तमिलनाडु का 'ठाकरे' करेगा बड़ा खेल! चुनाव से पहले NTK प्रमुख सीमन को मिली क्लीन चिट, क्या पलटेगी बाजी?

NTK Chief Seeman Clean Chit: तमिलनाडु के 'ठाकरे' कहे जाने वाले NTK प्रमुख सेंथामिझन सीमन को एक मानहानि केस में कोर्ट से क्लीन चिट मिली है. कोर्ट ने आईपीएस अधिकारी पर 'निजी दुश्मनी' के लिए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया. 70 से अधिक केस झेल रहे सीमन के लिए यह फैसला बूस्टर है.

NTK Chief Seeman Clean Chit
NTK Chief Seeman Clean Chit

रूपक प्रियदर्शी

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NTK Chief Seeman Clean Chit: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सेंथामिझन सीमन चर्चा में हैं. नाम तमिलर काची (NTK) के अध्यक्ष सीमन को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच से बड़ी राहत मिली है. आईपीएस अधिकारी वी. वरुण कुमार द्वारा दर्ज मानहानि केस में कोर्ट ने माना कि यह मामला निजी दुश्मनी पर आधारित था और कानून का गलत इस्तेमाल हुआ. 

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कोर्ट ने तिरुचि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा भेजा गया समन भी रद्द कर दिया. चुनावी मौसम में आया यह फैसला सीमन के लिए बड़ा बूस्टर माना जा रहा है, खासकर तब जब वे पहले ही 70 से ज्यादा मुकदमों का सामना कर रहे हैं.

तमिल राष्ट्रवाद का नया चेहरा

सेंथामिझन सीमन तमिलनाडु के स्ट्रलिंग नेता हैं, जिन्होंने 15 साल पहले तमिल फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर फुलटाइम राजनीति में आए. किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की बजाय उन्होंने नाम तमिलर काची (एनटीके) नाम की पार्टी बनाई. उन्होंने तमिलनाडु में तेजी से उभरती राजनीतिक ताकत नए आइकन के रूप में देखा जाता है.

तमिलनाडु का ठाकरे

चुनावी राजनीति में सीमन ने अभी तक कोई बड़े झंडे नहीं गाड़े. अग्रेसिव होकर तमिल राष्ट्रवाद की बात करते हैं. तमिलनाडु में बाहरी लोगों, हिंदी और श्रीलंका सरकार के खिलाफ बोलते हैं. तमिलनाडु का ठाकरे कहा जाता है सीमन को. सीमन एलान कर चुके हैं कि जिस दिन उनकी पार्टी सत्ता में आएगी वो तमिलनाडु के राज्य गीत तमिल थाई वाजथु को हटा देंगे. तमिल संस्कृति के आरोप लगते हैं लेकिन सीमन कहते हैं कि वो तमिल संस्कृति बचाने का काम कर रहे हैं.

सीमन और विजय के सियासी जंग

लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम लिट्टे के पक्ष में बोलने के कारण विवादित रहे हैं. 2009 में NSA के तहत गिरफ्तार करके जेल भी भेजे गए. उनकी पार्टी का झंडा तमिल ईलम के झंडे से मिलता-जुलता माना जाता है. जेल से निकलने के बाद उन्होंने एनटीके नाम की पार्टी बनाई. सीमन जब फिल्मों में थे तब भी पहली सफलता के लिए उन्होंने 15 साल का इंतजार किया. शायद राजनीति भी कुछ ऐसी ही उम्मीद में बढ़ रही है.

आसान नहीं जब तमिलनाडु में बड़े-बड़े अलायंस, ढेर सारी छोटी पार्टियां और विजय की टीवीके मैदान में है, तब भी सीमन अलायंस की पॉलिटिक्स से एकदम दूरी बनाए हैं. थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ताओं को गिलहरियों के बच्चे कहते हुए बोले कि एनटीके केवल शेरों का शिकार करेगा, गिलहरियों का नहीं. पलटवार में विजय ने खुद को शेर और सीमन के समर्थकों को गिलहरी के बच्चे बताया. इस लड़ाई से साफ है कि सरकार बनाने के दावे करते हुए सीमन और विजय के बीच एक-दूसरे की जगह लेने की लड़ाई जा रही है.

