संसद के मानसून सत्र में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष का भाषण सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है. पहली बार की सांसद सयानी घोष ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति, बेरोजगारी और संसदीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने सत्ता पक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि यह सदन लोकतंत्र का मंदिर है और इसे किसी राजनीतिक दल का 'विज्ञापन पोर्टल' नहीं बनना चाहिए.
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लोकतंत्र के मंदिर में जवाबदेही की मांग
सयानी घोष ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री के लिए यह सदन मंदिर है, उसी तरह विपक्ष के लिए भी यह मंदिर है और संविधान उनके लिए गीता के समान है. उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सदन में बैठकर केवल 'वाह मोदी जी वाह' करने के बजाय महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. सयानी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि टीएमसी देश की तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और वह सरकार के 'सौतेले व्यवहार' के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगी.
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठाए सवाल
सांसद ने सरकार को घेरते हुए कहा कि चीन के आक्रामक रवैये को रोकने में सरकार विफल रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे देशों के राष्ट्रपति ट्विटर पर आकर हमें निर्देश देते हैं, तो सरकार उन्हें क्यों नहीं रोक पाती? सयानी ने कहा कि सदन के भीतर सांसदों को अपनी बात रखने से रोका जाता है, जबकि देश जानना चाहता है कि भारत किससे तेल खरीदेगा, किससे दोस्ती निभाएगा और किससे दुश्मनी रखेगा. उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और नेशनल सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर चर्चा न होने पर खेद जताया.
संसद के कामकाज के घटते दिनों पर चिंता
सयानी घोष ने आंकड़ों के जरिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने बताया कि 2009 से 2014 के बीच 15वीं लोकसभा 356 दिन चली थी (सालाना 61 दिन), लेकिन 2019 से 2024 के बीच यह घटकर केवल 274 दिन रह गई है. उन्होंने कहा कि 1952 के बाद से यह सबसे छोटा कार्यकाल रहा है. सयानी ने डेरेक ओ'ब्रायन के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया जिसमें मांग की गई थी कि सदन साल में कम से कम 100 दिन बैठना चाहिए. उन्होंने बताया कि संसद के हर मिनट पर ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं और चर्चा न होने के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.
संस्थानों को 'दंतविहीन' बनाने का आरोप
टीएमसी सांसद ने संस्थानों की घटती ताकत पर भी हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि CAG की रिपोर्ट पेश करने की संख्या में भारी कमी आई है. 2015 में जहां 53 रिपोर्ट पेश की गई थीं, वहीं 2023 में यह संख्या घटकर केवल 18 रह गई है. उन्होंने सवाल किया कि अगर रिपोर्ट ही पेश नहीं होंगी, तो पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) खर्चों की जांच कैसे करेगी? उन्होंने रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने के फैसले की भी आलोचना की और कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो गई है.
ओम बिरला के लिए पढ़ा खास शेर
अपने भाषण के अंत में सयानी घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मन में अध्यक्ष के लिए कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें इस बात का बुरा लग रहा है कि पहली बार सांसद बनने पर ही उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलना पड़ रहा है. उन्होंने ओम बिरला के चेहरे की मुस्कान बरकरार रहने की दुआ करते हुए एक शेर पढ़ा: 'तू लाख बेवफा है मगर सर उठाकर चल, दिल रो पड़ेगा तुझे पशेमान देख कर'.
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