केरल विधानसभा चुनाव के शोर के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. कोट्टायम के पुतुपल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भविष्य में केरल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसी महिला को देखने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा कि केरल की महिलाओं में अपार संभावनाएं हैं और वे समाज में एक अलग पहचान रखती हैं. राहुल गांधी के इस इशारे के बाद चर्चाएं तेज हो गई है. आइए विस्तार से समझते है पूरी कहानी.
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साइकिल चलाकर किया चुनाव प्रचार
चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी एक अलग अंदाज़ में नज़र आए. वे कांग्रेस उम्मीदवार चांडी ओमान के साथ साइकिल चलाते हुए रैली स्थल तक पहुंचे. इस दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए कांग्रेस की 'पांच गारंटियों' को दोहराया, जिसमें सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता शामिल है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
राहुल गांधी का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब खुद कांग्रेस के भीतर महिलाओं को कम टिकट दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. केरल की राजनीति में महिलाओं की भूमिका को इन 7 बिंदुओं से समझा जा सकता है:
उम्मीदवारों की संख्या: केरल के लिए 140 विधानसभा सीटों पर कुल 457 उम्मीदवार है. लेकिन इसमें से महज 54 महिलाएं (10.5%) चुनावी मैदान में हैं.
टिकट वितरण: एनडीए ने सबसे ज्यादा 14, एलडीएफ ने 13 और यूडीएफ ने 12 महिलाओं को टिकट दिया है.
कांग्रेस बनाम बीजेपी: कांग्रेस ने 9 महिला उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि बीजेपी ने 11 महिलाओं को टिकट दिया है.
वोटर शक्ति: केरल में महिला वोटर्स (1.39 करोड़) की संख्या पुरुष वोटर्स (1.32 करोड़) से अधिक है, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं.
विधायकों का इतिहास: अब तक सबसे ज्यादा 14 महिला विधायक 1996-2001 के दौरान रही हैं, तब सीपीएम के ईके नयरनार सीएम हुआ करते थे.
वर्तमान स्थिति: 140 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल केवल 12 महिला विधायक हैं.
मतदान प्रतिशत: 2016 में 88 सीटों पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने ज्यादा वोट डाले थे.
चुनौतियां और संभावनाएं
हालांकि राहुल गांधी ने महिला सीएम की उम्मीद जताई है, लेकिन हकीकत यह है कि केरल जैसे शिक्षित राज्य में भी सत्ता की राजनीति पर पुरुषों का ही दबदबा रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भी हाल ही में महिला उम्मीदवारों की कम संख्या पर नाराजगी जाहिर की थी. अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी का यह बयान केवल चुनावी वादा बनकर रह जाता है या वास्तव में यूडीएफ की जीत के बाद कोई महिला राज्य की कमान संभालेगी.
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