Shesh Bharat: केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी 55 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, लेकिन इस लिस्ट ने खुशी से ज्यादा पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है. दिल्ली हाईकमान का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी मौजूदा सांसद (MP) को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया जाएगा. राहुल गांधी की इस 'नो एंट्री' पॉलिसी ने केरल कांग्रेस के कई दिग्गजों की नींद उड़ा दी है, जो अपनी सांसदी छोड़कर राज्य की राजनीति में वापसी की राह देख रहे थे.
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राहुल गांधी को क्यों है लोकसभा 'नंबर गेम' की चिंता?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में राहुल गांधी ने साफ किया कि सांसदों को चुनाव लड़ने के बजाय नए चेहरों को मौका देना चाहिए. इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह है- लोकसभा में कांग्रेस का आंकड़ा. वर्तमान में कांग्रेस 99 सीटों पर है. राहुल गांधी को डर है कि अगर केरल जैसे राज्यों से सांसद इस्तीफा देकर विधानसभा लड़ते हैं, तो संसद में पार्टी की संख्या कम हो जाएगी, जिससे केंद्र सरकार के खिलाफ उनकी लड़ाई कमजोर पड़ सकती है. हाल ही में असम के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे ने इस डर को और बढ़ा दिया है.
दिग्गज नेताओं की जिद और सरकारी बिलों का भुगतान
इस पॉलिसी के बावजूद, कन्नूर के सांसद के. सुधाकरन और अटिंगल के सांसद अदूर प्रकाश चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं. चर्चा है कि दोनों नेताओं ने नामांकन की तैयारी में तेजी दिखाते हुए दिल्ली और केरल के अपने सभी सरकारी बकाया बिलों का भुगतान कर दिया है और एनओसी (NOC) के लिए आवेदन भी कर दिया है. सुधाकरन अपनी पारंपरिक सीट कन्नूर और अदूर प्रकाश कोन्नी सीट से ताल ठोकना चाहते हैं. हालांकि, पहली लिस्ट में इन सीटों को खाली रखा गया है, जिससे सस्पेंस बरकरार है.
केसी वेणुगोपाल का नाम गायब, सीएम की रेस हुई दिलचस्प
सबसे ज्यादा चर्चा संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को लेकर है. राहुल गांधी के करीबी वेणुगोपाल का नाम पहली लिस्ट में न होने से कयासों का बाजार गर्म है.1996 से 2009 तक विधायक भी रहे. हालांकि 55 की लिस्ट में उनकी विधानसभा सीट अलाप्पुझा के लिए एलान नहीं हुआ है इसलिए ये सवाल बना हुआ है कि वो विधानसभा लड़ेंगे या नहीं.
दूसरी ओर, वी.डी. सतीशन (परवूर) और रमेश चेन्निथला (हरिपद) को टिकट मिल चुका है, जिससे यह साफ है कि मुख्यमंत्री पद की अंदरूनी जंग अब और तेज होने वाली है.
दलबदलुओं और सितारों पर दांव
कांग्रेस ने एलडीएफ (LDF) के किले में सेंध लगाने के लिए सीपीएम से आए नेताओं पर बड़ा दांव खेला है. वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व पीए सुरेश और पूर्व विधायक पी. आयशा पोट्टी को टिकट दिया गया है. साथ ही, युवाओं को रिझाने के लिए लोकप्रिय अभिनेता रमेश पिशारोडी को पलक्कड़ से मैदान में उतारा गया है.
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