नीट पेपर लीक के बाद जंतर-मंतर समेत देश के कई शहरों में Gen Z आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इधर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रल्हाद जोशी को घेरना शुरू कर दिया. राहुल गांधी ने कहा- ''शिक्षामंत्री के तौर पर बीजेपी ने एक ऐसे आदमी को रखा है जो रेपिस्ट का डिफेंडर (रक्षक) है. वह सबसे घटिया किस्म का आदमी है.''
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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी मंगलवार को लोकसभा में प्रहलाद जोशी को लेकर टिप्पणी की. इसे लेकर सत्तापक्ष में हंगामा हो गया. मामला बढ़ता देख स्पीकर ओम बिड़ला ने प्रियंका गांधी के उस बयान को सदन की कार्यवाही से हटा दिया. हालांकि प्रियंका गांधी रुकी नहीं. वो जब सदन से बाहर आई तो फिर शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर टिप्पणी की. साथ ही राहुल गांधी ने भी उन्हें लेकर कहा कि पीएम का ये अजीब रिएक्शन है. कैबिनेट में इतने सारे लोग थे वे किसी को भी चुन सकते थे. उन्होंने ऐसे आदमी को चुना जो रेपिस्ट को बचाता है.'' सवाल ये कि प्रियंका गांधी ने जिस बयान को लेकर नए शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाए हैं, उस बयान में प्रह्लाद जोशी ने कहा क्या था?
क्या है ये पूरा मामला ?
दरअसल, 3 मार्च 2002 को गोधरा कांड के बाद दंगों के दौरान दाहोद जिले के लिमखेड़ा तालुका में भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया था. उनकी तीन साल की बेटी सालेहा समेत 14 लोगों की हत्या कर दी गई. घटना के वक्त बिलकिस प्रेग्नेंट थीं. 2008 में मामले के 11 दोषियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके 14 साल बाद 15 अगस्त 2022 को गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया. सरकार ने इसके लिए जेल सलाहकार समिति (जेएसी) की सिफारिश का हवाला दिया गया, जिसमें ‘अच्छे व्यवहार’ के आधार पर दोषियों को सजा में छूट देने की बात कही गई थी. जेल से रिहा होने के बाद दोषियों का माला पहनाकर स्वागत किया गया था, जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी.
तब प्रह्लाद जोशी ने क्या कहा था?
प्रह्लाद जोशी इस रिहाई का समर्थन करने वाले मोदी सरकार के पहले मंत्री थे. उस समय वो गुजरात के कच्छ में बीजेपी की ‘गौरव गुजरात यात्रा’ में हिस्सा ले रहे थे. इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बात करते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि ''जो कुछ भी किया गया है वह कानूनी प्रावधान के अनुसार है. जेल में निर्धारित समय बिताने के बाद रिहाई का प्रावधान है. इस मामले में उस प्रावधान का पालन किया गया है, जो पूरी तरह से कानूनी है.''
तब प्रह्लाद जोशी ने एनडीटीवी से कहा था- मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता, क्योंकि यह कानून की एक प्रक्रिया है. जेल में "काफी समय" बिताने वाले दोषियों की रिहाई के लिए एक प्रावधान है. कानून के अनुसार ऐसा किया जाता है."
बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषियों को देश भर में आक्रोश के बीच 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर रिहा किया गया था. गुजरात की जेल के बाहर वीरों की तरह इन दोषियों का माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया गया था.
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