आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. मौका था आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वाई एस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) की जयंती का और जगह थी कड़प्पा जिले के इंदुपुलापाय का वाईएसआर घाट. इस खास मौके पर पिता की जयंती से ज्यादा चर्चा मां और बेटे के उस भावुक मिलन की हो रही है, जिसने पिछले कई महीनों से चल रहे करोड़ों रुपये के पारिवारिक और कानूनी विवाद पर एक पल के लिए पर्दा डाल दिया.
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वाईएस जगन मोहन रेड्डी और उनकी मां वाई एस विजयम्मा काफी समय बाद एक साथ नजर आए. हालांकि, इस रीयनियन की गूंज सिर्फ आंध्र प्रदेश तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसके तार राहुल गांधी के एक खास ट्वीट और कांग्रेस की उस पुरानी ऐतिहासिक भूल से भी जुड़ गए हैं जिसने कभी आंध्र का इतिहास बदल दिया था.
विवादों को दरकिनार कर गले मिलीं मां विजयम्मा
सुबह के वक्त जब वाईएसआरसीपी के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी अपने पिता को श्रद्धांजलि देने इंदुपुलापाय स्थित वाईएसआर घाट पहुंचे, तो वहां उनकी मां विजयम्मा पहले से ही मौजूद थीं. गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से इन दोनों के बीच सरस्वती पावर कंपनी के शेयर और बेंगलुरु की जमीनों को लेकर भयंकर कानूनी लड़ाई चल रही है, जहां जगन के खिलाफ एक नोटरीकृत हलफनामा तक जारी किया गया था. लेकिन तमाम कानूनी दलीलों और कड़वाहट को दरकिनार करते हुए जैसे ही जगन मोहन रेड्डी ने अपनी मां के पैर छुए, विजयम्मा भावुक हो गईं और उन्होंने अपने बेटे को गले लगा लिया.
कैमरों में कैद हुई ये तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि संपत्ति का विवाद चाहे जो भी हो, मां-बेटे का रिश्ता अभी भी जिंदा है. पारिवारिक विवाद सार्वजनिक होने के बाद यह पहला मौका था जब दोनों किसी सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने आए और मिले हैं, क्योंकि इससे पहले वे सिर्फ पारिवारिक त्योहारों या वाईएसआर से जुड़े स्मृति आयोजनों में ही साथ देखे जाते थे.
बहन शर्मिला ने सोची-समझी रणनीति के तहत बनाई दूरी
मां-बेटे के इस मिलन के बीच सबकी नजरें जगन मोहन रेड्डी की बहन वाई एस शर्मिला पर टिकी हुई थीं, लेकिन उन्होंने अपने भाई से सीधे टकराव और आमने-सामने की मुलाकात को पूरी तरह से टाल दिया. वाई एस शर्मिला सामूहिक प्रार्थना सभा के वक्त वाईएसआर घाट पर नहीं आईं. करोड़ों की संपत्ति के गंभीर कानूनी विवाद और तीखे राजनीतिक मतभेदों के चलते शर्मिला ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जगन से दूरी बनाए रखी.
वह जगन रेड्डी के वहां से चले जाने के बाद, एक अलग समय पर अपने बेटे, बहू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वाईएसआर घाट पर अपने पिता को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं. जगन से दूरी बनाने के बाद भी शर्मिला ने अपनी मां विजयम्मा को अपने साथ ही रखा और पिता को नमन करने के बाद वहीं पर मां और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ मिलकर केक काटकर अपने पिता का जन्मदिन मनाया. इस कदम से उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि मां विजयम्मा के साथ उनका भावनात्मक और राजनीतिक जुड़ाव पहले की तरह ही मजबूत है, लेकिन भाई जगन के साथ उनका रिश्ता आज भी बेहद कड़वाहट से भरा हुआ है.
