Charchit Chehra: कांग्रेस की स्टार, राहुल गांधी की सपोर्टर...फिर भी BJP को वोट, जानिए क्या है सोफिया फिरदौस के क्रॉस वोटिंग के पीछे छिपा असली खेल

Charchit Chehra: ओडिशा की राजनीति में अचानक उभरीं सोफिया फिरदौस आज सबसे बड़े विवाद का चेहरा बन गई हैं. कभी राहुल गांधी की पसंद मानी जाने वाली यह युवा नेता अब क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस से बाहर हैं. क्या ये सिर्फ बगावत थी या इसके पीछे छिपा है कोई बड़ा राजनीतिक और पारिवारिक समीकरण?

Sofia Firdous Cross Voting Controversy
Sofia Firdous Cross Voting Controversy

कीर्ति राजोरा

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Sofia Firdous Cross Voting Controversy: सोफिया फिरदौस की राजनीति में एंट्री किसी सोची-समझी प्लानिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि एक इमरजेंसी एग्जिट प्लान की तरह थी. उनकी कहानी में ग्लैम़र, बिजनेस और राजनीतिक मजबूरियों का एक दिलचस्प कॉकटेल है. सोफिया फिरदौस की कहानी केवल राजनीति की नहीं, बल्कि एक कॉरपोरेट साम्राज्य और पारिवारिक राजनीतिक विरासत के इर्द-गिर्द बुनी गई. इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की डिग्री, करोड़ों का फैमिली बिजनेस और फिर राजनीति में अचानक ओवरनाइट एंट्री और कांग्रेस से डे लाइट एग्जिट-सोफिया फिरदौस की प्रोफाइल किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. इस चमक-धमक के पीछे छिपी है एक पिता की अधूरी विरासत.

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देश में सोफिया फिरदौस की भयंकर चर्चा हो रही है. जिस सोफिया में राहुल गांधी कांग्रेस का भविष्य देख रहे थे उसी की बलि पार्टी के डिसिप्लिन के लिए देनी पड़ी. राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और कांग्रेस से निष्कासन के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच सोफिया फिरदौस बनी हुई हैं देश की चर्चित चेहरा.

पहले जानिए सोफिया कटक का बैकग्राउंड

अगस्त 1991 को जन्मी 34 साल की सोफिया कटक के रसूखदार राजनीतिक परिवार से आती हैं. उन्होंने KIIT भुवनेश्वर से सिविल इंजीनियरिंग की और IIM बेंगलुरु से एग्जीक्यूटिव जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया है. राजनीति में आना च्वॉइस नहीं, एक्सीडेंटल था. वो तो बिजनेस वुमन बनकर खुश थी. पिता की रियल एस्टेट कंपनी 'मेट्रो ग्रुप' की डायरेक्टर थीं. क्रेडाई (CREDAI) भुवनेश्वर की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं. उन्होंने कहां कभी सोचा था कि उन्होंने जो सोचा था वैसा किस्मत ने नहीं सोचा था.

2015 में बिजनेसमैन शेख मेराज उल हक से शादी

सोफिया की शादी 2015 में बिजनेसमैन शेख मेराज उल हक से हुई थी जो परिवारों की रजामंदी से हुई. सोफिया फिरदौस की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है. उनके पास 5 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है. सोफिया और मेराज का रिश्ता मोहब्बत के साथ-साथ मजबूत बिजनेस पार्टनरशिप का भी है, जो उन्हें ओडिशा के सबसे प्रभावशाली परिवारों में खड़ा करता है.

पिता बड़े रियल एस्टेट टाइकून

सोफिया फिरदौस ओडिशा के दिग्गज कांग्रेस नेता, पूर्व विधायक और रियल एस्टेट टाइकून मोहम्मद मुकीम की बेटी हैं. मुकीम मेट्रो ग्रुप के फाउंडर हैं, जो ओडिशा का बड़ा रियल एस्टेट ब्रैंड है. 2024 में जब सुप्रीम कोर्ट से ये फैसला हो गया कि लोन फ्रॉड के केस में उन्हें सजा भुगतनी होगी और चुनाव लड़ने पर रोक लगेगी तब सोफिया को पिता की विरासत संभालने के लिए मैदान में उतरना पड़ा. ऐसा नहीं करती तो शायद हमेशा के लिए कटक की पॉलिटिक्स से मुकीम की पकड़ छूट जाती.

ऑफिस छोड़ चुनावी मैदान में उतरीं

मुकीम को समझ आ गया कि उनकी राजनीति के लिए आगे के रास्ते बंद हैं तब उन्होंने बाराबती-कटक की सीट बचाने के लिए प्लान बी एक्टिव किया. बेटी से पूछना पड़ा-क्या तुम मेरी राजनीतिक विरासत संभालने चुनाव लड़ोगी? तब सोफिया फिरदौस मेट्रो कंपनी के प्रोजेक्ट में घर बनवी रही थीं. सोफिया ने बिना देर किए कॉरपोरेट ऑफिस छोड़कर सफेद खादी पहनकर चुनावी मैदान में उतर गईं. राजनीति में आने के बाद सोफिया फिरदौस ने अपना स्टाइल स्टेटमेंट ही सफेद साड़ी को बना लिया. जीत के साथ बंपर पॉलिटिकल लॉन्चिंग हुई. सोफिया में कांग्रेस को डबल फायदा दिखा. एक तो कटक अपने पास रहेगा. दूसरा एकदम न्यू, यंग फेस ओडिशा में कांग्रेस का चेहरा बनेगा.

