Shesh Bharat: केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन? राहुल गांधी के इस एक फैसले ने बढ़ाया सस्पेंस

Shesh Bharat: केरल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स में कांग्रेस (UDF) की जीत के अनुमान के बीच राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए गुटबाजी शुरू हो गई है. वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थकों ने पोस्टरबाजी और विज्ञापन शुरू कर दिए हैं.

Shesh Bharat
Shesh Bharat

रूपक प्रियदर्शी

follow google news

केरल राजनीति के गलियारे में इस समय जो "कुर्सी युद्ध" चल रहा है, वह किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है. 29 अप्रैल 2026 को जैसे ही वोटिंग खत्म हुई और एग्जिट पोल्स के आंकड़े सामने आने लगे, कांग्रेस के भीतर छिपी महत्वाकांक्षाओं का ज्वालामुखी फट पड़ा. वोटिंग होने से पहले चल रही सीएम बनने की होड़ वोटिंग खत्म होने के बाद पोस्टर्स, बैनर्स तक पहुंच गई. इस उम्मीद में कि 10 साल बाद यूडीएफ यानी कांग्रेस अलायंस की केरल में सरकार बनने जा रही है. कांग्रेस खेमे में 'जश्न' से पहले 'जंग' शुरू हो गई. नेताओं को लगा कि अगर पार्टी जीत रही है, तो सीएम की कुर्सी पर दावा अभी से ठोक देना ठीक रहेगा. मामला इतना बढ़ा कि राहुल गांधी की एंट्री से केरल में राजनीतिक हड़कंप मच गया. जीत के बाद केरल में कौन सीएम होगी, कैसे सरकार बनेगी, राहुल गांधी ने सब क्लियर कर दिया.  

Read more!

बंगाल में वोटिंग खत्म होने के बाद 5 राज्यों के चुनाव खत्म हो गए. एक्जिट पोल आने शुरू हुए. नतीजे तो 4 मई को आएंगे. कांग्रेस नेताओं की महत्वाकांक्षाएं गलत नहीं है. एक्जिट पोल में कांग्रेस अलायंस यूडीएफ की सत्ता में वापसी के अनुमान लगने लगे. ज्यादातर बड़े एक्जिट पोल में अनुमान लगा दिया है कि केरल में कांग्रेस की सरकार बन रही है. 

मैटराइज और चाणक्य स्ट्रैटेजीज का एक्जिट पोल कहता है कि केरल में कांग्रेस की सरकार आ रही है. मैटराइज ने एलडीएफ को 60 से 65 और कांग्रेस के यूडीएफ को 70-75 सीटों का अनुमान लगाया है. नंबर और वोट शेयर में ज्यादा बड़ा गैप नहीं है लेकिन 10 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस के लिए एग्जिट पोल का अनुमान बड़ी राहत है कि चलो अब तक तीन थे. अब चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार और सीएम होगा.

चाणक्य स्ट्रैटेजीज के एक्जिट पोल में मैटराइज से ज्यादा सीटें कांग्रेस को मिल रही है. यूडीएफ को 72 से 80 और एलडीएफ को 58 से 64 सीटों मिलने का अनुमान है. वोट शेयर भी एलडीएफ से कहीं ज्यादा यूडीएफ का 44 से 46 परसेंट हो सकता है. मतलब केरल कांग्रेस के लिए सेफ दिख रहा है. 

ये तो एक्सपेक्टेड लाइन पर है लेकिन कांग्रेस की सरदर्दी जो शुरू से बनी है कि सीएम किसे बनाएं. वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला, के.सी. वेणुगोपाल के बीच लड़ाई है. तीनों ने दावा ठोंका हुआ है. सतीशन और चेन्निथला फुल टाइम केरल की पॉलिटिक्स में हैं, केसी वेणुगोपाल कांग्रेस के संगठन महासचिव होने के नाते पावरफुल भी हैं और राहुल गांधी के सबसे करीबी भी. 

केरल कांग्रेस में इसी सब थ्री-वे वॉर छिड़ी हुई है. हर गुट अपने नेता को भावी मुख्यमंत्री (Next CM) प्रोजेक्ट करने में जुटा है. विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन के समर्थकों का मानना है कि वही जीत के असली सूत्रधार हैं. उनके समर्थकों ने अलुवा और एर्नाकुलम में बड़े-बड़े फ्लेक्स बोर्ड्स लगाकर भावी मुख्यमंत्री घोषित कर दिया. रमेश चेन्निथला गुट ने एड देकर सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर दावेदारी मजबूत की. उनके समर्थन में तिरुवनंतपुरम के अखबारों में 'एडवरटोरियल' छपवा दिए. 

के.सी. वेणुगोपाल की ओर से ऐसी कोई बैटिंग नहीं हुई लेकिन रेस में तो हैं. केरल के हालात हाईकमान के लिए इसलिए डरावने हैं कि ऐसा ही कर्नाटक में भी चल रहा है. किसी को दबाकर, किसी को उठाकर कांग्रेस ने तीन साल सरकार सरकार तो चला ली लेकिन डीके प्रमोशन की डिमांड पर अड़े हैं.

जब केरल कांग्रेस का घमासान सोशल मीडिया से निकलकर अखबारों के विज्ञापनों और फ्लेक्स बोर्ड्स तक पहुंच गया, तो राहुल गांधी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा. इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के मुताबिक राहुल ने साफ संदेशा भिजवा दिया है कि चुनाव नतीजों से पहले इस तरह की गुटबाजी और मुख्यमंत्री पद के लिए प्रचार (canvassing) बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

केरल की प्रभारी महासचिव दीपा दासमुंशी को काम मिला है केरल के नेताओं को कड़ी चेतावनी देने और ये सब बंद करने का.  राहुल ने आदेश दिया है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही सभी सोशल मीडिया कैंपेनिंग और पोस्टरबाजी तुरंत बंद की जाए. अगर अनुशासन तोड़ा गया, तो चुनाव नतीजों की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी. सीएम का फैसला 4 मई को नतीजे आने के बाद आलाकमान ही करेगा. 

एग्जिट पोल्स में कांग्रेस की जीत का अनुमान इस लड़ाई को और बढ़ा सकता है. कड़े मुकाबले के बाद भी यूडीएफ की जीत का अनुमान है. जीत की उम्मीद ने नेताओं के भीतर छिपी महत्वाकांक्षाओं को जगा दिया है. उन्हें लग रहा है कि अगर UDF जीत रहा है, तो मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में खुद को अभी से स्थापित करना जरूरी है. 

कांग्रेस आलाकमान ने फिलहाल इस आग पर पानी डालने की कोशिश की है. पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला 4 मई 2026 को आने वाले आधिकारिक नतीजों के बाद ही लिया जाएगा. राहुल गांधी की इस दखलंदाजी ने फिलहाल के लिए 'कुर्सी के दावेदारों' को शांत तो कर दिया है, लेकिन असली सस्पेंस 4 मई को कांग्रेस की जीत के बाद भी जारी रहेगा.

    follow google news