Shesh Bharat: सीएम विजय ने तमिलनाडु उपचुनाव में कैसे जीतीं दोनों ही सीटें? समझिए सियासत का पूरा गणित

रूपक प्रियदर्शी

• 12:57 PM • 10 Oct 2026

Shesh Bharat: तमिलनाडु के सीएम विजय की TVK ने मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव में जीत दर्ज की. जानिए विजय की चुनावी रणनीति, ग्रामीण वोटरों को साधने के तरीके, दोनों सीटों पर जीत का अंतर और विधानसभा का पूरा नंबर गेम.

Vijay TVK By-Election Results
तमिलनाडु उपचुनाव में चल गया विजय थलपति का मास्टरस्ट्रोक
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क्या सिनेमा का एक मेगास्टार, जो आज तमिलनाडु का मुख्यमंत्री है, एक छोटे से उपचुनाव के लिए चिलचिलाती धूप में गांव की धूल फांक सकता है? क्या वो नेता जो सिर्फ डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया पर अपनी हवा बनाता था, सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम जनता से वोट मांग सकता है? जी हां, यह कमाल किया है सी. जोसेफ विजय ने. मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव हुए थलपति विजय का जलवा कायम हो गया है.

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क्यों हुए थे उपचुनाव?

विधानसभा चुनाव में दोनों ही सीटों पर AIADMK ने जीत दर्ज की थी लेकिन चुनाव के बाद दोनों सीटों के विधायकों के. मरगाथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा ने बगावत कर दी और विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में विजय की सरकार का समर्थन कर दिया. बाद में दोनों ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया और विजय की पार्टी TVK में शामिल हो गए. इसी वजह से दोनों सीटों पर मात्र 6 महीने के भीतर दोबारा उपचुनाव कराने पड़े. यह चुनाव इस बात का लिटमस टेस्ट था कि जनता ने उम्मीदवार को वोट दिया था या उनकी पुरानी पार्टी AIADMK को. विजय के लिए बहुमत के आंकड़े 118 के करीब पहुंचने के लिए ये सीटें जीतना बेहद जरूरी था.

कहानी यह है कि विजय की पार्टी TVK ने अप्रैल 2026 के आम चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया था, लेकिन पार्टी का जादू ज्यादातर शहरी और उन इलाकों में चला था जहां सैटेलाइट टीवी और इंटरनेट की पहुंच बहुत मजबूत थी. जब बात अर्ध-शहरी और पूरी तरह से ग्रामीण इलाकों वाले मदुरांतकम और धारापुरम सीटों के उपचुनाव की आई, तो विजय को समझ आ गया कि सिर्फ स्क्रीन और सोशल मीडिया से बात नहीं बनेगी. नतीजतन, उन्होंने अपनी नई उम्र की डिजिटल राजनीति को बदला और तमिलनाडु की उस पुरानी पारंपरिक 'प्लेबुक' को अपना लिया, जिसमें नेता सीधे जनता के बीच धूल-मिट्टी में उतरता है.

उपचुनाव में कैसे जीती TVK दोनों सीट?

विजय ने इस बार वो कर दिखाया जो उन्होंने अप्रैल के मुख्य विधानसभा चुनाव में भी नहीं किया था. विधानसभा चुनाव में विजय का पूरा फोकस सोशल मीडिया, सैटेलाइट टीवी, रील्स और हाई-टेक पीआर पर था, जिसका असर सिर्फ शहरी युवाओं पर हुआ. जनता से एक दूरी बनाकर चलते थे, रैलियां सिर्फ मंच तक सीमित होती थीं. उपचुनाव ग्रामीण इलाकों में थे तो विजय ने ग्रामीण वोटर्स को रिझाने के लिए खुद सफेद धोती-कुर्ता पहनकर मदुरांतकम के खेतों में ट्रैक्टर चलाते दिखे, बैलगाड़ी चलाई. विजय सुरक्षा घेरा तोड़कर सड़क किनारे आम चाय की थड़ियों पर बैठे, जनता के साथ चाय की चुस्कियां लीं और बुजुर्गों के पैर छुए.

साबित किया कि थलपति विजय सिर्फ सिनेमा के ही नहीं, बल्कि अब तमिलनाडु की राजनीति के भी असली 'कलेक्शन किंग' बन चुके हैं. उन्होंने समय रहते भांप लिया कि हवा का रुख बदलने के लिए एयर-कंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर जमीन की धूल माथे पर लगानी पड़ती है. विजय के इस देसी अवतार ने DMK और AIADMK के पैरों के नीचे से जमीन खिसका दी है.

काम कर गया सीएम विजय का 'मास्टरस्ट्रोक'!

विजय की 4 दिनों की धुआंधार जमीनी मेहनत और रणनीति का नतीजा सबके सामने आया. मदुरांतकम सीट पर TVK की के. मरगाथम कुमारवेल ने DMK के उम्मीदवार को हराकर टीवीके के लिए सीट जीत ली. धारापुरम सीट पर  शुरुआती राउंड में पिछड़ने के बाद, जैसे ही विजय का प्रभाव वाले शहरी ईवीएम खुले, TVK की पी. सत्यभामा ने जीत हासिल कर ली. 

