Ram Madhav Statement: बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम माधव के एक हालिया बयान ने भारत की राजनीति में भूचाल ला दिया है. वॉशिंगटन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारत की विदेश नीति और तेल आयात पर कुछ ऐसी टिप्पणी कर दी जिसे लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उनके इस बयान को विपक्ष ने हाथों-हाथ लपक लिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'टोटल सरेंडर' का आरोप लगाया है. हालांकि, विवाद बढ़ता देख राम माधव ने माफी मांग ली है, लेकिन इस सेल्फ गोल ने विपक्ष को सरकार पर चौतरफा हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है.
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पहले जानिए क्या है पूरा मामला?
राम माधव वॉशिंगटन में ‘हडसन इंस्टीट्यूट कॉन्फ्रेंस’ में मौजूद थे. राम माधव एक पैनल चर्चा का हिस्सा थे, जिसमें अमेरिका की पूर्व राजनयिक एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड और अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल शामिल थे. वॉशिंगटन में दिए बयान को लेकर हंगामा दिल्ली में हो रहा है. राम माधव की जो क्लिप वायरल है उसमें वो कहते नजर आ रहे हैं कि
"भारत ईरान से तेल न खरीदने पर राजी हो गए. हम रूस से तेल खरीदना बंद करने पर राजी हो गए. भारतीय विपक्ष की भारी आलोचना के बावजूद, हम 50% टैरिफ पर राजी हो गए, राजी होने का मतलब है कि हमने कुछ नहीं कहा, हमने सब्र किया. 50% टैरिफ पर हम राजी हो गए… नई ट्रेड डील में भी हम 18% टैरिफ पर राजी हो गए, जो पहले से ज्यादा है. मेरा मतलब है एवरेज टैरिफ (से ज्यादा). तो भारत उसमें कहां पीछे रह गया है?"
बुनियादी तौर पर राम माधव का पैनलिस्ट्स से सवाल था कि आखिर ऐसे कौन से मुद्दे हैं जहां भारत अमेरिका के साथ काम करने में कमी कर रहा है?
राहुल गांधी का 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ' वाला प्रहार
विपक्ष पहली भी विदेश नीति, टैरिफ, तेल जैसे मुद्दों पर सरकार पर आक्रामक रही है. राम माधव के इस बयान के बाद और मौका मिल गया. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, ‘‘राष्ट्रीय सरेंडर संघ. नागपुर में फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद, अमेरिका में शुद्ध गुलामी." राहुल ने कहा कि राम माधव ने ही संघ का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है.
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार को घेरा
राम माधव के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता आक्रामक हो गई और सरकार को ट्रोल करने लगे. कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो पोस्ट कर लिखा, "नरेंदर के सरेंडर की कहानी, खुद BJP नेता राम माधव की जबानी. यह है असलियत - यही बात कांग्रेस पार्टी लगातार कह रही है. अमेरिका के आगे झुकते झुकते नरेंद्र मोदी ने टोटल सरेंडर कर दिया है. अमेरिका मोदी को किसी बात के लिए ब्लैकमेल कर रहा है और मोदी राष्ट्रहित का समझौता कर रहे हैं. अमेरिका की हर बात मानने की बात तो ख़ुद BJP नेता स्वीकार रहे हैं."
सरकार को घेरने कांग्रेस की रागिनी नायक भी आई. कहा कि "कितनी बेशर्मी से संघ/भाजपा नेता राम माधव मोदी जी के Compromised होने की गाथा सुना रहे हैं ! कह रहे हैं हमने ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद कर तो दिया, टैरिफ सर झुकाकर मान तो लिया अब क्या कमी रह गयी ? क्या करें बेचारे ? नाक रगड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी को तो झुकाना ही पड़ेगा ना."
राम माधव ने सफाई देते हुए मांगी माफी
राम माधव के बयान पर सोशल मीडिया पर गर्मा गर्मी हुई तो उन्हें सामने आकर सफाई तक देनी पड़ गई. एक्स पर राम माधव ने लिखा, "मैंने जो कहा वह गलत था. भारत, रूस से तेल का इंपोर्ट कभी भी रोकने के लिए राजी नहीं हुआ. साथ ही, उसने 50% टैरिफ लगाने का भी जोरदार विरोध किया. मैं दूसरे पैनलिस्ट की बात के जवाब में बस एक सीमित-सा तर्क देने की कोशिश कर रहा था. लेकिन, तथ्यों के लिहाज से मेरी बात गलत थी. इसके लिए मैं माफी चाहता हूं."
रूसी तेल खरीद और टैरिफ का पुराना विवाद
याद होगा आपको, पिछले साल रूसी तेल की खरीद एक बड़ा मुद्दा बन गया था. अमेरिका ने दावा किया था कि भारत का रूसी तेल खरीदना, यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को आर्थिक मदद देने जैसा है. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय इंपोर्ट पर 50% टैरिफ लगा दिया, जिससे दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब होने लगे.
इस सबके बावजूद भी भारत ने ट्रंप पर सीधा हमला नहीं किया. उसने बैकचैनल कूटनीति के रास्ते खुले रखे. भारत ने रूस से तेल का इंपोर्ट कम तो किया, लेकिन उसे पूरी तरह से बंद नहीं किया. फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बात चली, तो दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए, जिसमें ट्रंप ने टैरिफ घटाकर 18% कर दिया. हालांकि, अभी फाइनल ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन नहीं हुए हैं.
सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा
राम माधव ने भले ही डैमेज कंट्रोल करने की बहुत कोशिश कर ली हो लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे को लपक लिया है. सोशल मीडिया पर नैरेटिव की लड़ाई चलती है. विपक्ष सोशल मीडिया पर इस वीडियो को फैलाकर लोगों को ये बता रहा है कि सरकार अमेरिका के सामने, दुनिया की बड़ी ताकतों के सामने झुकता जा रहा है, इसलिए दुनिया भारत को झुकाती जा रही है.
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