Shesh Bharat: आंध्र प्रदेश में चुनाव हारकर भी सोशल मीडिया पर भारी जगन रेड्डी, क्यों परेशान हैं सीएम नायडू और पवन कल्याण?

रूपक प्रियदर्शी

• 08:45 AM • 08 Jul 2026

Shesh Bharat: आंध्र प्रदेश में चुनाव हारने के बावजूद वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की सोशल मीडिया रणनीति चर्चा में है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने डिजिटल ट्रोलिंग, कथित फंडेड कैंपेन और सोशल मीडिया दुष्प्रचार पर चिंता जताई है. जानिए आखिर क्यों आंध्र प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया सबसे बड़ा चुनावी हथियार बन गया है और क्या है पूरी कहानी.

Andhra Pradesh Politics
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आंध्र प्रदेश में राजनीतिक दंगल अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बेहद आक्रामक और गंभीर सोशल मीडिया वॉर का रूप ले चुका है. साल 2024 के विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भी सूबे के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी सीएम पवन कल्याण विपक्ष की ट्रोल आर्मी से बेहद परेशान हैं. सत्ता की पूरी ताकत हाथ में होने के बावजूद, सोशल मीडिया के फ्रंट पर जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी (YSRCP) की डिजिटल आर्मी सत्तारूढ़ गठबंधन (TDP-JSP-BJP) पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने खुद अपने कुप्पम दौरे के दौरान इस पीड़ा को खुलकर जाहिर किया और विपक्ष पर सरकार के खिलाफ करोड़ों रुपए की फंडिंग देकर चरित्र हनन का हथियार इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया.

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पवन कल्याण और महिला मंत्रियों के खिलाफ भद्दा अभियान

चंद्रबाबू नायडू के इस गुस्से और चिंता के पीछे की बड़ी वजह डिप्टी सीएम पवन कल्याण, उनके परिवार और उनके निजी जीवन को लेकर सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा बेहद हिंसक और अभद्र अभियान है. विपक्ष की ट्रोल आर्मी के निशाने पर केवल पवन कल्याण ही नहीं, बल्कि सूबे की गृह मंत्री वंगलपुड़ी अनीता और चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश भी हैं. इन नेताओं के खिलाफ बेहद अश्लील भाषा, आपत्तिजनक टिप्पणियों और मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीरों का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है. 

पवन कल्याण को खासतौर पर इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वह जमीन पर इस गठबंधन के सबसे बड़े क्राउड पुलर यानी भीड़ जुटाने वाले नेता हैं. उनके प्रभाव को कम करने के लिए उनकी जाति, बयानों और व्यक्तिगत जीवन को लगातार तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे परेशान होकर खुद पवन कल्याण ने अपने कार्यालय में एक स्पेशल ग्रीवेंस सेल का गठन किया है.

अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं पर बरसे सीएम नायडू

सोशल मीडिया पर अपने सहयोगियों के चरित्र हनन को देख मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी (TDP) के बड़े नेताओं और डिजिटल विंग की बैठक में अपनी नाराजगी जाहिर की है. नायडू ने इस बात पर सख्त रुख अपनाया कि जब विपक्ष डिप्टी सीएम पवन कल्याण और गृह मंत्री अनीता को भद्दे तरीकों से निशाना बना रहा था, तब टीडीपी के कार्यकर्ता और डिजिटल विंग मूकदर्शक क्यों बने रहे. 

उन्होंने साफ संदेश दिया कि गठबंधन की सरकार को बचाने और विपक्ष के फेक नैरेटिव को तोड़ने की जिम्मेदारी सिर्फ पवन कल्याण या जनसेना पार्टी की नहीं है, बल्कि यह पूरी टीडीपी काडर का भी कर्तव्य है. नायडू विपक्ष के इस स्मेयर कैंपेन (दुष्प्रचार अभियान) को कुचलने के लिए अपनी पार्टी के भीतर की सुस्ती को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं.

नायडू सरकार का बड़ा डिजिटल क्रैकडाउन

इस डिजिटल दबंगई को रोकने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने अब पूरी ताकत झोंक दी है और पुलिस प्रशासन को खुली छूट दे दी है. सरकार के आदेश पर आंध्र पुलिस ने वाईएसआरसीपी के सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ हजारों मुकदमे दर्ज किए हैं. इस बड़े क्रैकडाउन के तहत पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी के बेहद करीबी और पूर्व चीफ पीआरओ पुडी श्रीहारी सहित केवी रेड्डी और प्रश्न रावण जैसे बड़े यूट्यूबर्स और राजनीतिक विश्लेषकों को आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की सख्त धाराओं के तहत गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया गया है. इसके अलावा, प्रशासनिक और कानूनी दबाव का इस्तेमाल कर वाईएसआरसीपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम और फेसबुक पेजेस को भारत में ब्लॉक (इनएक्सेबल) करवा दिया गया है और अब पुलिस सीधे सर्च और अरेस्ट वारंट जारी कर रही है.