TVK शुरुआत में तमिलनाडु की पारंपरिक फ्रीबीज की राजनीति के खिलाफ बात कर रही थी. ग्रामीण महिलाओं और किसानों को साधने के लिए विजय ने यू-टर्न लिया और घोषणापत्र में पुरानी द्रविड़ शैली की लोक-लुभावन कल्याणकारी योजनाएं शामिल कर लीं.

क्यों जीतना जरूरी था सीएम के लिए यह चुनाव?

अप्रैल के विधानसभा चुनाव में विजय की TVK ने 108 सीटें जीती थीं. सरकार तो बन गई, लेकिन 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से वो अब भी पीछे थे और सरकार सहयोगियों के भरोसे चल रही थी. मदुरांतकम और धारापुरम, ये दोनों सीटें मुख्य चुनाव में विपक्षी पार्टी AIADMK ने जीती थीं. लेकिन वहां के विधायकों ने पाला बदला, इस्तीफा दिया और विजय की पार्टी में शामिल हो गए. अगर विजय ये सीटें हार जाते, तो विपक्ष को उनकी सरकार पर उंगली उठाने का बड़ा मौका मिल जाता और उनके स्टारडम को झटका लगता.

अमूमन किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री छोटे-मोटे उपचुनावों में खुद जाकर गलियों में वोट नहीं मांगता, वे केवल एक-दो बड़ी रैलियां करते हैं. लेकिन विजय जानते थे कि यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा. अगर वे ये दोनों सीटें बड़े अंतर से जीतते हैं, तो विपक्ष (AIADMK) के कम से कम 10 और बागी विधायक उनकी पार्टी में शामिल होने को तैयार बैठे हैं, जिससे TVK बिना किसी बैसाखी के अपने दम पर पूर्ण बहुमत पा लेगी. इसी बड़े टारगेट को हासिल करने के लिए विजय ने अपना पूरा कैबिनेट और खुद को इन दो ग्रामीण क्षेत्रों में झोंक दिया.

विजय ने साबित कर दिया अपना दम!

थलपति विजय ने यह साबित कर दिया है कि वे सिर्फ रुपहले पर्दे के ही 'विजेता' नहीं हैं, बल्कि राजनीति की नब्ज पकड़ना भी बखूबी जानते हैं. जहां जरूरत पड़ी, वहां उन्होंने मॉडर्न स्क्रिप्ट को डस्टबिन में डाला और द्रविड़ राजनीति के उसी पुराने फॉर्मूले को अपनाया जिसने उन्हें ग्रामीण वोटरों के दिलों तक पहुंचा दिया. इन उपचुनावों के नतीजों ने तमिलनाडु की सियासत में स्टालिन की DMK और AIADMK के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, और मुख्यमंत्री विजय की कुर्सी को और ज्यादा मजबूत कर दिया है.

उपचुनाव को जीतना मुख्यमंत्री विजय के लिए सिर्फ दो सीटें जीतना नहीं था, बल्कि अपनी नई सरकार पर जनता का भरोसा अटूट करना था. उनके लिए यह साख का सवाल था ताकि फिल्मी पर्दे से राजनीति के शिखर पर पहुंचे उनके स्टारडम पर कोई आंच न आए और सचमुच ऐसा ही हुआ. नतीजों ने साबित कर दिया है कि TVK की तूफानी हवा आज भी वैसी ही बनी हुई है. विजय के विरोधी जो उन्हें 'पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन' कह रहे थे, वे पहले भी पस्त थे और आज के दंगल में भी बुरी तरह पस्त हुए हैं.

क्या है तमिलनाडु का असल नंबर गेम?

अप्रैल में थलपति विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रचा था और सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. चूंकि विजय खुद दो सीटों पेराम्बूर और त्रिची ईस्ट से जीते थे, इसलिए एक सीट खाली करने के बाद TVK के अपने विधायकों की सटीक संख्या 107 रह गई थी. यानी पूर्ण बहुमत 118 से वे 11 सीटें दूर थे. सरकार बनाने के लिए विजय ने कांग्रेस CPI , CPI(M), VCK और IUML के साथ गठबंधन किया. इन सहयोगियों के 13 विधायकों के समर्थन से विजय का आंकड़ा 120 पर पहुंचा और उन्होंने सरकार बनाई. 

सरकार तो गठबंधन के भरोसे बन गई, लेकिन बैसाखियों का डर खत्म करने के लिए विजय ने बड़ा दांव खेला. मुख्य चुनाव के ठीक बाद विपक्षी पार्टी AIADMK के 6 विधायकों ने बगावत कर दी और विधानसभा में विजय की सरकार को समर्थन दे दिया. नियमों के तहत इन बागियों ने अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया और TVK में शामिल हो गए. इन्हीं में से मदुरांतकम और धारापुरम की 2 सीटों पर अभी उपचुनाव हुए हैं. विजय की रणनीति साफ है, अगर वे इन उपचुनावों में जीत दर्ज करते हैं और बाकी बची 5 सीटों पर भी बाजी मारते हैं, तो सहयोगियों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन उपचुनावों के नतीजों को देखकर AIADMK के 10 और बागी विधायक लाइन में खड़े हैं, जो आने वाले दिनों में सीधे TVK की झोली में आ सकते हैं और विजय को पूर्ण बहुमत दिला सकते हैं.

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