कांग्रेस के विरोध से शुरू हुआ सीमन का कैंपेन

सीमन ने राजनीति कैंपेन की शुरूआत कांग्रेस के प्रचंड विरोध से शुरू की थी. 2011 के चुनावों में उन 59 सीटों पर प्रचार किया जहां कांग्रेस लड़ रही थी और एक को छोड़कर सारी सीटों पर कांग्रेस की हार हुई भी. तब वो AIADMK की मदद कर रहे थे. 2014 के चुनावों तक सीमन ने राजनीतिक विरोध इतना बड़ा किया कि तमिलनाडु की हर पार्टी को हराने के लिए काम किया. उनकी अपील बेकार रही.

सीमन ने आज तक नहीं जीता चुनाव

2016 और 2019 में एनटीके ने अकेले लड़ने का प्रयोग किया लेकिन सीमन की पॉलिटिक्स जीरो रही. खुद सीमन भी चुनाव हारे. तमिलनाडु में आज तक कोई चुनाव नहीं जीतने के बाद भी सीमन पॉलिटिकल चर्चाओं के सेंटर में रहते हैं. ऐसा इसलिए पार्टी का वोट शेयर लगातार बढ़ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव एकतरफा डीएमके-कांग्रेस के पक्ष में गए लेकिन सीमन की पार्टी 8 परसेंट से ज्यादा वोट शेयर लेने में कामयाब रही. 12 सीटों में से हर सीट पर एनटीके उम्मीदवारों को एक लाख से ज्यादा वोट मिले. 6 सीटों पर एनटीके तीसरे नंबर पर रही. कुछ सीटों पर एनटीके को बीजेपी या AIADMK से ज्यादा वोट मिले.

2021 में एनटीके को करीब 7 परसेंट वोट मिले

2021 के चुनाव में सीमन की पार्टी को करीब 7 परसेंट वोट मिले थे. तब उन्होंने आधी सीटों पर महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था. सीमन कहते हैं जिन्हें राजनीति से बाहर किया वही उनके उम्मीदवार हैं. बड़ी पार्टियों को ये शक रहता है कि सीमन की पार्टी छोटी है लेकिन लाखों वोट् इधर से उधर कर सकती है. सीमन की लाइन क्लियर है कि वो किसी पार्टी के साथ अलायंस नहीं करना चाहते.

किसी से अलायंस नहीं करेगी एनटीके  

विजय की टीवीके और AIADMK ने एनटीके के साथ अलायंस में इंटरेस्ट दिखाया लेकिन सीमन ने Christ की कसम खाकर कहा कि वो किसी से अलायंस नहीं करेंगे. सीमन का मानना है कि अगर उन्हें मजबूत बनना है तो अकेले रहकर ही हो सकता है. अगर अलायंस ही करना होता तो बीजेपी के साथ 15 साल पहले अलायंस कर लिया होता. बीजेपी से इसलिए नाराज रहते हैं कि वो 0.25% या 0.5% वोट शेयर वाली पार्टियों से बात करती है लेकिन 8 परसेंट प्लस वाली एनटीके से नहीं. सीमन की लाइन है कि अगर ताकतवर लोगों की पार्टियों से हाथ मिलाऊंगा तो लोग मुझे गरीब, छोटा और कमजोर समझेंगे. 

कानून का गलत इस्तेमाल, कोर्ट से फटकार

तमिलनाडु के ही आईपीएस अफसर वी वरुण कुमार ने सीमन पर मानहानि का केस किया था. मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच की जज जस्टिस एल विक्योरिटा गौरी ने माना कि आईपीएस और डीआईजी वी वरुण कुमार ने सीमन से निजी दुश्मनी यानी personal vendetta के लिए कानून का गलत इस्तेमाल किया. कोर्ट जज ने जांच के लिए गलत प्रक्रिया अपनाने के लिए तिरुचि में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की भी खिंचाई की. हाईकोर्ट ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए तिरुचि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन को रद्द कर दिया.  

डीआईजी वरुण के लिए राहत के लिए वो चाहें तो नए सिरे से केस फाइल कर सकते हैं. तब तक सीमन को राहत ये है कि केस आगे नहीं बढ़ेगा. सारा विवाद तब शुरू हुआ जब जुलाई 2024 में NTK कार्यकर्ता दुरै मुरुगन को डीआईजी वरुण ने गिरफ्तार किय था. तब सीमन ने आईपीएस वरुण कुमार पर जाति सूचक कमेंट किए थे. सीमन की बात वरुण कुमार को लग गई और उन्होंने कोर्ट में घसीट लिया. जजमेंट देते हुए जज विक्टोरिया ने कहा कि नेता ब्यूरोक्रेटिक एक्शन की आलोचना कर सकते हैं. 

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