राहुल गांधी का ट्वीट और कांग्रेस की वो ऐतिहासिक भूल
पारिवारिक रीयनियन के इस सियासी घटनाक्रम के बीच दिल्ली से भी एक बड़ा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई, जब राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर को श्रद्धांजलि दी और उन्हें एक जननेता व सच्चा स्टेट्समैन बताया. दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी ने पहले यह भी साझा किया था कि उनकी 'भारत जोड़ो यात्रा' असल में वाईएसआर की ऐतिहासिक पदयात्रा से ही प्रेरित थी. राजनीतिक गलियारों में राहुल के इस बयान को वाईएसआर की विरासत पर अपना दावा ठोकने और जगन की बहन वाई एस शर्मिला, जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष हैं, उन्हें राजनीतिक रूप से मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.
आज जब वाईएसआर की विरासत पर इतनी बड़ी जंग छिड़ी है, तो इतिहास के पन्नों को देखना भी जरूरी हो जाता है. माना जाता है कि साल 2009 में वाईएसआर के अचानक निधन के बाद दिल्ली कांग्रेस हाईकमान ने आंध्र की राजनीति में सबसे बड़ी भूल की थी, जब जनता और अधिकांश विधायक जगन मोहन या उनकी मां को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने इस भावना का सम्मान नहीं किया और उन्हें कोई सम्मानजनक पद नहीं दिया, जिससे नाराज होकर जगन ने कांग्रेस छोड़ी और वाईएसआरसीपी का गठन किया, जिसके बाद आंध्र से कांग्रेस का वजूद ही खत्म हो गया.
इस मिलन से जगन मोहन रेड्डी को क्या होगा राजनीतिक फायदा?
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद टीडीपी (TDP) लगातार जगन मोहन रेड्डी पर एक क्रूर भाई और बेटे का ठप्पा लगा रही थी, जो अपनी मां और बहन को प्रताड़ित करता है. लेकिन वाईएसआर घाट पर मां के गले लगाने की इन तस्वीरों ने विरोधियों के इस पूरे नैरेटिव को पूरी तरह से पंचर कर दिया है. वाईएसआर के प्रशंसकों और राज्य के कोर वोट बैंक के बीच अब यह संदेश गया है कि परिवार चाहे जितना भी बिखरा हो, वाईएसआर की असली विरासत और मां का आशीर्वाद आज भी जगन रेड्डी के साथ ही है.
कोर्ट और ट्रिब्यूनल में भले ही संपत्ति का मुकदमा चलता रहे, लेकिन जनता की अदालत में जगन ने खुद को एक संस्कारी और समर्पित बेटे के रूप में पेश कर बड़ी बढ़त हासिल कर ली है. हालांकि टीडीपी इस मुलाकात को कैमरे के लिए किया गया एक 'पॉलिटिकल ड्रामा' बता रही है और बहन शर्मिला ने भी दूरी बनाए रखी है, लेकिन सियासत के इस कुरुक्षेत्र में आज की बाजी निश्चित रूप से जगन मोहन रेड्डी के पक्ष में जाती दिख रही है.
बेटी शर्मिला के साथ ही रह रही हैं मां विजयम्मा
यह बात भी बेहद महत्वपूर्ण है कि वाईएस विजयम्मा वर्तमान में अपनी बेटी वाईएस शर्मिला के साथ ही रहती हैं. साल 2022 में जब वाईएस शर्मिला ने तेलंगाना में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी, तभी विजयम्मा ने जगन की पार्टी वाईएसआरसीपी के मानद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था ताकि वह अपनी बेटी का समर्थन कर सकें.
कभी-कभी वह आंध्र प्रदेश के कड़प्पा जिले में स्थित अपने पैतृक घर पुलीवेंदुला में भी वक्त बिताती हैं. संक्षेप में कहें तो जगन मोहन रेड्डी से मनमुटाव और कानूनी लड़ाई के बाद विजयम्मा पूरी तरह से अपनी बेटी शर्मिला के साथ शिफ्ट हो चुकी हैं और हैदराबाद में उन्हीं के परिवार के साथ रह रही हैं. ऐसे में कानूनी लड़ाई अपनी जगह जारी रहेगी, लेकिन वाईएसआर घाट से निकली मां-बेटे के मिलन की ये तस्वीरें आंध्र की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेंगी.
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