कांग्रेस अब ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स और पुराने ढर्रे के नेताओं के भरोसे रहने के बजाय अपने संगठन को बिल्कुल नए रंग-रूप में ढालने जा रही है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बुजुर्ग नेताओं और कागजी राजनीति पर निर्भर चेहरे किनारे कर, जमीन पर मेहनत करने वाले युवाओं को आगे लाने का बड़ा प्लान तैयार किया है. मकसद साफ है- संगठन को ज्यादा आक्रामक, पेशेवर और समावेशी बनाया जाए.
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इसी रणनीति के तहत पार्टी में राष्ट्रीय सचिवों के चयन के लिए सीधी इंटरव्यू प्रक्रिया चल रही है. दिल्ली में देश भर से बुलाए गए नेताओं के इंटरव्यू खुद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ले रहे हैं.
30 नेताओं से हो चुकी बात, 120 का होगा चयन
अब तक करीब 30 नेताओं का इंटरव्यू हो चुका है, जिन्हें 10-10 के ग्रुप में बुलाकर सवाल-जवाब किए गए. राहुल गांधी के पास हर नेता के काम का पूरा रिपोर्ट कार्ड पहले से मौजूद है. रायबरेली दौरे से लौटने के बाद राहुल बाकी बचे नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी करेंगे. कुल मिलाकर 120 नेताओं में से नए राष्ट्रीय सचिवों को चुना जाना है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस अपने 60 फीसदी से ज्यादा मौजूदा सचिवों को बदलने के मूड में है. चयन में सबसे ज्यादा प्राथमिकता उन युवा चेहरों को दी जा रही है, जो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे हैं या जिन्होंने पार्टी के 'संगठन सृजन' अभियान में बतौर ऑब्जर्वर अपनी काबिलियत साबित की है.
दो दशक पुराना सपना अब हो रहा साकार
साल 2004 में राजनीति में कदम रखने के बाद से ही राहुल गांधी का मुख्य जोर 'जनरेशन चेंज' यानी युवाओं की नई पौध तैयार करने पर रहा है. इससे पहले उन्होंने यूथ कांग्रेस और NSUI में भी इंटरव्यू और टैलेंट-आधारित चयन के प्रयोग किए थे. हालांकि, उस वक्त पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विरोध और अंदरूनी खींचतान के कारण यह प्रयोग पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. जिला और प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक नए और युवा चेहरों की ताजपोशी का दौर शुरू हो चुका है.
सिफारिशी चिट्ठियों का दौर खत्म
राहुल गांधी का यह कदम साफ संदेश देता है कि अब पार्टी में जगह पाने के लिए किसी गॉडफादर या सिफारिशी चिट्ठी की जरूरत नहीं होगी. काम करने का जज्बा, जमीनी पकड़ और विजन ही पद पाने की इकलौती कसौटी होगी. कांग्रेस का यह नया रुख न केवल संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश है, बल्कि राजनीति में बदलाव की उम्मीद रखने वाले देश भर के युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है.
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