इमेज, नैरेटिव और पहचान की राजनीति

सोफिया के राजनीति में आते कटक की बेटी का नैरेटिव भी चला तो हिजाब और स्कर्ट की चर्चा हुई. मॉडर्न वुमन सोफिया फिरदौस के स्टाइल स्टेटमेंट, लिबास पर बातें होने लगीं. नैरेटिव बनाया गया कि बाहरी या 'बिज़नेस घराने की लाडली' तो सोफिया ने पलटवार किया. उन्होंने नारा गढ़ दिया-कटक की बहू नहीं, कटक की बेटी का. खुद को एक ऐसी आधुनिक मुस्लिम महिला के रूप में पेश किया जो नमाज भी पढ़ती है और कंस्ट्रक्शन साइट पर हेलमेट पहनकर क्रेन भी चलाती है. इतिहास बना जब ओडिशा की विधानसभा में एक मुसलमान लड़की पहली बार विधायक बनकर आई. पहला भाषण उड़िया में देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वो ओडिशा की जमीन की राजनीति करने आई हैं, न कि हवाबाजी करने.

टीम राहुल की फेस थी फेसयंग 

सोफिया अक्सर कहती हैं कि रियल एस्टेट में वो घर बनाती थीं, अब राजनीति में भरोसा बनाना चाहती हैं. लेकिन विडंबना देखिए, जिस भरोसे के दम पर वे जीती थीं, आज उसी व्हिप के उल्लंघन के आरोप में उनका कांग्रेसी टैग कर छूट गया. सोफिया फिरदौस और राहुल गांधी के बीच का रिश्ता एक समय में अटूट विश्वास का था, जो हाल के राज्यसभा चुनावों से एकदम बदल गया. सोफिया टीम राहुल की सदस्य तो नहीं थीं लेकिन ओडिशा में यंग सोफिया टीम राहुल की फेस थी. अक्सर राहुल गांधी को अपना Leader and Inspiration बताती रहीं. पार्टी में सोफिया की इमेज इमरजिंग मुसलमान यंग वुमन लीडर की बन रही थी. ज्यादा पुरानी बात नहीं है. सोफिया फिरदौस ने राहुल गांधी के समर्थन में जुलाई 2025 को कटक के लालबाग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी कि राहुल गांधी की इमेज खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर एडिटेड और भ्रामक वीडियो डाले जा रहे हैं.

क्रॉस वोटिंग से बाद कहीं ये बात

सोफिया के क्रॉस वोटिंग की खबर ने राहुल गांधी को भी मायूस कर दिया. पार्टी ने विश्वासघात मानकर कलेजे पर पत्थर रखकर बाहर तो निकाला लेकिन भक्त चरण दास कहे बिना रह नहीं सके कि सोफिया ने खुद अपना उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य खत्म कर लिया. क्रॉस वोटिंग करने के बाद भी सोशल मीडिया पर वो राहुल गांधी को पोस्ट रीपोस्ट करके इशारा कर रही थी कि भले वोट पार्टी व्हिप के खिलाफ दिया लेकिन दिल से राहुल गांधी के साथ हैं लेकिन पार्टी पॉलिटिक्स में दिल कौन देखता है, देखा तो ये जाता है कि जरूरत के समय पार्टी के साथ हैं या खिलाफ. सोफिया पार्टी के खिलाफ देखी गईं. जब सोफिया पूछा गया कि क्या उन्हें डर नहीं लगा? तो उनका जवाब था "मैं अपने पिता की बेटी हूं, झुकना हमारे खून में नहीं. इस एक कदम ने उन्हें कांग्रेस का विलेन और बीजेपी का संभावित भविष्य बना दिया.

क्रॉस वोटिंग को लेकर ये नाराजगी?

दिसंबर 2025 में जब उनके पिता मोहम्मद मुकीम को कांग्रेस से निकाला गया, तब से सोफिया का मन कांग्रेस से उचलने लगा था. चीजें वहीं से खराब होनी शुरू हुईं. मार्च 2026 में सोफिया ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दी. कहा जाता है कि कांग्रेस ने मुकीम के मुश्किल वक्त में उनका साथ नहीं दिया, जिसका जवाब सोफिया ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ वोट देकर दिया. एक थ्योरी जो उन्होंने बताई कि बीजेपी की बी टीम नवीन पटनायक के साथ कांग्रेस कैसे अलायंस कर सकती है. उन्होंने सार्वजनिक बयान दिया कि पार्टी में अनदेखी हो रही थी.

परिवार का मिला समर्थन

मोहम्मद मुकीम ने भी कहा कि सोफिया ने बिल्कुल सही स्टैंड लिया. अपनी अंतरात्मा की सुनी और वह उसके फैसले के साथ खड़े हैं. क्रॉस-वोटिंग विवाद और कांग्रेस से निष्कासन के बीच, मेराज ने खुद को लाइमलाइट से दूर रखा है, लेकिन पिता मोहम्मद मुकीम और पति मेराज का समर्थन ही सोफिया को इतने कम वक्त की राजनीति में इतनी बड़ी बगावत करने की हिम्मत देता हो. अटकलें लग रही हैं कि केवल राजनीति का सवाल नहीं, सोफिया के सामने बीजेपी शासन में पिता और पति के बिजनेस का भी सवाल रहा होगा.

भविष्य पर सवाल

जिस सोफिया ने ओडिशा में महिलाओं और युवाओं के लिए एक मिसाल पेश की थी, आज उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान खड़े हैं. क्या ये उनके करियर का अंत है या किसी नए बड़े राजनीतिक सफर की शुरुआत? कांग्रेस की ओर से कोशिश है कि दल बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता भी खत्म कराई जाए. हालांकि इस मामले में सोफिया का पलड़ा कांग्रेस से कहीं ज्यादा भारी है. राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप तोड़ने से सदस्यता आसानी से नहीं जाती.

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