प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने योजना के आंकड़ों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. टैगोर ने कहा कि सरकार योजना को लेकर बड़े दावे कर रही है. लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है. उन्होंने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया है.
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2,000 करोड़ के बजट में खर्च सिर्फ 29.29 करोड़
टैगोर के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए 2,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था. लेकिन सरकार ने इसमें से सिर्फ 29.29 करोड़ रुपये खर्च किए. यानी तय बजट का करीब 1.5 फीसदी पैसा ही खर्च हो पाया. करीब 98.5 फीसदी रकम खर्च नहीं हुई.
2.45 लाख अवसर, लेकिन सिर्फ 16,060 युवाओं ने जॉइन किया
यह मामला संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, योजना के शुरुआती दो चरण में 2.45 लाख से ज्यादा इंटर्नशिप के अवसर दिए गए. इसमें 350 से ज्यादा कंपनियां शामिल हुईं. लेकिन इन अवसरों के मुकाबले इंटर्नशिप शुरू करने वाले युवाओं की संख्या बहुत कम रही.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चरण में सिर्फ 16,060 युवाओं ने इंटर्नशिप जॉइन की. लेकिन पहले ही चरण में करीब 53.6 फीसदी युवाओं ने बीच में ही इंटर्नशिप छोड़ दी.
युवाओं ने क्यों छोड़ी इंटर्नशिप?
संसदीय समिति ने इंटर्नशिप छोड़ने के कई कारण बताए हैं, जैसे- कई युवा अपने घर के पास ही इंटर्नशिप करना चाहते हैं. दूसरे शहर में जाने में उन्हें परेशानी होती है. इंटर्नशिप की अवधि भी 12 महीने है. कुछ युवाओं को यह टाइम ज्यादा लगा.
इसके अलावा मिलने वाली आर्थिक मदद भी कई युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं है. इसमें रहने और आने-जाने का खर्च उठाना मुश्किल होता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में 6,000 रुपये की एकमुश्त मदद मिलने के बाद युवाओं ने इंटर्नशिप छोड़ दी. आधार और पात्रता से जुड़ी दिक्कतों के कारण स्टाइपेंड मिलने में देरी की शिकायत भी सामने आई है.
महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के सामने ज्यादा परेशानी
समिति ने महिला उम्मीदवारों को लेकर भी चिंता जताई है. दूसरे शहर में जाना, आने-जाने और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें महिलाओं के लिए बड़ी समस्या हो सकती हैं. ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. समिति ने कहा है कि योजना को सफल बनाने के लिए इन समस्याओं को दूर करना जरूरी है.
उम्र और पात्रता नियम बदलने की सिफारिश
संसदीय समिति ने योजना में बदलाव करने की सलाह दी है. समिति ने युवाओं की पात्रता बढ़ाने की बात कही है. इसमें 10वीं, 12वीं, ITI और डिप्लोमा पास युवाओं को ज्यादा अवसर देने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही यात्रा, रहने और दूसरी जगह जाने के खर्च में मदद देने पर भी विचार करने को कहा गया है.
मणिकम टैगोर ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि सरकार के दावों और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजना के प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है. वहीं, योजना के लिए रखा गया पैसा पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया.
टैगोर ने कहा कि ये आंकड़े सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए.
क्या है प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना?
केंद्र सरकार ने युवाओं को देश की शीर्ष कंपनियों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देने और उन्हें रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना' की शुरुआत की थी. इस योजना की घोषणा बजट 2024 में की गई थी और अक्टूबर 2024 में इसका पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया था. योजना के तहत युवाओं को 12 महीने के लिए टॉप कंपनियों में इंटर्नशिप करने का मौका मिलता है.
कितना मिलता है स्टाइपेंड और आर्थिक मदद?
योजना के तहत चुने गए युवाओं को हर महीने कुल 5,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है. इसमें से 4,500 रुपये सरकार देती है और 500 रुपये संबंधित कंपनी अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से देती है. इसके अलावा, इंटर्नशिप जॉइन करने पर केंद्र सरकार की ओर से एकमुश्त (one-time) 6,000 रुपये की सहायता राशि भी दी जाती है.
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