अभेद्य कानूनी चक्रव्यूह और सोशल मीडिया प्रोटेक्शन बिल

विपक्ष के हमलों को कानूनी तौर पर कुचलने के लिए नायडू और पवन कल्याण की सरकार ने एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है. सरकार ने सोशल मीडिया क्राइम से निपटने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है, जो सीधे इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक पोस्ट के डिजिटल सबूत जुटा रही है. इसके साथ ही सरकार जल्द ही विधानसभा में एक सख्त 'सोशल मीडिया अब्यूज प्रोटेक्शन बिल' (Social Media Abuse Protection Bill) लाने की तैयारी में है. चंद्रबाबू नायडू ने विपक्ष पर 'फंडेड हेट कैंपेन' का आरोप लगाकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं; पहला उन्होंने जनता की नजरों में इन आलोचनाओं को 'पेड या बिकाऊ' साबित कर दिया है और दूसरा, पुलिस को इन ट्रोलर्स के खिलाफ सख्त से सख्त हंटर चलाने का एक बड़ा ग्रीन सिग्नल दे दिया है.

वाईएसआरसीपी का पलटवार, बताया राजनीतिक प्रतिशोध

सरकार की इस ताबड़तोड़ और आक्रामक कानूनी कार्रवाई को मुख्य विपक्षी दल वाईएसआरसीपी ने पूरी तरह से पॉलिटिकल वेंडेटा यानी राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चंद्रबाबू नायडू की सरकार अपनी चुनावी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. वाईएसआरसीपी का दावा है कि उनके सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में लेकर उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है. अब यह पूरा मामला आंध्र प्रदेश में अभिव्यक्ति की आजादी बनाम फंडेड हेट कैंपेन के बीच की एक बड़ी कानूनी और नैतिक बहस में तब्दील हो चुका है.

सोशल मीडिया पर दोनों सेनाओं के आंकड़े

आंध्र प्रदेश की इस डिजिटल जंग को समझने के लिए तीनों बड़े दलों की सोशल मीडिया आर्मी के आंकड़े देखना बेहद जरूरी है, जहां मुकाबला नंबरों में बराबरी का है लेकिन आक्रामकता में जगन रेड्डी आगे हैं. अगर व्यक्तिगत फॉलोअर्स की बात करें तो पवन कल्याण एक्स (ट्विटर) पर 50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ सबसे बड़े डिजिटल लीडर हैं. वहीं मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पास 49 लाख और वाई एस जगन मोहन रेड्डी के पास लगभग 45 लाख फॉलोअर्स मौजूद हैं. टीडीपी और वाईएसआरसीपी के आधिकारिक पेजेस पर 12 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं और दोनों ही पार्टियों के पास एक्स पर 8 से 9 लाख के बीच एक्टिव यूजर बेस है, जो किसी भी मुद्दे को तुरंत ट्रेंड कराने की ताकत रखता है.

जगन रेड्डी का संगठित डिजिटल नेटवर्क

सत्ताओं से बाहर होने के बावजूद जगन मोहन रेड्डी की टीम को मैदान में सबसे ज्यादा आक्रामक और संगठित माना जाता है. वाईएसआरसीपी की सोशल मीडिया विंग पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड तरीके से काम करती है, जिसके पास 4500 से अधिक रजिस्टर्ड सोशल मीडिया वॉलंटियर्स की एक कोर टीम है. जमीनी स्तर पर सूबे के सभी 26 जिलों को कवर करने वाले 2000 से ज्यादा मुख्य एक्टिव मेंबर्स सीधे पार्टी के मुख्य प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. 

इसके अलावा गांव से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले उनके WhatsApp ग्रुप्स का एक बहुत बड़ा जाल है, जिसमें 10 लाख से ज्यादा सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं. वाईएसआरसीपी ने अपने समर्थकों को सीधे जोड़ने के लिए बाकायदा एक 'डिजिटल बुक ऐप' और सोशल मीडिया आईडी कार्ड तक जारी किए हैं, जिसने सरकार की 'सुपर सिक्स' कल्याणकारी योजनाओं के खिलाफ एक ऐसा मजबूत काउंटर नैरेटिव तैयार किया कि पूरी सरकार बैकफुट पर दिखने लगी.

टीडीपी और पवन कल्याण की फैन आर्मी

विपक्ष के मुकाबले टीडीपी और जनसेना का नेटवर्क भी कम मजबूत नहीं है और उनका दावा है कि टीडीपी के पास लगभग 1.5 लाख (डेढ़ लाख) से ज्यादा अलाइंड व्हाट्सएप ग्रुप्स हैं, जिन्हें विभिन्न यूनियंस, क्षेत्रों और जातियों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है. इन ग्रुप्स के जरिए टीडीपी रोजाना सीधे 1 करोड़ से अधिक लोगों तक अपना नैरेटिव और सरकारी संदेश पहुंचाती है. 

वहीं दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम पवन कल्याण के पास किसी आधिकारिक आईटी सेल से भी बड़ी उनकी अपनी पर्सनल फैन फॉलोइंग है, जो किसी भी मुद्दे को मिनटों में नेशनल या रीजनल ट्रेंड्स में बदल देती है. इंस्टाग्राम और एक्स पर टीडीपी-जेएसपी गठबंधन के हजारों स्वतंत्र मीम पेजेस और अनऑफिशियल सपोर्टर्स अकाउंट्स भी एक्टिव हैं. इसके बावजूद वर्तमान स्थिति यह है कि इस पूरी डिजिटल जंग में जगन मोहन रेड्डी की आर्मी का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, जिसने सरकार के शीर्ष नेताओं को खासा परेशान कर रखा है.