Shesh Bharat: तमिलनाडु में चुनावी बिगुल बज चुका है. 23 अप्रैल को मतदान और 4 मई को नतीजे लेकिन चर्चा इस बार केवल ईवीएम (EVM) की नहीं, बल्कि उस 'एंगल' की है जिसने सोशल मीडिया से लेकर चेन्नई की गलियों तक हलचल मचा दी है. 4 मई को तृषा कृष्णन का जन्मदिन है और क्या इसी दिन थलपति विजय की राजनीतिक किस्मत का सितारा चमकेगा?
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इस सियासी ड्रामे के पीछे एक ऐसी लव स्टोरी और पारिवारिक रजामंदी की चर्चा है, जिसने 'पर्सनल' और 'प्रोफेशनल' के बीच की लकीर धुंधली कर दी है.
मां का खामोश इशारा और इंटरनेट पर धमाका
तृषा कृष्णन के करियर और जिंदगी की आयरन लेडी उनकी मां उमा कृष्णन मानी जाती हैं. हाल ही में एक फैन-मेड वीडियो, जिसमें विजय और तृषा की शादी का दावा किया गया था उसे उमा कृष्णन ने 'लाइक' कर दिया. क्या यह रजामंदी है? लोग इसे महज एक गलती नहीं बल्कि विजय को 'दामाद' के रूप में स्वीकार करने का संकेत मान रहे हैं.
उमा ने लिया था स्टैंड
2015 में जब वरुण मनियन के साथ तृषा की सगाई टूटी, तब उमा ही थीं जिन्होंने स्टैंड लिया कि बेटी की 'उड़ान' और 'एक्टिंग' से समझौता नहीं होगा.
विजय की निजी जिंदगी और सियासी दांव
थलपति विजय इस समय अपनी जिंदगी के सबसे बड़े चौराहे पर खड़े हैं. एक तरफ उनकी नई राजनीतिक पारी है, तो दूसरी तरफ 27 साल पुरानी शादी का टूटना. दिसंबर 2025 में पत्नी संगीता द्वारा तलाक का नोटिस दिए जाने की खबरों के बीच, विजय का तृषा के साथ एक मैरिज फंक्शन में पहुंचना बहुत कुछ बयां कर गया.
पत्नी की तरफ से लगाए गए आरोपों के बावजूद विजय ने समर्थकों से कहा है कि वे उनकी 'प्राइवेट लाइफ' की फिक्र छोड़ चुनाव पर ध्यान दें.
क्या तृषा बनेंगी विजय की 'स्टार प्रचारक'?
बाजार में गर्म चर्चा ये है कि क्या तृषा केवल विजय के जीवन का हिस्सा बनेंगी या उनकी पार्टी की 'महिला विंग' का मुख्य चेहरा? महिलाओं के बीच तृषा की लोकप्रियता विजय के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकती है. वहीं चेन्नई एयरपोर्ट पर मीडिया के सवालों पर तृषा की चुप्पी को 'तूफान से पहले की शांति' कहा जा रहा है.
चुनौतियां और कानूनी पेच
यह सफर इतना आसान नहीं है. विजय का तलाक अभी कानूनी प्रक्रिया में है. इस बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या तमिलनाडु की जनता विजय को 'तलाकशुदा' या 'दूसरी शादी' के टैग के साथ स्वीकार करेगी? और क्या तृषा, जो अब तक विवादों से दूर रही हैं, इस सियासी बवंडर में उतरने को तैयार हैं?
उमा कृष्णन का वह एक 'लाइक' रैंडम था या सोची-समझी रणनीति, इसका पता तो शायद 4 मई को ही चलेगा. लेकिन फिलहाल, तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा दोनों एक ही ट्रैक पर दौड़ रहे हैं.
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