असम में चुनावी तपिश के बीच राजनीति की मर्यादाएं तार-तार होती नजर आ रही हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ 'पागल' जैसे अपशब्द का इस्तेमाल करने पर देशव्यापी राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इस बयान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोर्चा संभालते हुए हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा पर तीखा हमला बोला है. राहुल ने इसे न केवल खड़गे का अपमान बताया, बल्कि इसे देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर चोट करार दिया है. विस्तार से जानिए मामले की पूरी कहानी.
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राहुल गांधी का तीखा प्रहार और PM से सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबा पोस्ट लिखकर हिमंता बिस्वा सरमा की भाषा को 'अभद्र, घटिया और शर्मनाक' बताया. राहुल ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित नेता हैं और उनका अपमान करना भाजपा-आरएसएस की पुरानी दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. राहुल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए सवाल पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री की इस भाषा का समर्थन करते हैं? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इस मुद्दे पर चुप्पी उनकी 'मजबूरी नहीं बल्कि सहमति' है और वह इस अपमान के बराबर के हिस्सेदार हैं.
विवाद की जड़
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए. खेड़ा ने दावा किया कि हिमंता की पत्नी के पास कई देशों के विदेशी पासपोर्ट हैं और वे अमेरिका में बड़े होटल खोलने की योजना बना रही हैं. इसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी. खड़गे की इस मांग पर पलटवार करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें 'पागल' कहते हुए अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे सियासी आग और भड़क गई.
विपक्ष की एकजुटता और भाजपा का रुख
हिमंता के बयान के खिलाफ पूरी कांग्रेस ब्रिगेड मैदान में उतर आई है. जयराम रमेश ने इसे भाजपा की दलित विरोधी सोच का प्रमाण बताया, वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसकी कड़ी निंदा की. दूसरी ओर, हिमंता बिस्वा सरमा अपने रुख पर कायम हैं और उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है. असम चुनाव से ऐन पहले इस विवाद ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है और जुबानी जंग अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच गई है.
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