कांग्रेस शासित राज्यों पर बजट मेहरबान, तमिलनाडु, केरल को क्या मिला?

बजट 2026 में केंद्र ने विपक्षी राज्यों, विशेषकर कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का एलान किया है. दक्षिण के चुनावी राज्यों तमिलनाडु और केरल को भी इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती में बड़ी सौगातें मिली हैं. हालांकि, राहुल गांधी ने अभी चुप्पी साधी है, जबकि विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने इसे चुनावी वादे बताकर आलोचना की है.

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रूपक प्रियदर्शी

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देश का बजट सुनने के लिए राहुल गांधी रविवार के दिन भी संसद में आए लेकिन बजट रिएक्शन देने से मना कर दिया. कहा कि सोमवार को बोलेंगे. ये संभव है कि केवल निर्मला के बजट का भाषण सुनकर रिएक्शन न देना चाहते हैं, बजट के असली दस्तावेजों को पढ़कर कोई हाइड्रोजन बम निकालने की तैयारी में हों. 

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राजनीति में अक्सर चर्चा होती है कि केंद्र सरकार विपक्षी राज्यों के साथ कैसा बर्ताव करती है. जिन राज्यों में अपनी सरकारें होती हैं या जिन राज्यों की पार्टियों की बदौलत सरकार चलती है उनकी झोली में भर-भरकर मिलता है. पिछले दो साल से बजट में आंध्र और बिहार में खूब मिल रहा था लेकिन इस बार सरकार ने कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश को भी बहुत कुछ दे दिया. राहुल जब रिएक्शन देंगे तब उन्हें भी जरा सोच-समझकर बोलना होगा कि कांग्रेस शासित राज्यों की झोली में क्या गिरा.

सबसे पहले बात पैसे की. केंद्र सरकार ने इस बार राज्यों को मिलने वाले टैक्स के हिस्से में कोई कटौती नहीं की है. राज्यों को मिलने वाली 41% की हिस्सेदारी बरकरार है. यानी कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों को उनके विकास के लिए केंद्र के खजाने से ₹14 लाख करोड़ में से अपना तय हिस्सा मिलता रहेगा.

अब बात बड़े प्रोजेक्ट्स की. अगर आप बेंगलुरु या हैदराबाद में रहते हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है. बजट 2026 में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एलान हुआ है. इनमें से मुख्य कॉरिडोर हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु को जोड़ेंगे. यानी कांग्रेस शासित इन दोनों राज्यों में व्यापार और सफर अब रॉकेट की रफ्तार से दौड़ेगा.

हालांकि कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार इतने संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने सौतेला व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक देश को सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले राज्यों में से एक है, लेकिन बदले में उसे उसका जायज हक नहीं मिल रहा है. उन्होंने अपर भद्रा परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कि वादा करने के बाद भी सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए ₹5,300 करोड़ में से एक भी रूपया नहीं दिया. 

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए सरकार ने पर्यटन का नया मास्टरप्लान पेश किया है. यहां 'इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स' बनाए जाएंगे. इसका मतलब है कि अब हिमाचल के दुर्गम इलाकों में भी ऐसी राहें बनेंगी जहां दुनियाभर के टूरिस्ट पहुंचेंगे और स्थानीय लोगों की कमाई बढ़ेगी."

कर्नाटक के लिए एक अनोखा तोहफा है- 'टर्टल ट्रेल्स' (Turtle Trails). राज्य के तटीय इलाकों में कछुओं के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह खास प्रोजेक्ट शुरू होगा. इससे कर्नाटक का कोस्टल टूरिज्म श्रीलंका और थाईलैंड को टक्कर देगा."

सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर जोर दिया है. राज्यों के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का बजट रखा गया है ताकि सड़कों, पुलों और अस्पतालों का काम न रुके. रिकॉर्ड बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दक्षिण के राज्यों को इस बजट में नजरअंदाज नहीं किया गया. 

सुबह-सुबह जैसे ही वित्त मंत्री की बजट से पहले वाली तस्वीर आई तो दिखा कि उन्होंने तमिलनाडु की मशहूर कांजीवरम साड़ी पहनी है. वैसे तो निर्मला तमिलनाडु की ही हैं इसलिए कांजीवरम साड़ी पहनना कोई नई बात थी लेकिन चूंकि चुनाव तमिलनाडु में होने वाले हैं इसलिए कांजीवरम साड़ी सबके नजरों में आ गई. 

दक्षिण के दो बड़े राज्यों तमिलनाडु और केरल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी दोनों राज्यों में कुछ बड़ा करने की ताक में अरसे से है. बजट जरिया बढ़ा है राज्यों में अपनी चर्चा बढ़ाने का.  

चेन्नई को दो बुलेट ट्रेन कॉरिडोर और हैदराबाद और बेंगलुरु से सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिली है. 
चेन्नई में बनेगा रेयर अर्थ कॉरिडोर जिससे तमिलनाडु बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स का मैन्युफैक्चरिंग हब.
चेन्नई को हेल्थ हब बनाने के लिए देश के सबसे बड़े क्लीनिकल ट्रायल नेटवर्क में शामिल किया है. विरासत का सम्मान करते हुए आदिचनल्लूर को बनाया जाएगा ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन.

किसानों के लिए तोहफा ये है कि नारियल और काजू की खेती के लिए विशेष बजट दिया गया है. थूथुकुडी जिले के इस ऐतिहासिक स्थल को एक प्रमुख पुरातत्व पर्यटन गंतव्य (Archaeological Tourism Destination) के रूप में विकसित किया जाएगा.

सीएम एम के स्टालिन ने केंद्र को चेतावनी दी कि तमिलनाडु के लिए बजट घोषणाएं केवल "खाली वादे" बनकर न रह जाएं. उन्होंने मदुरै AIIMS का उदाहरण देते हुए कहा कि कई प्रोजेक्ट्स केवल घोषणाओं तक सीमित हैं और उनके लिए वास्तविक फंड और समयसीमा तय नहीं की गई है.

एक और चुनावी राज्य केरल पर भी सरकार ने नजर रखी है. राज्य की कुछ बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर मांगों (जैसे AIIMS) को इस बार भी जगह नहीं मिली है, लेकिन रणनीतिक उद्योगों के लिए केरल एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा.

केरल को देश के उन चार तटीय राज्यों में शामिल किया गया है जहाँ डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे. कॉरिडोर विझिनजम पोर्ट (Vizhinjam Port) को चावरा और कोच्चि से जोड़ेगा.
इससे दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) के खनन, प्रोसेसिंग और रिसर्च में केरल एक ग्लोबल हब बनेगा. इसमें लगभग ₹42,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है.

नारियल प्रोत्साहन योजना में भी केरल को शामिल किया गया है. सरकार ने 'कोकोनट प्रमोशन स्कीम' की घोषणा की है. इसके तहत पुराने पेड़ों को हटाकर नए और उन्नत किस्म के पौधे लगाने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी, जिसका सबसे बड़ा लाभ केरल के 10 लाख से अधिक नारियल किसानों को मिलेगा. कोच्चि-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से इंडस्ट्रियल हब वाला फायदा मिलेगा.

हालांकि सीएम विजयन ने सवाल उठाया कि AIIMS, रेलवे कोच फैक्ट्री जैसी मांगों को क्यों नजरअंदाज कर दिया. क्यों वायनाड पैकेज पर चुप्पी साधी. विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र उन राज्यों को "सजा" दे रहा है जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रगति कर रहे हैं, और बजट को केवल चुनावी लाभ के आधार पर तैयार किया गया है. 
 

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