2023 में तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बड़ा करिश्मा किया था रेवंत रेड्डी ने. 10 साल से तेलंगाना में राज कर रहे केसीआर की सत्ता उखाड़कर कांग्रेस की सरकार बनवाई थी. तब बीआरएस यानी केसीआर की पार्टी के 10 विधायक रेवंत रेड्डी के इतने बड़े फैन बने कि विधानसभा सदस्यता दांव पर लगाकर कांग्रेस ज्वाइन कर ली. इन विधायकों ने बिना इस्तीफा दिए अपनी पार्टियां बदली थीं. केसीआर ने उन विधायकों को माफ नहीं किया, लेकिन चूंकि विधायक सत्ताधारी पार्टी और सीएम रेवंत रेड्डी की साइड आए थे, इसलिए इतने दिन तक कुछ नहीं बिगड़ा. लेकिन अब अचानक खेल पलट गया है, वो भी सुप्रीम कोर्ट से.
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सुप्रीम कोर्ट ने BRS के दल-बदलुओं को दिया झटका
सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस के दल-बदलुओं को बड़ा झटका दिया है. तगड़ा झटका तो बीआरएस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले खैराबाद के विधायक दानम नागेंद्र को लगा. तेलंगाना हाईकोर्ट ने दल-बदल कानून के तहत दानम को अयोग्य ठहराया था, जिससे विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई थी.
दानम नागेंद्र की याचिका हुई खारिज
दानम नागेंद्र को लगा कि सुप्रीम कोर्ट से अपने हक में फैसला पा लेंगे, लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया. दानम नागेंद्र की याचिका खारिज करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा. ये कहते हुए कि ये मामला पूरी तरह 'आया राम, गया राम' जैसा है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद खैराबाद सीट अब खाली हो चुकी है. वहां उपचुनाव ही कराया जाएगा.
बाकी 8 बागी विधायकों पर भी खतरा
दानम नागेंद्र की विधायकी जाते ही कांग्रेस में शामिल हुए BRS के बाकी 9 बागी विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं. विपक्ष यानी BRS और बीजेपी का आरोप था कि तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर गद्दम प्रसाद कुमार जानबूझकर इन दल-बदलू विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं को दबाकर बैठे थे. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की इस मुहर के बाद स्पीकर के पास समय बहुत कम बचा है. 9 विधायकों पर भी दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत सदस्यता गंवाने का खतरा बराबर मंडरा रहा है. इसी डर के कारण पाटनचेरु से विधायक गुडेम महिपाल रेड्डी जैसे नेताओं ने तुरंत यू-टर्न लिया और कोर्ट की फटकार से बचने के लिए दोबारा 'मैं BRS के साथ हूं' का नारा बुलंद कर दिया. इस तरह बीआरएस से दल-बदल करके कांग्रेस ज्वाइन करने वाले बागी विधायक बचे कुल 8.
क्या रेवंत रेड्डी सरकार खतरे में है?
एक की सदस्यता जा चुकी है. एक लौट चुका है. बाकी 8 पर तलवार लटकी है. सीधा कनेक्शन ये जुड़ रहा है कि क्या रेवंत रेड्डी सरकार खतरे में है. जवाब है, फिलहाल तो नहीं. तेलंगाना का नंबर कहता है कि 119 विधायकों की तेलंगाना विधानसभा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 60 विधायकों का है. 2023 में कांग्रेस ने 64 सीटें जीती थीं. जो बहुमत से ज्यादा है. कांग्रेस को CPI के एक विधायक का भी समर्थन प्राप्त है. हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के सभी 7 विधायक मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के साथ खड़े हैं. ओवैसी के इस ऐलान के साथ कि समर्थन कांग्रेस को नहीं, सिर्फ रेवंत रेड्डी को है. अगर BRS से आए सभी 8-9-10 विधायकों की सदस्यता भी रद्द हो जाए, तब भी रेवंत रेड्डी की सरकार के पास सुरक्षित बहुमत रहेगा. सरकार को गिराना विपक्ष के लिए फिलहाल नामुमकिन है. BRS के पास चुनाव के वक्त 39 सीटें थीं. अब प्रैक्टिकली केवल 29 विधायक बचे हैं. बीजेपी के पास 8 थे और उतने ही हैं.
सरकार सुरक्षित, फिर खतरा किस बात का?
अगर सरकार सुरक्षित है, तो फिर इसे 'असुरक्षित' या 'अनसेफ' क्यों कहा जा रहा है? दरअसल, यह खतरा सरकार गिरने का नहीं, बल्कि पॉलिटिकल साख और उपचुनावों के चक्रव्यूह का है. अगर सुप्रीम कोर्ट के दबाव में बाकी बागी विधायकों की भी छुट्टी होती है, तो तेलंगाना में एक साथ 9 से 10 सीटों पर 'मिनी जनरल इलेक्शन' यानी बड़े पैमाने पर उपचुनाव की स्थिति बन जाएगी. रेवंत रेड्डी के सिर पर ये अनचाहा मिनी उपचुनाव आएगा. अगर सदस्यता गई, तो कांग्रेस और रेवंत रेड्डी पर सवाल कि दल-बदल करा भी लिया और सबकी सदस्यता चली भी गई.
KCR परिवार की संपत्तियों पर SIT जांच
रेवंत रेड्डी राजनीति के कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं. जैसे ही लगा कि दल-बदल वाला प्रेशर बढ़ रहा है, तो उन्होंने ऐसा काउंटर-अटैक किया, जिसने बीआरएस को बैकफुट पर धकेल दिया. सीधे पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के परिवार और BRS के बड़े नेताओं की संपत्तियों के खिलाफ SIT बना दी है.
388 एकड़ सरकारी जमीन पर आरोप
आरोप है कि करीब 388 एकड़ सरकारी जमीनों पर कथित रूप से कब्जा या अनियमितताएं की गई हैं. यह 30 दिनों की समयसीमा वाली स्पेशल इंक्वायरी टीम सीधे KCR परिवार की घेराबंदी कर रही है.
आगे क्या होगा?
नंबर गेम के लिहाज से ए. रेवंत रेड्डी की सरकार के पास ढाल है, जिसे हिला पाना फिलहाल बीआरएस-बीजेपी के बस की बात नहीं है. लेकिन कानूनी लड़ाई और नैतिक मोर्चे पर आने वाले दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे होने वाले हैं. KCR परिवार के खिलाफ SIT की जांच और खैराबाद में होने वाला उपचुनाव यह तय करेगा कि रेवंत रेड्डी इस पॉलिटिकल थ्रिलर के क्लाइमेक्स में एक विजेता की तरह उभरते हैं या फिर डिफेंसिव होते हैं.
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