राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों से कांग्रेस को कितना होगा फायदा? राजदीप सरदेसाई ने बता दिया

न्यूज तक डेस्क

12 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 12 2026 5:56 PM)

क्या राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों और चुनाव आयोग के खिलाफ मुहिम से कांग्रेस को क्या वाकई चुनावी फायदा मिलेगा ? न्यूज तक के शो 'साप्ताहिक सभा' में राजदीप सरदेसाई और मिलिंद खांडेकर की चर्चा में सामने आया ?

NewsTak
सड़क पर विरोध प्रदर्शन से राहुल गांधी को कितना फायदा होगा ?
Google CTA

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम और सड़क पर उतरकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में बड़ी बहस छिड़ गई है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस तरह के आंदोलनों से विपक्ष या राहुल गांधी को चुनावी फायदा मिल सकता है? इसे लेकर न्यूज तक के खास कार्यक्रम साप्ताहिक सभा में इंडिया टुडे ग्रुप के Tak चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई से सवाल किए. जानें न्यूज के इस विश्लेषण में क्या बात सामने आई ? 

Read more!

चर्चा के दौरान यह बड़ा सवाल उठाया गया कि क्या इस तरह के राजनीतिक आंदोलनों से विपक्ष को चुनावी फायदा मिल सकता है या इसके लिए मजबूत सांगठनिक ढांचे की जरूरत है. चर्चा की शुरुआत इस बात से हुई कि पिछले साल बिहार चुनावों के दौरान एसआईआर (SIR) का मुद्दा हो या बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए कदम, विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है.

राजदीप सरदेसाई ने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी, वोटिंग राइट्स और निष्पक्षता जैसे मामलों पर सवाल उठाना विपक्ष का लोकतांत्रिक दायित्व है और लोगों को जागरूक करने के लिहाज से यह प्रयास सफल भी रहा है. 

लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी अहम है कि क्या सिर्फ इन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने से चुनाव जीते जा सकते हैं? बंगाल और बिहार जैसे राज्यों के उदाहरण सामने हैं, जहां बड़े आंदोलन के बावजूद आखिरकार बीजेपी ही चुनावी जीत दर्ज करने में सफल रही. चुनाव जीतने के लिए केवल आंदोलन काफी नहीं है, बल्कि एक मजबूत संगठन, स्पष्ट वैचारिक आधार और मजबूत नेतृत्व का होना बेहद जरूरी है, जहां विपक्ष आज भी भाजपा के मुकाबले कमजोर पड़ता दिखाई देता है. 

'इंडिया अलायंस' या 'कांग्रेस अलायंस'? विपक्षी दलों में खींचतान 

कार्यक्रम में इस बात पर भी रोशनी डाली गई कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी 'इंडिया गठबंधन' (India Bloc) के तमाम दलों के बीच एकमत जरूर है कि आयोग सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचा रहा है. हालांकि, जमीनी स्तर पर विपक्षी दलों में तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है. 

सपा और अन्य दलों की दूरी: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव जैसे नेता इस तरह के आंदोलनों से थोड़ी दूरी बनाते नजर आते हैं, क्योंकि उन्हें अंदेशा रहता है कि इन मुद्दों पर चुनाव लड़ने से राजनीतिक नुकसान हो सकता है. 

कांग्रेस केंद्रित बनता आंदोलन: अब यह पूरा संघर्ष काफी हद तक 'कांग्रेस केंद्रित' और 'राहुल गांधी केंद्रित' बन गया है, जिसके चलते गठबंधन के अन्य क्षेत्रीय दल असहज महसूस करने लगे हैं.

पारंपरिक कांग्रेस बनाम 'नई कांग्रेस' की सियासत 

राजदीप सरदेसाई ने विश्लेषण करते हुए कहा कि पारंपरिक रूप से कांग्रेस को हमेशा से 'सत्ता की पार्टी' (Party of Power) माना जाता रहा है, जो सड़क की लंबी लड़ाइयों के बजाय व्यवस्था के भीतर काम करती है. इसके विपरीत, वामदल या समाजवादी पार्टियां राम मनोहर लोहिया और सोशलिस्ट विचारधारा के तहत सड़क पर संघर्ष करने के लिए जानी जाती हैं. 

लेकिन राहुल गांधी अब यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और सेवा दल के कार्यकर्ताओं को आगे कर एक 'नई कांग्रेस' गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसे शशि थरूर या मनीष तिवारी रोजाना सड़कों पर इस तरह के प्रदर्शनों में नजर नहीं आते हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी को यह तय करना होगा कि वह सिर्फ सड़क पर आंदोलन करने वाली पार्टी बनना चाहती है या फिर बेरोजगारी, महंगाई और सूखे जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाते हुए अपने सांगठनिक ढांचे को जमीन पर मजबूत करेगी. 

Video: 'सर हजारों की भीड़ है...चोट लग जाएगी ' दिल्ली पुलिस की इस अपील पर राहुल गांधी का जवाब- दम है तो हटाकर दिखाओ