Shesh Bharat: जिस CJP का बीजेपी के नेता करते हैं विरोध, उसी को लेकर अब पार्टी के सांसद तेजस्वी सूर्या ने क्यों कर दी तारीफ? जानिए पूरी कहानी

रूपक प्रियदर्शी

• 10:32 AM • 28 Aug 2026

Shesh Bharat: बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने CJP और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके की तारीफ कर सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. आखिर जिस CJP का बीजेपी के कई नेता विरोध करते हैं, उसी के मुद्दों को तेजस्वी सूर्या ने क्यों सराहा? क्या यह BJP की रणनीति है या युवाओं के आंदोलन को समझने की कोशिश? जानिए तेजस्वी सूर्या के बयान.

Tejasvi Surya CJP Statement
Tejasvi Surya CJP Statement
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देश की राजनीति में इस समय एक अजीबोगरीब नाम की गूंज है, 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP. सोशल मीडिया के एक मीम से शुरू हुआ यह सफर आज बीजेपी और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब बीजेपी के सबसे आक्रामक और तेजतर्रार सांसदों में से एक, तेजस्वी सूर्या ने खुले मंच से CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की तारीफ कर दी. इस तारीफ ने सबको हैरान कर दिया है. नया सवाल खड़ा हो गया है कि क्या CJP और BJP के बीच कोई परदे के पीछे का खेल चल रहा है? विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

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CJP की क्रांति!

कहानी की शुरुआत मई 2026 में हुई. एक अदालती सुनवाई के दौरान जब बेरोजगार और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना कथित तौर पर 'कॉकरोच' से की गई, तो युवाओं का गुस्सा भड़क उठा. पुणे के रहने वाले और बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़े डिजिटल स्ट्रेटेजिस्ट अभिजीत दीपके ने इस अपमान को एक हथियार बना लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए एक काल्पनिक पार्टी की नींव रखी-'कॉकरोच जनता पार्टी'(Voice of the Lazy & Unemployed). कुछ ही दिनों में इस डिजिटल आंदोलन ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि इसके इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स हो गए. देखते ही देखते यह सोशल मीडिया का मजाक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल छात्र आंदोलन में बदल गया, जिसने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक का इस्तीफा ले लिया. आज CJP 'स्कूल ठीक करो' अभियान के जरिए सीधे सरकारी व्यवस्था पर प्रहार कर रही है.

BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने क्या दिया बयान?

घनघोर खींचतान के बीच, इंडिया टुडे के मंच पर बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या का बयान किसी बड़े धमाके जैसा था. सूर्या ने पार्टी की लाइन से अलग जाते हुए कहा CJP ने एक ऐसे समय पर युवाओं के मुद्दों को उठाया है जब उसपर बात करने वाला कोई नहीं था. मेरी एक सलाह है कि आप निष्पक्ष रहें और अपनी विश्वसनीयता बनाए रखें. सत्ता में कोई भी हो, मुद्दों पर स्वतंत्र रहें. सूर्या ने यह भी साफ किया कि अगर देश का युवा सरकार की नीतियों से नाराज होकर CJP के मंच पर आ रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह कांग्रेस या विपक्ष का समर्थक हो गया है.

बीजेपी सांसद के बयान के क्या है मायने?

इस बयान को अगर गहराई से डिकोड करें, तो तेजस्वी सूर्या ने तारीफ के बहाने CJP के सामने एक बहुत बड़ा 'सियासी जाल' बुन दिया है. सूर्या ने निष्पक्ष रहने की नसीहत देकर CJP की नीयत और उसकी विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने चुनौती दी कि अगर वो वाकई स्वतंत्र आंदोलन हैं, तो वे केवल महाराष्ट्र में ही क्यों, बल्कि पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे विपक्षी दलों के राज्यों के सरकारी स्कूलों पर भी आंदोलन करके दिखाएं. CJP के साथ जुड़ने वाला युवा वर्ग बीजेपी का सबसे मजबूत कोर वोटर रहा है. तेजस्वी सूर्या ने उनकी तारीफ करके यह संदेश दिया है कि हम आपकी नाराजगी को समझते हैं. ऐसा करके उन्होंने इस युवा आंदोलन को विपक्ष की गोद में बैठने से पूरी तरह रोक दिया है. इस चेतावनी के साथ कि राजनीति करेंगे तो राजनीतिक जवाब भी मिलेगा.

