Shesh Bharat: क्या पेरियार की विचारधारा है या कोई टोटका? जानिए सीएम विजय का 'ब्लैक कोट' पहनने का असली राज!

Shesh Bharat: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलपति विजय राजनीति में बड़े बदलाव कर रहे हैं. उन्होंने सरकारी कुर्सियों से ब्रिटिश काल के प्रतीक 'सफेद तौलिये' को हटाकर वीआईपी कल्चर खत्म किया है. साथ ही, पारंपरिक धोती-कुर्ते की जगह काला कोट पहनकर वह सामाजिक समानता और आधुनिक शासन का बड़ा राजनीतिक संदेश दे रहे हैं.

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रूपक प्रियदर्शी

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Shesh Bharat: तमिलनाडु की कमान संभालते ही नए मुख्यमंत्री थलपति विजय बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं. 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही विजय लगातार पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों को बदल रहे हैं. इस समय सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक उनके दो बड़े फैसलों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. पहला है सरकारी कुर्सियों से सफेद तौलिया हटाना और दूसरा है उनका लगातार काले कोट में नजर आना.

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नन्हीं पर्यावरण कार्यकर्ता की अपील पर हटाया 'सफेद तौलिया'

तमिलनाडु के सरकारी दफ्तरों में अब आपको अधिकारियों और मंत्रियों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया लिपटा हुआ नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री विजय ने इस दशकों पुरानी परंपरा को पूरी तरह खत्म कर दिया है. दरअसल, मणिपुर की रहने वाली मशहूर बाल पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम ने सीएम विजय से एक खास अपील की थी. उन्होंने सरकारी दफ्तरों से इस प्रथा को बंद करने को कहा था. जनता की आवाज सुनने वाले सीएम विजय ने तुरंत इस मांग को स्वीकार किया और अपनी कुर्सी से सफेद तौलिया हटा दिया.

क्या है सफेद तौलिये का इतिहास और वीआईपी कनेक्शन?

यह परंपरा भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान शुरू हुई थी. ब्रिटिश अधिकारियों को भारत की भीषण गर्मी में बहुत पसीना आता था. कपड़ों का पसीना कुर्सी पर न लगे और पीठ सूखी रहे, इसके लिए वे कुर्सी पर सफेद कपड़ा या तौलिया रखने लगे थे. आजादी के बाद यह धीरे-धीरे एक 'स्टेटस सिंबल' और वीआईपी कल्चर की पहचान बन गया. आज दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC) होने के बाद भी अधिकारी अपना रुतबा दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, जिसे अब सीएम विजय ने खत्म कर दिया है.

आखिर क्यों हर वक्त 'काला कोट' पहन रहे हैं मुख्यमंत्री?

सीएम विजय के पहनावे ने भी हर किसी का ध्यान खींचा है. तमिलनाडु के राजनेता आमतौर पर सफेद शर्ट और पारंपरिक धोती में दिखते हैं. इसके उलट, थलपति विजय हमेशा काले रंग के सूट और कोट में नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे अंधविश्वास या टोटके से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बड़ा सियासी संदेश मान रहे हैं.

काले रंग के पीछे का छिपा राजनीतिक संदेश

वास्तव में, तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से द्रविड़ आंदोलन और पेरियार ईवी रामासामी की विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इस विचारधारा में काले रंग को सामाजिक असमानता, अन्याय और रूढ़िवादिता के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जाता है. काला सूट पहनकर विजय खुद को एक आधुनिक, प्रगतिशील और 'एक्शन एडमिनिस्ट्रेटर' के रूप में पेश कर रहे हैं. इस नए लुक के जरिए उनका मकसद राज्य के युवा वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करना और अपनी छवि को पूरे देश में फैलाना है. उन्होंने साफ कर दिया है कि राज्य में सत्ता का केंद्र अब सिर्फ जनता और उनका काम है.

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