जो चौथे दिन ही दो ढाई करोड़ पर आ गया. 5 दिन में इतने बड़े स्टार की फिल्म सिर्फ 30 करोड़ कमा पाई जबकि किसी बड़ी फिल्म से उसकी टक्कर नहीं हो रही है.  सोशल मीडिया पर #BanParasakthiMovie ट्रेंड कर रहा है. 

फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट मान रहे हैं कि पराशक्ति के लिए वापसी करना मुश्किल होगा क्योंकि फिल्में पहले एक हफ्ते में ही सबसे ज्यादा चलती हैं. राजनीतिक विवाद, गलत हिस्टोरिकल फैक्ट्स, प्रोटेस्ट और नेगेटिव कैंपेन की शक्तियों ने पराशक्ति की वाट लगा दी. पराशक्ति ऐसी फिल्म बन सकती है जो हिट होते-होते फ्लॉप होने की स्थिति में पहुंच गई है. 

पराशक्ति शिवाकार्तिकेयन को बैकफायर कर रहा

थलापति विजय के जननायकन के दूर-दूर तक नहीं होने के बाद भी पराशक्ति शिवाकार्तिकेयन को बैकफायर कर रहा है. शिवाकार्तिकेयन और डायरेक्टर सुधा कोंगारा समझाकर थक रहे कि फिल्म एंटरनेटमेंट के लिए बनाई है. पॉलिटिकल प्रोपेगंडा के लिए नहीं लेकिन इस सफाई के बाद भी लोग थियेटर्स की ओर भाग नहीं रहे.

शिवाकार्तिकेयन या पराशक्ति का बीजेपी से कोई सीधा रिलेशन नहीं लेकिन बीजेपी-कांग्रेस की लड़ाई में हो जो रहा है वो शॉक्ड करने वाला है. कहां तो जननायकन से टक्कर होने वाली थी. अब अकेले रिलीज के बाद भी फिल्म का सरवाइव करना मुश्किल हो रहा है. लेकिन तमिलनाडु बीजेपी पराशक्ति को डिफेंड करने सामने आए. तमिलिसाई सौंदर्यराजन ने राहुल गांधी पर सवाल दागा कि  कांग्रेस अभिव्यक्ति की आजादी पर क्यों बोल रही है जिसने इमरजेंसी के दौरान आवाजें दबाईं थीं.  

केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के घर पोंगल सेलिब्रेशन

तमिलनाडु के बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के घर पोंगल सेलिब्रेशन में पीएम मोदी आए थे. वहीं पर पराशक्ति की पूरी कास्ट लेकर शिवाकार्तिकेयन और रवि मोहन भी पहुंचे थे. तब कनेक्शन जुड़ा कि तमिलनाडु चुनाव के चलते और विजय के मुकाबले शिवा को पीएम मोदी भाव दे रहे हैं. इंदिरा गांधी के खिलाफ नेगेटिव और प्रोपेगंडा के बाद पराशक्ति और मोदी से मुलाकात का मामला एकदम पॉलिटिकल हो रहा है. राजनीति से दूर रहने वाले शिवाकार्तिकेयन ख्वामखाह राजनीति में बुरे फंसे हैं.

पराशक्ति और शिवाकार्तिकेयन के लिए राहत ये है कि विजय की फिल्म जनकायकन की रिलीज की डेट नहीं आई है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि मद्रास हाईकोर्ट को सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर 20 जनवरी तक फैसला लेना है. हाईकोर्ट में पहले ही विजय के पक्ष और विरोध में अलग-अलग दो ऑर्डर आ चुके हैं. तीसरा ऑर्डर ही फिल्म का फ्यूचर डिसाइड करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से मना कर दिया है. विजय के लिए ये मुश्किल है लेकिन विजय की मुश्किल अब शिवाकार्तिकेयन के लिए कोई एडवांटेज नहीं क्योंकि मैदान में अकेले खेलकर भी मैच नहीं जीत पा रहे.

विजय की फिल्म इसलिए फंसी मानी जा रही है क्योंकि उन्हें तमिलनाडु में चुनाव लड़ना है. उनकी नजर आखिरी फिल्म पहली राजनीतिक लड़ाई जीतने पर है और ये डीएमके और बीजेपी को सूट नहीं कर रहा है. फिर भी 20 जनवरी तक ये फैसला हो जाएगा कि जननायकन चुनाव से पहले रिलीज होगी या नहीं.

 

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