जहां एक तरफ बीजेपी नेता CJP को केवल एक 'अराजक सोशल मीडिया गैंग' या 'विपक्ष का टूल' मानकर खारिज कर रहे हैं, वहीं बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या जमीनी हकीकत को समझ रहे हैं. वो जानते हैं कि आज का युवा सोशल मीडिया और मीम्स से प्रभावित होता है. तेजस्वी ने दिपके को दबाने के बजाय उनसे संवाद  करने का रास्ता चुना. ये  बीजेपी की कोई स्ट्रैटजी हो सकती है कि बीजेपी इस नए दौर के आंदोलन से निपटने के लिए दो अलग-अलग रणनीतियां चल रही हो.

क्या BJP और CJP की है कोई सांठगांठ?

हालांकि तेजस्वी सूर्या का ये बयान ये साबित नहीं करता कि CJP और BJP आपस में मिले हुए हैं या मिल रहे हैं. बल्कि यह राजनीति के 'शह-मात' के खेल का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां सीधे टकराने के बजाय विरोधी की पीठ थपथपाकर उसे जनता की नजरों में बेनकाब करने की रणनीति अपनाई गई है. अब गेंद अभिजीत दीपके के पाले में है कि वे सूर्या के इस 'तारीफ वाले चक्रव्यूह' से अपने आंदोलन को कैसे बचाते हैं.

यह कहानी सिर्फ तेजस्वी और दीपके की नहीं है, बल्कि बदलते भारत की राजनीति की है. अब चुनाव या आंदोलन सिर्फ रैलियों से नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम रील्स और एक्स (ट्विटर) के ट्रेंड्स से तय होते हैं. एक काल्पनिक 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जंतर-मंतर तक पहुंचना और देश के सबसे बड़े नेताओं को उस पर बयान देने के लिए मजबूर करना यह साबित करता है कि डिजिटल कंटेंट अब असली 'किंगमेकर' है. तेजस्वी सूर्या खुद सोशल मीडिया के उस्ताद हैं, इसलिए वे इस ताकत को पहचानते हैं और इसे कम आंकने की गलती नहीं कर रहे हैं.

दिपके फिर करने जा रहें आंदोलन!

बीजेपी के बड़े नेता और सरकार CJP को कोई खास पसंद नहीं करते. अराजक और विपक्ष  प्रायोजित टूल ही मानते रहे हैं. सरकार की खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर आईटी मंत्रालय ने CJP के सोशल मीडिया अकाउंट बंद करा दिए जिसे बाद में कोर्ट ने हटाया. अब जबकि दिपके की टीम स्कूल ठीक करो अभियान चला रही है तब भी बीजेपी समर्थकों का आरोप है कि दिपके केवल बीजेपी शासित राज्यों के स्कूलों को निशाना बनाती है.

अभिजीत दिपके को भी सरकार कोई खास पसंद नहीं. पूरी तरह युवा विरोधी बताते हैं. आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर काम करने के बजाय तानाशाही और गुंडागर्दी पर उतर आई है. दिपके का दावा है कि बीजेपी सरकार उनके बढ़ते प्रभाव से डर गई है, इसलिए उनके कार्यकर्ताओं पर हमले करवाए जा रहे हैं और उन पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं. अब 5 सितंबर को जंतर मंतर पर एक और आंदोलन शुरू करने की तैयारी है. इस आरोप के साथ कि जंतर मंतर प्रोटेस्ट खत्म कराते समय जो वादे किए गए वो पूरे नहीं हुए. 

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