महाराष्ट्र की राजनीति में मु्ंब्रा एक बार फिर सुर्खियों में है. वजह कोई सियासी फेरबदल या फिर ताजा बयानबाजी नहीं बल्कि AIMIM की पार्षद सहर शेख और उनके पिता है. ये वहीं सहर शेख है, जिन्होंने ठाणे महानगरपालिका का चुनाव जीतने के बाद बयान दिया था कि, 'पूरा मुंब्रा आनेवाले समय में हरा करना है'. और चर्चा का केंद्र बन गई थी. अब उनके पिता युनुस शेख ने एकनाथ शिंद की शिवसेना का दामन थाम लिया है. हिंदुत्व का नारा देने वाली शिंदे की शिवसेना में सहर शेख के पिता युनुस के एंट्री ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा काफी तेज कर दी है. हालांकि चर्चा को बढ़ता देख युनुस खान ने मामले को न्यूट्रल करने के लिए भी बड़ा बयान दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में तो दूसरी ही कहानी की चर्चा है. ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला, युनुस खान का बयान, शिवसेना से जुड़ने की पीछे की कहानी और कौन हैं सहर शेख जो खूब रहीं विवादों में.
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एकनाथ शिंदे के आदेश के बाद युनुस शेख को मिली ये जिम्मेदारी
जनवरी 2026 में ठाणे महानगरपालिका चुनाव हुए थे. इसी चुनाव में सहर शेख मुंब्रा के वार्ड नंबर 30 से AIMIM की टिकट पर चुनाव लड़ी और जीत कर पार्षद बनी थी. इसके बाद ही उन्होंने 'मु्ंब्रा हरा करने' वाला बयान दिया था, जिसे लेकर बवाल भी मचा था और फिर उन्होंने सफाई भी पेश की थी. अब उनके पिता युनुस शेख को शिवसेना के ठाणे के पदाधिकारियों की मौजूदगी में पार्टी में प्रवेश दिया गया. युनुस शेख को कलवा-मुंब्रा के केबल सेना अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. बता दें कि यह जिम्मेदारी खुद शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के आदेश के बाद दी गई है और यह बात युनुस शेख को दिए लेटर में भी लिखा हुआ है.
खबर वायरल होते ही युनुस ने किया खुद का बचाव
जैसे ही युनुस शेख की शिवसेना में जॉइन करने की खबर वायरल हुई, उन्होंने इसके बचाव में भी बयान दिया है. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि, यह कोई राजनीतिक प्रवेश(Political Entry) नहीं है, बल्कि शिवसेना की जो केबल ऑपरेटर्स की विंग है उसकी जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है.
युनुस शेख ने आगे कहा कि, मैं पिछले 40 साल से केबल ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहा हूं. शिवसेना की यह संस्था अखिल भारतीय केबल सेना के नाम से जानी जाती है. इसी संस्था में कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र के केबल ऑपरेटर्स के अध्यक्ष तौर पर मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि, एकनाथ शिंदे का काम देखकर हर तरफ से नेता शिवसेना के साथ जुड़ रहे हैं और शिवसेना की मजबूती के लिए मेरी जरूरत नहीं है. इन बातों के साथ उन्होंने अपनी राजनीतिक एंट्री को ट्विस्ट करने की कोशिश की है, लेकिन चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि शिवसेना के विंग में जिम्मेदारी मिलना अपने आप में ही शिवसेना में एंट्री लेना है.
महानगरपालिका चुनाव हराने के बाद जितेंद्र आव्हाड को चिढ़ाया था
युनुस शेख कई सालों तक राष्ट्रवादी पार्टी के नेता जितेंद्र आव्हाड के साथ काम किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके बीच काफी अच्छी दोस्ती भी थी और सहर शेख उन्हें अंकल कहकर बुलाती थी. लेकिन पिछले महानगरपालिका चुनाव में जब युनुस की बेटी सहर शेख को पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो इनके रिश्ते के बीच दरार आ गई और फिर सहर ने AIMIM के टिकट पर वार्ड नंबर से चुनाव लड़ा और जीता भी.
जीत के बाद मुंब्रा में सहर और युनुस शेख की जनसभा हुई तो उसमें सहर ने आव्हाड को निशाने पर लेते हुए चिढ़ाया था. उन्होंने खुली जनसभा में 'कैसा हराया...?' यह कहते हुए जितेंद्र पर निशाना साधा था. दरअसल, जहां से सहर शेख चुनाव जीतकर आई थी, वहां पूरी तरह से शरव पवार की NCP पराजित हो गई थी. इसी घटनाक्रम पर उन्होंने यह तंज कसा था.
युनुस ने क्यों जॉइन किया शिवसेना?
युनुस भले ही बोले की उन्होंने एक संस्था जॉइन की है, लेकिन चर्चाएं है कि एक तरीके से उन्होंने शिवसेना ही जॉइन कर ली है. इसी बीच एक और चर्चाएं तेज हो गई है कि युनुस ने अपनी बेटी का पद बचाने के लिए यह कदम उठाया है. दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(अजीत पवार गुट) के एक कार्यकर्ता सिद्दीकी फराह शबाब अहमद ने सहर शेख और उनके पिता युनुस शेख के OBC सर्टिफिकेट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई हुई है.
उन्होंने इस शिकायत में आरोप लगाया है कि चुनाव के लिए सरकारी तंत्र को पूरी तरह गुमराह किया गया है और गलत तरीके से OBC प्रमाणपत्र हासिल किए गए है. इस मामले की जांच ठाणे के तहसीलदार ने की है और OBC सर्टिफिकेट हासिल करते समय कई प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया गया है.
इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि सहर और युनुस शेख पिछले कई सालों से ठाणे में रहते हैं, लेकिन फिर भी मुंबई शहर कलेक्ट्रेट से OBC सर्टिफिकेट मिलना भी संदेहास्पद बताया गया है. इस पूरे मामले में सहर शेख का OBC सर्टिफिकेट रद्द करने और उनपर क्रिमिनल केस चलाने की मांग भी की गई है. फिलहाल मामला जाति वैधता समिति के दायरे में है और वो ही अब फैसला लेंगे की सहर शेख पार्षद के पद पर टिकी रहेंगी या नहीं. ऐसे समय में युनुस शेख का एकनाथ शिंदे की शिवसेना से जुड़ी संस्था में जिम्मेदारी मिलना महज संयोग है या फिर कोई और बात, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा काफी तेज है.
कौन हैं सहर शेख?
सहर शेख मुंब्रा के वार्ड नंबर 30 से AIMIM की युवा पार्षद और नेता है. वे जनवरी 2026 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में ठाणे महानगर पालिका के वार्ड नंबर 30 से चुनाव जीतकर राजनीति में आईं, जहां उन्होंने एनसीपी (शरद पवार) के उम्मीदवार को हराया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (BBM) की डिग्री ली है और वर्तमान में कानून (Law) की पढ़ाई कर रही हैं. सहर शेख की संपत्ति की बात करें तो चुनावी हलफनामे के मुताबिक, सहर शेख के पास करीब 6,98,840 रुपये नकद और 120 ग्राम सोना मौजूद है. इसके साथ ही, उन्होंने अपने परिवार की कुल वार्षिक आय 23,43,012 रुपये घोषित की है.
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